
Girdawari online, but not being issued through app
खरीफ 2080 की ऑनलाइन गिरदावरी का कार्य पूर्ण करते हुए जिले के किसानों एवं राजस्व विभाग ने प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। अब एक नवम्बर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद शुरू होने वाली है, जिसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई, लेकिन किसानों को ऐप से गिरदावरी की नकल नहीं मिलने से वे रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सके। हालांकि कुछेक पटवारियों ने ऑफलाइन गिरदावरी किसानों को बनाकर दी, लेकिन ज्यादातर ने ऑफलाइन के लिए मना कर दिया। गौरतलब है कि एमएसपी पर मूंग बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है और उसमें गिरदावरी की नकल आवश्यक है। विभागीय अधिकारी ऑनलाइन जिंसवार गिरदावरी जनरेट होने में एक-दो का समय लगने की बात कह रहे हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो परेशानी और बढ़ जाएगी।
किसानों ने दिखाई जागरुकता, अब सरकार की बारी
गौरतलब है कि बजट घोषणा अंतर्गत सरकार ने इस बार किसान गिरदावरी ऐप विकसित कर काश्तकारों को स्वयं गिरदावरी करने की सुविधा प्रदान की थी, जिसके तहत जिले के किसानों ने जागरुकता का परिचय देते हुए प्रदेश में सबसे अधिक ऑनलाइन गिरदावरी की। इसके बाद राजस्व विभाग के पटवारियों ने भी ऑनलाइन गिरदावरियों का भौतिक सत्यापन करते हुए काश्तकारों के स्तर पर शेष रहे खसरों की गिरदावरी का काम पूर्ण कर लिया है। इस कार्य में नागौर जिले की टीम खींवसर एवं डीडवाना-कुचामन जिले की टीम लाडनूं ने प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। दोनों जिलों की कुल 17 टीमों की दो दिन कड़ी मेहनत के बाद काम पूरा करते हुए प्रदेश में जिला स्तर पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। इसमें जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव की नियमित मॉनिटरिंग, राजस्व विभाग का प्रचार-प्रसार एवं राजस्थान पत्रिका की ओर से समय-समय प्रकाशित खबरों का विशेष योगदान रहा।
पटवार संघ ने कलक्टर को सौंपा ज्ञापन
ऐप के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन जिंसवार एवं गिरदावरी नकल नहीं मिल रही है। इसको देखते हुए राजस्थान पटवार संघ नागौर के जिलाध्यक्ष बुद्धाराम जाजड़ा व जिला महामंत्री बनवारीलाल गोरचिया के नेतृत्व जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पटवार संघ ने बताया कि जिले में ऑनलाइन गिरदावरी का काम पूरा हो गया है, लेकिन ऑनलाइन गिरदावरी नकल जनरेट नहीं हो रही है। जबकि एमएसपी पर मूंग व मूंगफली बेचने के लिए किसानों को गिरदावरी नकल की आवश्कयता पड़ेगी। ऐसे में किसान पटवारियों पर ऑफलाइन गिरदावरी नकल देने का दबाव बना रहे हैं, जबकि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए ऑनलाइन गिरदावरी नकल निकवाने की व्यवस्था की जाए।
जिला कलक्टर ने लिखा उच्चाधिकारियों को पत्र
ऑनलाइन जिंसवार गिरदावरी नकल जनरेट नहीं होने की जानकारी मिलने पर जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने चार दिन पहले ही सेटलमेंट कार्यालय जयपुर के आयुक्त को पत्र लिखा है। जिला कलक्टर ने पत्र में बताया कि पटवारियों ने गिरदावरी का कार्य पूर्ण कर लिया है, लेकिन राज खसरा गिरदावरी ऐप में जिंसवार रिपोर्ट जनरेट होने की सुविधा अभी तक नहीं है। कलक्टर ने पत्र में यह भी बताया कि समर्थन मूल्य पर खरीद कार्य शुरू होने वाला है, जिसके लिए काश्तकारों को गिरदावरी नकल अति आवश्यक होती है। चार दिन बाद भी शुक्रवार तक ऑनलाइन गिरदावरी जनरेट होने की व्यवस्था नहीं हो पाई।
पटवारी दे सकते हैं ऑफलाइन गिरदावरी
कलक्ट्रेट के भू-अभिलेख निरीक्षक कपित देव शर्मा ने बताया कि किसानों की परेशानी का ेदेखते हुए चार दिन पहले ही जिला कलक्टर ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है, जिसको देखते हुए एक-दो दिन में समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। तब तक गिरदावरी नकल की आवश्यकता हो तो पटवारी पूर्ण गिरदावरी के आधार पर हस्तलिखित नकल तैयार कर काश्तकारों को दे सकते हैं। ऐप से नकल जनरेट का ऑप्शन हो, तब तक एक बार यह व्यवस्था बन सकती है।
Published on:
28 Oct 2023 12:32 pm
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