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‘इंद्र की मेहरबानी’ से बदल रही है ‘नागौर की तस्वीर’, जानिए कैसे

जिले की औसत बारिश 369.7 है, लेकिन पिछले चार सालों से हो रही 500 एमएम से अधिक बारिश- पिछले पांच सालों में औसत बारिश का आंकड़ा हुआ 500 एमएम पार- मानसून का बदलता पैटर्न और जिले में बढ़ रही हरियाली से बारिश में हो रही वृद्धि- पिछले साल मकराना में हुई पश्चिमी राजस्थान की सबसे अधिक बारिश

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नागौर जिले की बारिश पर एक नजर

नागौर जिले की बारिश पर एक नजर

नागौर. नागौर जिले में पिछले चार वर्षों से अच्छी बारिश हो रही है। वर्ष 1996 के बाद 2019, 2021 व 2022 में जितनी बारिश हुई है, उतनी पिछले पिछले 25 सालों में नहीं हुई। गत वर्ष नागौर जिले में सामान्य औसत बारिश 581.2 एमएम दर्ज की गई। जिले के मकराना में तो पश्चिमी राजस्थान की सबसे ज्यादा बारिश हुई। इससे पहले जिले में वर्ष 2021 में 616 एमएम तथा वर्ष 2019 में 653 एमएम सामान्य औसत बारिश हुई। यही वजह है कि जिले की सामान्य औसत बारिश का आंकड़ा जहां 369.7 मिलीमीटर है, वहां पिछले पांच साल की औसत बारिश का आंकड़ा 507 एमएम पहुंच गया है, जो जिले के लिए अच्छा संकेत है। यानी 'इंद्र की मेहरबानी' से 'नागौर की तस्वीर' बदल रही है।

जिले में बारिश में बढ़ोतरी को लेकर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन व मानसून के बदलते पैटर्न सहित ऐसे कई कारण हैं, जिसके चलते नागौर ही नहीं पश्चिमी राजस्थान में इंद्र भगवान की मेहरबानी अधिक हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों की स्टडी में यह बात भी सामने आई है कि पिछले कुछ 20-30 सालों में देश के पूर्वी राज्यों में जहां बारिश में कमी दर्ज की जा रही है, वहीं पश्चिमी राज्यों में बारिश में वृद्धि हो रही है।

गौरतलब है कि जिले में वर्ष 2000 से 2009 तक दो वर्ष 2003 व 2008 ही थे, जिनमें 400 एमएम से अधिक बारिश हुई, बाकि अन्य सभी वर्षों में 400 एमएम से कम बारिश हुई। वर्ष 2002 व 2009 में तो जिले में 200 एमएम से भी कम बारिश हुई। वहीं पिछले वर्ष 2010 के बाद देखें तो केवल वर्ष 2018 में 400 एमएम से कम बारिश हुई, शेष सभी वर्षों में 400 एमएम से अधिक बारिश दर्ज की गई।

नागौर व खींवसर में जिले के औसत से कम
एक ओर जहां मकराना में 1182 एमएम औसत बारिश हुई, वहीं जिले की कुछ तहसीलें ऐसी भी हैं, जहां जिले की औसत बारिश 369.7 एमएम से कम बारिश हुई है। इसमें नागौर में 345 व खींवसर में 342 एमएम बारिश ही हुई।

नागौर के लिए अच्छे संकेत, लेकिन...
नागौर जिले की 80 प्रतिशत से अ?धिक जनसंख्या कृ?षि पर निर्भर है, ऐसे में बारिश में बढ़ोतरी जिले के लिए अच्छा संकेत है। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप प्रदेश में भारी बारिश में बढ़ोतरी हुई है, जो अच्छा संकेत नहीं है। यानी कृ?षि पर सबसे ज़्यादा असर कम समय में हुई रेनफॉल वैरिएबिलिटी से होता है। कभी तेज व भारी वर्षा से अचानक बाढ़ आ जाती है, तो कभी दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक चलने वाले मानसून ब्रेक के फलस्वरूप पानी की कमी से खेती में नुकसान होना है।

जिले में पिछले तीस सालों में हुई सामान्य औसत बारिश का आंकड़ा
वर्ष - औसत बारिश
1992 - 433
1993 - 310
1994 - 380
1995 - 505
1996 - 765
1997 - 604
1998 - 405
1999 - 243
2000 - 300
2001 - 363
2002 - 144
2003 - 469
2004 - 295
2005 - 387
2006 - 267
2007 - 319
2008 - 465
2009 - 189
2010 - 547
2011 - 441
2012 - 523
2013 - 538
2014 - 461
2015 - 526
2016 - 479
2017 - 413
2018 - 351
2019 - 653
2020 - 504
2021 - 616
2022 - 581

एक्सपर्ट की राय : नागौर में औसत बारिश में वृद्धि के क्या हैं कारण
मानसून की बारिश में हर 10 साल बाद परिवर्तन आता है, कभी बढ़ती है तो कभी घटती है, जिसे दशकीय परिवर्तनशीलता (डिकेडल वैरिएबिलिटी) कहते हैं। नागौर सहित पश्चिमी राजस्थान में बारिश में वृद्धि का एक कारण यह भी है। पिछले 50 सालों के आंकड़े देखें तो पश्चिमी राजस्थान के जिलों में 20 से 30 एमएम की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले 10 वर्षों में पूरे प्रदेश में बारिश में बढ़ोतरी हुई है। एक वजह हरियाली भी है, पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में पेड़ लगाए गए हैं। इसके साथ मानसून का देरी से आना और देरी से लौटना भी है, पहले की तुलना में अब मानसून अधिक समय तक हमारे यहां रहता है।
- राधेश्याम शर्मा, निदेशक, मौसम विज्ञान केन्द्र, जयपुर