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भगवान ने भरा 56 करोड़ का मायरा

नानी बाई रो मायरो कथा का समापन, भजनों पर झूमे श्रद्धालु

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pravachan

mayra

डीडवाना. राधाकृष्ण सत्संग समिति द्वारा शहर के आनन्द भवन में आयोजित नानी बाई रो मायरो कथा का गुरुवार को समारोहपूर्वक समापन हुआ। इस दौरान अनेक मनोहरी झांकियां सजाई गई, जिनके दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर कथावाचक मोनिका पारीक ने कहा कि भगवान को अगर सच्चे मन से हम याद करते है तो भगवान स्वयं हमारे पास चले आते है। नानी बाई रो मायरो की कथा भी भक्त और भगवान के आपसी प्रेम व भक्ति का प्रतीक है। इस कथा में भक्त नरसी ने अपनी भक्ति से भगवान श्रीकृष्ण को पा लिया। मायरा की कथा केवल कथा नहीं बल्कि भारतीय जीवन दर्शन का एक जीता जागता ग्रन्थ है। जिसमें सभी को प्रेम सौहाद्र्ध और भक्ति से जीने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि नरसीजी जब नानी बाई के घर गए तो उनके पास देने के कुछ नहीं था। ऐसे में भक्त नरसीजी ने भगवान को याद किया। उनकी पुकार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण राधा रूकमणी को साथ लेकर आए और 56 करोड़ का मायरा भरा। उन्होंने कहा कि नरसी भक्त के पास भगवान के भजन एवं भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा का ही परिणाम रहा कि भगवान स्वयं राधा रूकमण सहित आए और मायरा भरा। यह दर्शाता है कि सच्चे मन से भगवान को पुकारने पर भगवान स्वयं दौड़े चले आते है। मनुष्य पैसों से बड़ा नहीं बन सकता है। बल्कि उसके भाव एवं कर्म अच्छे हैं तो भगवान उसकी सहायता करते है।
भजनों पर झूमे श्रोता

कार्यकम में सम्पत दाधीच फरड़ोद ने सुन्दर व मनमोहक भजनों की प्रस्तुतिया दी। जबकि विष्णु दाधीच ने ऑरगन, राजेन्द्र सिंह चौहान ने तबला, मुकेश कुमार नागौरी ने अॅाक्टोपेड वादक पर सुर-ताल की संगत के कायम की। भजनों की प्रस्तुतियों ंसे श्रद्धालुगण भाव-विभोर हो गए। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा के संकीर्तन से पांडाल केा गुंजायमान कर दिया।
सजाई झांकियां

जसवंतगढ़ के कलाकार नन्दकिशोर टेलर ने अनेक आकर्षक झांकियां सजाई। वहीं पूनम शर्मा ने नरसी मेहता का किरदार निभाया। अंत में समिति की ओर से संगीतकारों, झांकी सजाने वाले कलाकारों का सम्मान किया गया।
सानिवि मंत्री ने की शिरकत

कथा समापन पर सार्वजनिक निर्माण व परिवहन मंत्री युनूस खान, गोपाल गौशाला के अध्यक्ष रमेश बांगड़, झालरिया मठ के व्यवस्थापक श्यामसुन्दर शर्मा, बृजमोहन शास्त्री, राजेन्द्र प्रसाद पटवारी, सुभाष गौड़, शिवशंकर पारीक, जगदीश जाजू, मनोज ध्यावाला, नटवर सोनी, श्यामलाल खेतावत, महावीर औझा, भंवरसिंह शेखावत, घीसाराम शर्मा, हनुमान प्रसाद पौद्दार, चन्द्रशेखर शर्मा, बजरंगलाल लदनिया, ओमप्रकाश मोदी, शंकरलाल परसावत, मांगीलाल पटवारी, मदनलाल आसेरी, रामगोपाल गौड़, नरेश उपाध्याय, मदनलाल बेगसरवाला, ओमप्रगकाश जांगिड़, बजरंग झंवर, परशुराम वर्मा, सरोज शर्मा सरस्वती शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।