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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में मालामाल हो रही है बीमा कम्पनियां

पीएमएफबीवाई : खरीफ सीजन में प्रीमियम राशि से कम मिला किसानों को क्लेम- नागौर के कई गांवों अकाल के बावजूद नहीं दिया उचित क्लेम- कम्पनियों के लिए लूट का जरिया बनी फसल बीमा योजना

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Notification of PM Crop Insurance Scheme for Kharif

Notification of PM Crop Insurance Scheme for Kharif

नागौर. अकाल एवं अतिवृष्टि से फसल खराब होने पर किसानों को सहारा देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बीमा कम्पनियों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनी हुई है। फसल बीमा योजना का लाभ जहां किसानों को मिलना चाहिए, वहां यह योजना बीमा कम्पनियों को मालामाल कर रही है।


फसल बीमा योजना से बीमा कम्पनियों को होने वाली कमाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नागौर जिले में खरीफ 2016 में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कम्पनी को एक अरब 60 करोड़ 36 लाख का प्रीमियम मिला, जिसकी तुलना में कम्पनी ने 54 करोड़ 23 लाख का क्लेम दिया, यानी कम्पनी ने अकेले नागौर जिले में प्रीमियम राशि से एक अरब 6 करोड़ 13 लाख रुपए कमाए। गौरतलब है कि खरीफ 2016 में पर्याप्त बारिश नहीं होने से उत्पादन काफी कम हुआ था।

यही स्थिति खरीफ 2017 में रही। बजाज एलाइंस जनरल इंश्योरेंस कम्पनी को 2 लाख 86 हजार किसानों का बीमा करने पर प्रीमियम के रूप में एक अरब 45 करोड़ रुपए मिले, जिसकी तुलना में कम्पनी ने एक लाख 23 हजार 846 किसानों को मात्र 83 करोड़ 79 लाख रुपए का क्लेम दिया। यानी एक ही सीजन में अकेले नागौर से 61 करोड़ 20 लाख रुपए कमाए। वर्ष 2017 में भी लगभग पूरे सावन माह में जिले में सूखे जैसी स्थिति रही। लम्बे समय तक बारिश नहीं होने से बाजरा, ज्वार, मूंग, मोठ, चौला, मूंगफली, तिल, कपास व ग्वार का उत्पादन काफी कम रहा।

दावों को खुल रही पोल
गौरतलब है कि 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) शुरू करते हुए दावा किया था कि यह योजना उन किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करने में मदद करेगी, जो अपनी खेती के लिए ऋण लेते हैं और खराब मौसम से उनकी रक्षा भी करेगी। जिस हिसाब से बीमा कम्पनियां किसानों व सरकार से मिलने वाली प्रीमियम राशि से अपने खजाने भर रही है, उससे ऐसा नहीं लगता कि यह योजना किसानों के हित के लिए लागू की गई।

एक वर्ष तक नहीं मिलता क्लेम भुगतान
प्रधानमंत्री ने पीएमएफबीवाई शुरू करते समय यह भी दावा किया था कि इस योजना में बीमा दावे के निपटान की प्रक्रिया को तेज और आसान बनो का निर्णय लिया गया है ताकि किसानों को फसल बीमा योजना के सम्बन्ध में किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, लेकिन सरकार के इस दावे की पोल इसी से खुल रही है कि योजना शुरू हुई तब से लेकर अब तक एक बार भी किसानों को क्लेम का भुगतान एक साल से पहले नहीं किया गया। इन दिनों रबी 2018-19 का सीजन चल रहा है लेकिन बीमा कम्पनी ने रबी 2017-18 का क्लेम भुगतान अब तक नहीं किया है। खरीफ-2018 के तो अब तक आंकड़े भी एकत्र नहीं हो पाए हैं।

हर वर्ष घट रही है किसानों की संख्या
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने के बाद अब तक छह सीजन में यह योजना लागू हो पाई है। खरीफ 2016 में जहां 3.72 लाख किसानों का बीमा किया गया था, वहीं खरीफ 2017 में 2.86 तथा खरीफ 2018 में यह संख्या एक लाख 35 हजार रह गई।

रबी 2017-18 का क्लेम जल्द मिलने की उम्मीद
उच्चाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार रबी 2017-18 का बीमा क्लेम जल्द बैंकों में जमा होने की उम्मीद है। जिले के करीब 56 हजार किसानों को 18.61 करोड़ का क्लेम भुगतान होने की जानकारी मिली है।
- हरजीराम चौधरी, उप निदेशक, कृषि विभाग, नागौर

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