
Government facing power crisis understood the cost of solar energy
नागौर. कोयले की पर्याप्त आपूर्ति के अभाव में प्रदेश में बार-बार उत्पन्न हो रहे बिजली संकट को देखते हुए राजस्थान सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक योजना शुरू है। सोलर कृषि आजीविका योजना के नाम से शुरू की गई इस योजना के अन्र्तगत जो भी किसान/जमींदार तथा सोलर प्लांट डेवलपर्स 33/11 केवी जीसएस के पांच किलोमीटर के दायरे में सोलर प्लांट लगवाने पर लाभान्वित किया जाएगा। इसके साथ किसान/जमींदार स्वयं सोलर प्लांट नहीं लगाना चाहें तो अपनी जमीन को फिक्स्ड लीज राशि पर सोलर प्लांट डेवलवर्स को लीज कर सकेंगे। ऐसे सोलर प्लांट से उत्पादित सोलर ऊर्जा को डिस्कॉम की ओर से 25 वर्षों तक गारंटी खरीद की जाएगी। सोलर प्लांट के लिए न्यूनतम एक हेक्टर भूमि होना आवश्यक है।
इस योजना से किसानों को सस्ती सौर ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी, जिससे बिजली खरीद लागत, वितरण एवं व्यवसायिक हानियों में कमी आएगी। बिजली उत्पादन और उसकी खपत दोनों उपभोक्ता के नजदीक होने से विद्युत वितरण ढांचे एवं वितरण हानि में भी कमी आएगी।
योजना का उद्देश्य
पीएम- कुसुम कंपोनेंट सी (फीडर लेवल सोलराइजेशन) के तहत विकेन्द्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए सरकार ने सोलर कृषि आजीविका योजना शुरू की है। इसके तहत राजस्थान डिस्कॉम्स के चिह्नित 33/11 केवी सब स्टेशन के पास भूमि बैंक बनाने के लिए राज्य के किसानों/भूमि मालिकों को निर्धारित राशि के आधार पर अपनी जमीन को लीज पर देने का अवसर प्रदान किया जाएगा। पीएम-कुसुम योजना का घटक ‘सी’ (फीडर लेवल सोलराइजेशन) के माध्यम से फीडर स्तर पर सोलर पावर प्लांट की स्थापना के प्रावधान के साथ कृषि फीडर की वार्षिक ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए विकेन्द्रीकृत सौर उत्पादन के समान है। सौर पावर प्लांट परियोजनाओं की सफल स्थापना के लिए प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण कार्य भूमि की पहचान, इसकी खरीद और लागत है। इसलिए इसे सरल बनाने के लिए राजस्थान डिस्कॉम्स ने किसानों/भूमि मालिकों और विकासकर्ता (डेवलपर्स) के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए एक पोर्टल बनाया गया है, जहां किसान अपनी बंजर या अनुपयोगी जमीन को लीज पर देने के लिए दस्तावेज अपलोड कर खुद को पंजीकृत कर सकेंगे और डेवलपर्स उपलब्ध जमीन के हिसाब से उसे लीज पर ले सकेंगे।
राजस्थान को हरित ऊर्जा प्रदेश बनाने की सोच
डिस्कॉम के अभियंता अर्जुनसिंह राठौड़ ने बताया कि राजस्थान को एक हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए राज्य की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 142 गीगावाट तक ले जाने की मंशा है। ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी 26) में भारत की प्रतिबद्धता में योगदान करने के लिए ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों (अर्थात कोयला, तेल, गैस आदि) पर निर्भरता कम करके 'शुद्ध शून्य उत्सर्जन' के लक्ष्य को प्राप्त करने की मंशा जाहिर की गई है। इसके साथ अपने सभी उपभोक्ताओं को एक स्थायी, विश्वसनीय और सस्ती बिजली प्रदान करना भी राजस्थान सरकार का लक्ष्य है।
कृषि भार वाले सेंटर चिह्नित
सौर कृषि आजीविका योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से कृषि भार वाले लोड सेंटर के आसपास (लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में) सौर ऊर्जा संयंत्रों को बढ़ावा देने के लिए पीएम-कुसुम कंपोनेंट 'सी' के तहत राज्य सरकार ने एसकेवाई तैयार की है। डिस्कॉम ने पोर्टल पर ऐसे सेंटरों की जानकारी अपलोड की है। नागौर में ऐसे कुल 43 जीएसएस हैं।
योजना के लाभ
किसान/भूमि स्वामी - किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ किसानों को बंजर/अनुपयोगी भूमि के लिए लीज शुल्क के रूप में अतिरिक्त आय होगी।
डेवलपर्स - राज्य भर में किसानों/भूमि मालिकों के संपर्क विवरण के साथ उपलब्ध भूमि तक पहुंच सुनिश्चित होगी। इसके साथ निर्धारित टैरिफ पर 25 वर्षों के लिए डिस्कॉम की ओर से सौर ऊर्जा की खरीद की गारंटी दी जाएगी।
25 वर्ष खरीद की गारंटी मिलेगी
सौर कृषि आजीविका योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने वाले से डिस्कॉम की ओर से 25 वर्षों तक गारंटी खरीद की जाएगी। सोलर प्लांट लगाने के लिए न्यूनतम एक हैक्टर भूमि होना आवश्यक है तथा 33/11 केवी जीएसएस के पांच किमी के दायरे में लगाया जा सकेगा। इसमें किसान अपनी बंजर और अनुपयोगी जमीन लीज पर देकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेंगे।
- एफआर मीणा, अधीक्षण अभियंता, डिस्कॉम, नागौर वृत्त
Published on:
08 Nov 2022 01:42 pm
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