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भवन बनकर तैयार, सरकार नहीं खोल पाई प्राथमिक शिक्षा का द्वार

तीन साल से सूने पड़े हैं भवनों में आने लगी दरारें- नागौर जिले सहित प्रदेश के 134 मॉडल स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं के लिए भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत हुए भवन बनकर तैयार, राज्य की कांग्रेस सरकार ने मॉडल स्कूलों में प्राथमिक सेक्शन शुरू करने में रुचि नहीं दिखाई

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स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल

स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल

नागौर. प्रदेश के 134 ब्लॉक में करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपए खर्च कर बनाए गए प्राथमिक सेक्शन के आधुनिक भवन पिछले तीन साल से धूल फांक रहे हैं। राज्य सरकार एक तरफ बिना संसाधन के महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलें खोल रही हैं, वहीं स्वामी विवेकानंद के नाम से गत भाजपा सरकार की ओर से खोले गए मॉडल स्कूलों में सुसज्जित आधुनिक भवन होने के बावजूद प्राथमिक सेक्शन में प्रवेश प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई है।

हर बार मांगते हैं रिपोर्ट, लेकिन प्रवेश की स्वीकृति नहीं
शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि मॉडल स्कूलों में करीब तीन-साढ़े तीन साल पहले करोड़ों रुपए खर्च कर हैरिटेज लुक देकर बनाए गए आधुनिक भवनों को बच्चों से आबाद करने के लिए हर वर्ष प्रस्ताव मांगे जाते हैं, लेकिन राज्य की गहलोत सरकार ने चार साल में एक भी विद्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार प्राथमिक कक्षाएं एलकेजी से शुरू होंगी, जिसमें एलकेजी, यूकेजी व पहली कक्षा में 15-15 नामांकन प्रस्तावित हैं, जबकि दूसरी से पांचवी तक 40 विद्यार्थियों का प्रवेश लेना प्रस्तावित है। हालांकि निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होना है।

जानिए, मॉडल व महात्मा गांधी स्कूलों में अंतर
शिक्षा विभाग के ही किसी अधिकारी ने मॉडल स्कूल व महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की आपस में तुलना की, जिसमें मॉडल स्कूलें कई दृष्टि से श्रेष्ठ है। इसके बावजूद बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। मॉडल स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम है, वहीं महात्मा गांधी में आरबीएसई की मान्यता है। मॉडल विद्यालयों में नया भवन, नया विद्यालय, संगीत कला, आर्ट एंड क्राफ्ट, शारीरिक शिक्षा के लिए अतिरिक्त शिक्षक, प्राथमिक विद्यालय के लिए अलग से भवन बनकर तैयार है। वहीं महात्मा गांधी विद्यालयों में पुराने विद्यालयों को बंद कर उनके स्थान पर संचालन करने के साथ कोई अतिरिक्त स्टाफ और भवन नहीं है। मॉडल स्कूलों से पुराने स्थापित विद्यालयों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, जबकि महात्मा गांधी विद्यालय पुराने हिन्दी माध्यम विद्यालयों को उजाड़कर बनाए जा रहे हैं। मॉडल स्कूलों के विद्यालयों की कलस्टर व राज्य स्तर पर 8 तरह की खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं, जबकि महात्मा गांधी में ऐसा नहीं है। मॉडल स्कूल में सुसज्जित प्रयोगशालाएं भी बनाई गई हैं और अलग से गणवेश भी है, जबकि महात्मा गांधी में नहीं है।

भवन तैयार, अनुमति का इंतजार

मॉडल स्कूलों में प्राथमिक सेक्शन के भवन बनाने के लिए दो स्वीकृतियां जारी की गई, जिसमें एक 71 लाख की व दूसरी 48 लाख की थी। करीब एक करोड़ 19 लाख रुपए प्रति स्कूल खर्च हुए। जिले के 9 ब्लॉक में मॉडल स्कूल संचालित हैं और सभी में प्राथमिक सेक्शन के भवन बनकर तैयार हैं। हर साल हम प्रस्ताव भी मुख्यालय भेजते हैं। अब तक प्रवेश की स्वीकृति का इंतजार है।

- बस्तीराम सांगवा, एडीपीसी, समसा, नागौर