
घट स्थापना में देवी-देवताओं का वास, साधक को मिलता है अनंत फल
नागौर. नवरात्र महोत्सव शनिवार को शुरू होगा। इसके लिए घर में घट स्थापना कर देवी का आह्वान किया जाएगा। घट स्थापना के मूल में भी यही है कि इससे सभी देवी-देवता एक जगह एकत्र हो जाते हैं। एक जगह इनका वास होने से आराधना करने वाले साधक को सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद व अनंत फल मिलता है।
ज्योतिषी पं. सुनील दाधीच ने बताया कि देवी पुराण के अनुसार घटस्थापना में चित्रा नक्षत्र और वेधर्ती योग दोनों को त्याज्य बताया गया है, लेकिन दोनों के 4 भाग में से 2 भाग यानि आधा समय बीत जाने के बाद स्थापना के लिए उचित माना गया है। चित्रा नक्षत्र का आधा भाग रात 4 बजे से पहले बीत जाएगा। इसलिए शुभ समय में सुबह से ही घट स्थापना की जा सकेगी। शनिवार सुबह 8.11 बजे से 9.35 बजे तक शुभ का चौघडिय़ा, और चर, लाभ, अमृत का चौघडिय़ा दोपहर 12.15 से 4.30 तक तथा दोपहर 11.00 बज कर 57 मिनट से 12.45 तक अभिजीत बेला में घटस्थापना की जा सकती है। मातेश्वरी की पूजा में जगदंबा को प्रिय पुष्प एवं फल आदि अवश्य समर्पित करने चाहिए। साथ ही पंचामृत से अभिषेक आदि भी करना चाहिए।
कलश स्थापना का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलश के मुख में विष्णु, कंठ में महेश व मूल में ब्रह्मा का स्थान माना गया है। कलश के मध्य स्थान में मातृशक्तियों का स्थान माना गया है। कलश को तीर्थों का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। एक तरह से कलश स्थापना करते समय विशेष तौर पर देवी-देवताओं का एक जगह आह्वान किया जाता है। कलश स्थापना से सम्पन्नता आती है। कलश में जल, सुपारी, दुर्वा, पुष्प आदि डाले जाते हैं, ताकि साधक में इनके गुण भी समाहित हो जाए। ज्वारारोपण के साथ ही अखंड दीपक की स्थापना भी की जाएगी। नौ दिन तक साधक आराधना में लीन रहेंगे।
Published on:
16 Oct 2020 10:26 pm
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