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बेटियों को पैरों पर खड़ा करने से पहले टूट गई किसान ताराचंद की सांस

एक बेटी जयपुर, दूसरी सीकर तो तीसरी सीकर में कर रही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, बेटा कुचामन में पढ़ रहा

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Farmer Tarachand's breath broke before making his daughters stand on their feet

Farmer Tarachand's breath broke before making his daughters stand on their feet

तरनाऊ. बदमाशों की गोली का शिकार हुए दोतीणा के किसान ताराचंद कड़वासरा का सपना था कि उसकी तीनों बेटियां पढ़-लिखकर सरकारी सेवा में जाकर अपने पैरों पर खड़ी हों, इसीलिए उसने ग्रामीण पृष्ठभूमि का होने के बावजूद अपने चारों बच्चों को अपने से दूर दूसरे शहरों में पढ़ने के लिए भेजा और रात-दिन मेहनत कर खेती की कमाई व उधारी से बच्चों की फीस भर रहा था। ताराचंद की तीन बेटियां व एक बेटा है, जिनमें सबसे बड़ी बेटी जयपुर में रहकर तो दूसरी सीकर व तीसरी कोटा में रहकर अपने पिता के सपने को साकार करने का प्रयास कर रही हैं। ताराचंद का सपना पूरा होता, इससे पहले ही बदमाशों ने उनकी सांसें खत्म कर दी।

ग्रामीणों ने बताया कि ताराचंद कड़वासरा ने गांव में रहकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने का सपना देखा था। ग्रामीण ओमप्रकाश कड़वासरा बताते हैं कि उनका सपना था कि तीनों बेटियां व बेटा सरकारी सेवा में जाए। इसी को लेकर ताराचंद की बड़ी बेटी मोनिका (22) ने बीपीएड करके पीटीआई भर्ती की परीक्षा दी, लेकिन एक अंक से रह गई। अब दुबारा जयपुर से तैयारी कर रही थी। वहीं दूसरी बेटी कोनिटा (20) सीकर के निजी एज्युकेशन सेंटर से नीट की तैयारी कर रही है, तो तीसरी बेटी बीना (17) कोटा में रहकर इंजिनियरिंग की तैयारी कर रही है। वहीं सबसे छोटा पुत्र नवीन (15) कुचामनसिटी में 11वीं कक्षा में पढ रहा है। महावीर कड़वासरा ने बताया कि ताराचंद का एक ही सपना था कि बच्चों की सरकारी नौकरी लगाऊं। ताराचंद कड़वासरा दिन-रात अपने खेत में मेहनत कर बच्चों को राजस्थान के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढा कर सक्षम बनना चाहता था।

गौरतलब है कि शनिवार सुबह सीकर के पिपराली क्षेत्र में गैंगस्टर राजू ठेहट की हत्या करके भाग रहे बदमाशों ने नागौर के दोतीणा निवासी ताराचंद की हत्या कर दी थी। ताराचंद सीकर में बेटी कोनिटा से मिलने गए थे। हत्या के बाद शनिवार सुबह से रविवार देर शाम तक ताराचंद का शव सीकर अस्पताल की मोर्चरी में ही रखा है तथा परिजनों व ग्रामीणों ने ताराचंद के बच्चों को शिक्षा, एक बच्चे को नौकरी व आर्थिक सहायता देने की मांग को लेकर धरना दिया है।

आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद खुद करता मेहनत

दोतीणा गांव के ग्रामीणों से जब पत्रिका संवाददाता ने ताराचंद कड़वासरा के परिवार की स्थिति को लेकर जानकारी जुटाई तो सामने आया कि अपनी जमीन के साथ गांव के अन्य किसानों की जमीन को कास्त पर लेकर ताराचंद दिन-रात मेहनत कर खेती में लगा रहता था। ताराचंद ने बेटियों से बहुत-सी उम्मीदें पाल रखी थी, जिसको लेकर बेटियों की पढाई में ताराचंद खेती की सारी कमाई लगा रहा था। ग्रामीण अर्जनराम जाट, भोलाराम मेघवाल ने बताया कि ताराचंद ने ख़ुद कभी अच्छे कपड़े तक नहीं पहने तथा बच्चों की अच्छी पढाई करवाने के लिए सबकुछ लगा रहा था। उसका एक ही सपना था कि उसकी बेटियां आगे बढे तथा सरकारी अफसर बने। अपने खेत में ट्यूबवेल करवा कर लोगों के खेत भी कास्त के लिए ताराचंद लेता था, ताकि फसलों से बच्चों को उच्च शिक्षा दिला सके।

गांव में दो दिन से नहीं जले चूल्हे, न ही मंदिरों में हुई पूजा

दोतीणा गांव के ताराचंद की गोली मारकर हत्या करने से गांव का माहौल गमगीन है। गांव में सन्नाटा पसरा है। परिवार में महिलाओं व ताराचंद कड़वासरा के माता-पिता को अभी तक ताराचंद की मौत की सूचना नहीं दी गई है। गांव के बाहर कुछ लोग बैठे हैं, जो गांव में आने वाले हर राहगीर से पूछताछ कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जब तक ताराचंद का शव घर नहीं आएगा, तब तक परिवार को जानकारी नहीं देंगे। उधर, गांव में हर कोई इस घटना से स्तब्ध है, गांव में दो दिन से लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। सबसे मिलनसार व हंसमुख स्वभाव के कारण ताराचंद की हत्या को लेकर ग्रामीणों में गहरा रोष भी है। ग्रामीण झुमरराम जाट, रामदेव, रूपदास ने बताया कि ताराचंद गांव में रहकर बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहता था। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि गांव के मंदिरों में दो दिन से पूजा भी नहीं की गई है। पूरा गांव इस हादसे को लेकर गमगीन है तथा सरकार से आरोपियों को सख्त सजा देने तथा ताराचंद के बच्चों को आर्थिक सहयोग देने के साथ ही एक बच्ची की नौकरी की मांग भी कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर चलाई सहयोग की मुहिम

उधर, ताराचंद की हत्या के बाद नागौर जिले में लोग सोशल मीडिया के जरिये उनके बच्चों को आर्थिक सहयोग देने को लेकर मुहिम चला रहे हैं। सरकार ने अब तक भले ही कोई घोषणा नहीं की, लेकिन गांव के साथ ही पूरे जिले में लोग ताराचंद की बेटियों को आर्थिक सहयोग देने के लिए आगे आ रहे हैं। ताराचंद की बेटियों के खाते में लोग आर्थिक सहयोग के रूप में पैसे जमा करवा रहे हैं, रविवार देर शाम तक बेटियों के खाते में लोगों का काफी आर्थिक सहयोग आता रहा।