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सरकार नहीं संभाल रही आयुर्वेद चिकित्सा विभाग: यहां लग रहे चिकित्सा केन्द्रों पर ताले

Nagaur. नागौर जिले में चार दर्जन से ज्यादा आयुर्वेदिक चिकित्सकों के पद चल रहे हैं कई सालों से खाली- खाली चिकित्सकों के पदों के कारण आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्रों चार-पांच दर्जन चिकित्सा केन्द्रों में आई ताला लगने की नौबत- कुछ चिकित्सा केन्द्रों में जैसे तैसे दूसरे केन्द्रों से नर्स एवं कंपाउण्डर आदि को भेजकर जुगाड़ से चलाया जा रहा काम-दौरान-कोरोना-आयुर्वेद की अहमियत बढऩे के बाद चिकित्सा केन्द्रों की ओपीडी में पहुंचने लगें रोगी, लेकिन नहीं मिल रहे डॉक्टर

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Government is not handling Ayurveda Medical Department: Locks on medical centers being set up here

नागौर. सरकार से आयुर्वेद विभाग नहीं संभल रहा है। दौरान-ए-कोविड-19 के संक्रमण के दौरान आयुर्वेदिक दवाओं की अहमियत समझने के बाद भी सरकार आयुर्वेदिक चिकित्सा केन्द्रों में डॉक्टरों के खाली पदों को नहीं भर पा रही। जिले में चार-पांच दर्जन से ज्यादा चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इसके कारण 30 से ज्यादा चिकित्सा केन्द्रों में ताला लगने की नौबत आ गई है। स्थिति यह है कि ऐसे चिकित्सा केन्द्र सप्ताह में दो दिन जैसे-तैसे किसी को भेजकर खोले जाते हैं, और शेष दिनों के लिए उन केन्द्रों पर ताला लगा दिया जाता है। इसकी वजह से स्थिति अब और ज्यादा बिगड़ती चली जा रही है।
प्रदेश की सरकार राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में रिक्त चल रहे चिकित्सकों के पदों को नहीं भर रही है। बिना चिकित्सकों के आयुर्वेदिक चिकित्सा केन्द्रों का संचालन करना मुश्किल हो गया है। बताते हैं कि कोविड के बुरे दौर से गुजरने के बाद लोगों के आयुर्वेद के प्रति जागरुकता बढऩे के साथ ही चिकित्सा केन्द्रों का आउटडोर भी बढ़ा है। अब ऐसे में लोग इलाज कराने के लिए आयुर्वेद चिकित्सा केन्द्र पहुंचते हैं, लेकिन कई जगहों पर उनको बंद मिलता है। इसके कारण अब असंतोष की स्थिति बनने लगी है। विडंबनापूर्ण स्थिति यह है कि कुछ जगहों पर ब्लॉक स्तर तक के आयुष चिकित्सालय में भी डॉक्टर की नियुक्तियां नहीं होने से कई बार ताला लगाना पड़ता है।
52 चिकित्सकों के खाली पदों ने बिगाड़ी पूरी व्यवस्था
आयुर्वेद विभाग के जानकारों के अनुसार जिले में कुल 52 चिकित्सकों के पद खाली चल रहे हैं। इन 52 चिकित्सकों के पदों के खाली होने की वजह से 40 से ज्यादा चिकित्सा केन्द्रों की हालत बिगड़ चुकी है। स्थिति यह हो गई है कि इनमें से 80 प्रतिशत से ज्यादा केन्द्र सप्ताह में कई दिनों तक बंद रह जाते हैं।
इन चिकित्सा केन्द्रों में नहीं है कोई डॉक्टर
आयुर्वेद विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खजवाना चिकित्सालय, छिलो, गौराऊ, खींवसर ब्लॉक आयुष चिकित्सालय, नथावाड़ा, राजलोता, रलियावता, औलादन, कोलिया, आजवा, तौषीना, भैयाकलां, धाननवां, गैडा कलां, बस्सी, बिठवालिया, लाडनूं चिकित्सालय में चिकित्सक का पद होने के बाद भी चिकित्सकों की नियुक्तियां नहीं है।
यहां पर जुगाड़ से काम चला रहा आयुर्वेद विभाग
आयुर्वेद विभाग के जानकारों के अनुसार यहां पर अन्य औषधालयों से कार्य व्यवस्थार्थ चिकित्सक अथवा नर्स- कंपाउंडर को लगा रखा है। नारवाखुर्द, भरनावा, रोहिणा, जायल, तरनाऊ, गोठ मांगलोद, डेगाना, जाखेड़ा, किरोदा, निंबड़ी कलां, जालसू खुर्द, चंपाखेड़ी, डांगावास, गगराना, भेरुंदा, खुनखुना, दयालपुरा, लादडीया चिकित्सालय, पायली, क्यामसर, श्यामगढ़, मनाना, चांडी, मकराना, सबलपुर, जावला, हरनावा आदि में जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है।
सरकार क्यों नहीं भर रही चिकित्सकों के पद
कोविड-19 के दौरान क्या हालात हो गए थे। यह किसी से छिपा नहीं रहा है। आयुर्वेद ने कोविड-19 के दौरान लोगों का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही नहीं, बल्कि उस दौरान देश के केरल राजस्थान एवं तमिलनाडू आदि विभिन्न क्षेत्रों में आयुर्वेद की दवाओं का रोगियों पर हुए प्रभावों का अध्ययन भी कई जगहों पर किया गया। इसकी महत्ता से अवगत होने के बाद सरकार न तो चिकित्सकों के खाली पदों को भर रही है, और न हीं चिकित्सा केन्द्रों को सुविधाओं से सज्जित कर रही है।
सुरेश रायल, पी. जी. प्रतिनिधि, राजस्थान आयुर्वेद चिकित्साधिकारी संघ
आयुर्वेद चिकित्सालयों में चिकित्सकों के खाली पदों की स्थिति की पूरी रिपोर्ट के साथ ही खराब होती स्थिति से मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है। इसकी पूरी विस्तृत रिपोर्ट निदेशालय में भेज दी गई है।
लखनचंद मीणा, उपनिदेशक आयुर्वेद विभाग नागौर