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हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में उठाया KCC योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा, सरकार से की यह मांग

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना में भ्रष्टाचार का पूरा नेटवर्क फैला हुआ है। कई बैंकों के अधिकारी, तहसीलों के कर्मचारी तथा दलाल मिलकर किसान की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।

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Hanuman Beniwal

नागौर। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा के शून्यकाल में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत किसानों के साथ की जा रही लूट से जुड़े महत्वपूर्ण मामले को उठाया। सांसद ने सदन में बोलते हुए कहा कि सरकार ने किसानों की आर्थिक सहायता के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना शुरू की थी, जिससे उन्हें खेती-बाड़ी और अन्य जरूरतों के लिए आसानी से कर्ज मिल सके, लेकिन इस योजना का लाभ उठाने के बजाय कुछ भ्रष्ट बैंक अधिकारी और तहसील के कर्मचारी तथा अन्य लोग इसे किसानों से अवैध कमाई का जरिया बना चुके हैं।

गुरुवार को सांसद ने कहा कि जब कोई किसान किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लोन लेने जाता है, तो बैंक उनसे सर्च रिपोर्ट नामक एक कानूनी दस्तावेज की मांग करता है। यह रिपोर्ट यह साबित करने के लिए होती है कि किसान की जमीन पर कोई और कर्ज या कानूनी विवाद तो नहीं है लेकिन यह रिपोर्ट मात्र 200-500 रुपए में आसानी से बन सकती है, इसके बावजूद किसानों से इसके नाम पर 5,000 से 10,000 तक वसूल लिए जाते हैं।

भ्रष्टाचार का पूरा नेटवर्क इसमें फैला हुआ है। कई बैंकों के अधिकारी, तहसीलों के कर्मचारी तथा दलाल मिलकर किसान की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। सांसद ने कहा कि किसान पहले ही महंगाई, कर्ज और फसल के कम दामों से परेशान है। ऐसे में जब उन्हें सरकार की मदद से राहत मिलनी चाहिए, तब यह भ्रष्टाचार उन्हें और अधिक कर्ज में डूबो देता है।

कई किसान मजबूरी में उधार लेकर रिश्वत देते हैं, ताकि उन्हें लोन मिल सके। सांसद ने सदन में डिजिटल सर्च रिपोर्ट की व्यवस्था एक नियत राशि पर उपलब्ध करवाने, बिचौलियों की भूमिका को खत्म करने तथा केसीसी के लिए किसानों के हित में प्रभावी निगरानी तंत्र बनाने की मांग की।

लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत सांसद बेनीवाल ने शिक्षा मंत्री का ध्यान राजस्थान में समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि में से 1200 करोड़ रुपए की हुई कटौती करने से शैक्षणिक कार्यों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर की तरफ आकर्षित किया।

सांसद ने कहा कि इस कटौती से इस वर्ष राजस्थान में न तो कोई साइंस लैब खुलेगी, न ही लाइब्रेरी खुलेगी। साथ ही छात्राओं के लिए नई सैनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें और खिलाड़ियों के लिए नए उपकरण भी खरीदे नहीं जा सकेंगे। जिससे राजस्थान की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होगी।