
Sobhagya Yojna
खींवसर. केन्द्र सरकार द्वारा घोषित ग्राम स्वराज अभियान को लेकर 14 अप्रेल से 5 मई तक ग्रामीण आवासों को विद्युतीकृत करने के लिए चलाई गई सौभाग्य योजना अधिकारियों की बेरूखी के कारण खटाई में पड़ गई। इस योजना के बहाने ठेकेदारों ने तो विद्युतिकरण का सामान उठा लिया, लेकिन ढाणियों के लोग आज भी बिजली को तरस रहे हैं। अधिकारियों के बेतुके जवाब ने उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सरकार ने तो अधिकारियों को गांवों में जाकर शिविर आयोजित करने एवं पात्र लोगों को तत्काल विद्युत कनेक्शन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उनके पास विद्युत कनेक्शन के लिए कोई नहीं आया। जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकारियों ने ग्रामीणों को इस योजना से अवगत ही नहीं कराया। ऐसे में भोले भाले ग्रामीण बिजली को तरसते रह गए और सरकार की महत्वपूर्ण सौभाग्य योजना की अवधि 5 मई को पूरी हो गई। वंचित गांवों के लोग आज भी चिमनी के सहारे रात काटने को मजबूर है। सरकार ने सबका साथ सबका विकास अभियान को लेकर विद्युत निगम को चयनित गांवों में बिजली पहुंचाने की विशेष जिम्मेदारी दी थी, लेकिन वो गांवों में बिजली पहुंचाना तो दूर वहां शिविर आयोजित कर लोगों को जानकारी तक नहीं दे पाए। सरकार ने अविद्युतीकृत आवासों में कनेक्शन देने एवं प्रोत्साहित करने के लिए विद्युत निगम के अधिकारियों को निगम स्तर, सम्भाग स्तर, जिला स्तर व ग्राम स्तर पर अधिकारी नियुक्त किए थे, लेकिन इन अधिकारियों ने चयनित गांवों से अभियान के दौरान दूरी बनाए रखी।
ग्रामीण पहले से ही परेशान
विद्युत व्यवस्था को लेकर ग्रामीण पहले से ही परेशान है। कई गांवों के ग्रामीणों द्वारा डिमाण्ड राशि जमा करवाने के बाद भी लोग चिमनी से ढाणियों में रोशनी कर रहे है। अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। ग्रामीणों ने वार्ड पंच से लेकर मंत्री तक अवगत करवाया, लेकिन नतीजा सिफर रहा है। गांवों में विद्युत चौपाल हो चाहे अधिकारियों की जनसुनवाई हर बार ग्रामीणों ने अपनी मांग रखी लेकिन सालभर पूर्व डिमाण्ड राशि जमा करवाने के बाद भी ढाणियों के ग्रामीणों को अंधेरे में रात काटनी पड़ रही है। उच्चाधिकारियों को बार-बार अवगत करवाने के बाद भी विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पा रहे है। जिससे ग्रामीणों का निगम एवं सरकार से भरोसा उठने लगा है। स्थिति यह है कि कई गांवों में तो लोगों ने तीन-तीन बार आवेदन पत्रावलियां जमा करवाई फिर भी आज वो बिजली आने की बाट जो रहे है।
यह थी योजना
सौभाग्य योजना के तहत राज्य सरकार ने प्रदेश में 599 गांवों का चयन किया था। इनमें नागौर जिले के 24 गांवों को चिन्हित किया गया। इन गांवों में घरेलू आवासों को सौभाग्य योजना के तहत 14 अप्रेल से 5 मई तक विद्युतिकृत करना था। इसके लिए ग्राम शक्ति दिवस के रूप में चिन्हित गांवों में शिविर आयोजित कर वंचित आवासियों को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत विद्युत कनेक्शन लेने के साथ विद्युत कनेक्शन देने के लिए प्रोत्साहित करना था। इनमें सम्बन्धित गांव के सहायक अभियन्ता, कनिष्ठ अभियन्ता व मंत्रालयिक व तकनीकी कर्मचारी को जिम्मेदारी दी गई थी।
होना था एलईडी बल्बों का वितरण
राज्य सरकार द्वारा सौभाग्य योजना के साथ उजाला योजना में चिन्हित गांवों में आयोजित शिविरों के दौरान एलईडी का वितरण किया जाना था, लेकिन शिविरों में एलईडी मिलना तो दूर विद्युत कनेक्शन तक नहीं हो पाए। योजना की अवधि 5 मई तक होने के बाद भी अनेक गांवों के ग्रामीण अब भी विद्युत कनेक्शन के लिए अभियन्ताओं के चक्कर लगा रहे है। ऐसे में सरकार के इस अभियान की पोल पट्टी साफ नजर आ रही है।
नहीं आए ग्रामीण
सौभाग्य योजना में चयनित गांवों में बिजली पहुंचाने के पूरे प्रयास किए है। कोई वंचित रह गए हैं तो वो हमारे पास आए नहीं थे। ऐसे में क्या करें वंचित लोगों को बिजली पहुंचाने के पूरे प्रयास करेंगे।
गणपतराम सारण, सहायक अभियन्ता नागौर ग्रामीण

Published on:
20 Jun 2018 06:57 pm
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