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वीडियो : ‘ई-कागजी’ साबित हो रही ‘ई-नाम’ योजना

नागौर की दो मंडियां योजना में शामिल, लेकिन किसानों को नहीं मिल रहा फायदा, योजना के तहत होना था ई-ऑक्सन, लेकिन तीन साल बाद भी कागजों में हो रहा काम, केन्द्र सरकार ने राजस्थान की 25 कृषि मंडियों में ढाई वर्ष पूर्व शुरू की थी महत्वपूर्ण योजना, लेकिन धरातल पर हो रही खानापूर्ति

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Farmers can not get the benefit of 'E-NAM' scheme

Farmers can not get the benefit of 'E-NAM' scheme

नागौर. कृषि उपज मंडियों में किसानों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सितम्बर 2016 में केन्द्र सरकार की ओर से शुरू की गई ई-नाम योजना ढाई साल बाद भी धरातल पर मूर्त रूप नहीं ले पाई है। इसके कारण न तो इस योजना का लाभ किसानों को मिल रहा है और न ही व्यापारी इस कार्यप्रणाली के तहत काम करने की आदत डाल पाए हैं। हालांकि केन्द्र सरकार की ओर से अनुबंधित फर्म ने इस योजना के तहत काफी कर्मचारी भी लगा रखे हैं, जो इस योजना को लागू कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन व्यापारियों द्वारा रुचि नहीं दिखाने एवं हठधर्मिता के आगे उनकी एक नहीं चल रही है। गौरतलब है कि ई-नाम योजना से प्रदेश की 25 एवं देश की 585 कृषि मंडियों को जोड़ा जा चुका है, लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक कृषि मंडियों में इस योजना को 20 प्रतिशत भी लागू नहीं किया जा सका है।

ढाई साल में 134 किसान हुए लाभान्वित
सितम्बर 2016 से लागू इस योजना के तहत नागौर कृषि मंडी में अपनी उपज बेचने आए हजारों किसानों में से मात्र 134 किसान ही इस योजना से लाभान्वित हुए हैं तथा मात्र 58 व्यापारियों ने ई-नाम के तहत खरीद कर 21 लाख 726 रुपए का भुगतान किसानों के बैंक खातों में किया है। हालांकि हैदराबाद की अनुबंधित फर्म नागार्जुन फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड के कर्मचारियों ने इस योजना के तहत 952 व्यापारियों को इस योजना से जोड़ा है तथा 60 हजार 744 किसानों को पंजीकृत किया है।

प्लेटफार्म की बजाय कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे कियोस्क
ई-नाम योजना के क्रियान्वयन को लेकर खरीद स्थल पर रखने के लिए नागौर कृषि मंडी में आए तीन कियोस्क वर्तमान में कृषि मंडी कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं। अनुबंधित फर्म के मंडी एनालिस्ट ने बताया कि कियोस्क चालू करने के लिए वे तीन बार इंटरनेट कनेक्शन ले चुके हैं। मंडी के सामने आरओबी का निर्माण कार्य चलने के कारण बार-बार उन्हें जगह बदलनी पड़ रही है।

क्या है ‘ई-नाम’ योजना
राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है, जो कृषि से सम्बन्धित उपजों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करने के लिए मौजूदा एपीएमसी (कृषि मंडी) का एक प्रसार है। इस योजना को सितम्बर 2016 में लांच किया गया। ई-नाम पोर्टल सभी मंडियों से सम्बन्धित सूचना और सेवाओं के लिए एक ही स्थान पर सेवा प्रदान करता है। इसमें अन्य सेवाओं के बीच उपज के आगमन और कीमतों, व्यापार प्रस्तावों को खरीदने और बेचने, व्यापार प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया के लिए प्रावधान शामिल हैं।

‘ई-नाम’ योजना के उद्देश्य
- एक एकल लाइसेंस, जो राज्य भर में मान्य हो। व्यापारी का एक लाइसेंस राज्य भर के सभी बाजारों में मान्य रहेगा।
- बाजार शुल्क को एक स्तर में एकत्र करना।
- उत्कृष्ट मूल्य खोज के साधन के रूप में इलेक्ट्रॉनिक नीलामी का प्रावधान।

योजना के साझेदार
किसान : ई-नाम उत्पाद को बेचने और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य प्राप्त करने के लिए अधिक विकल्प प्रदान करता है।
व्यापारी : ई-नाम माध्यमिक व्यापार के लिए एक बड़े राष्ट्रीय बाजार का पहुंच प्रदान करेगा।
थोक खरीदार, संसाधक और निर्यातक : ई-नाम स्थानीय मंडी व्यापार में सीधी भागीदारी को सक्षम करेगा, जिससे वित्तीय मध्यस्थता के खर्च में कमी होगी।

माल का असली दाम दिलाने की कवायद
केन्द्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की उसकी उपज का गुणवत्ता के अनुसार असली भाव मिले। इसके लिए उपज की लैब में गुणवत्ता जांच होने के बाद हम उसकी सम्पूर्ण जानकारी वेबसाइट पर अपलोड कर देते हैं, जिसके बाद केवल स्थानीय मंडी ही नहीं, बल्कि देशभर के व्यापारी उस उपज को खरीद सकते हैं, अधिक व्यापारी होने से किसान को उच्च मूल्य मिल जाता है। इसमें किसान को जहां एक लाख के भुगतान पर एक हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है, वहीं व्यापारी को भी फायदा होता है।
- पवन तंवर, मंडी एनालिस्ट, नागार्जुन फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड

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