
डीडवाना। गैंगस्टर आनन्दपाल सिंह से जुड़े जीवनराम गोदारा हत्याकांड में 11 साल 8 माह बाद कोर्ट ने सजा सुनाई है। आनन्दपाल गैंग के 3 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा,जबकि एक को 5 साल की सजा सुनाई गई। बाकी 11 आरोपित दोषमुक्त कर दिए गए।
लोक अभियोजक रामेश्वरलाल भाकर ने बताया कि मामला पिछले 12 साल से कोर्ट में चल रहा है। न्यायालय ने गत 28 फरवरी को 4 आरोपित को दोषी माना था। जबकि बाकी 11 आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। आरोपितों को 5 मार्च को सजा सुनाने का दिन तय किया गया था।
सोमवार को सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायाधीश प्रदीप कुमार मोदी ने आरोपित संजय पांडे, दातार सिंह व श्रीवल्लभ को जीवनराम गोदारा व हरफूल जाट की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि दातार सिंह को आम्र्स एक्ट में भी दोषी करार देते हुए सजा सुनाई गई। वहीं पप्पूराम उर्फ पपैया को भी पांच साल कैद की सजा सुनाई गई।
यह था मामला
गैंगस्टर आनन्दपाल सिंह और उसके साथियों ने 27 जून 2006 में डीडवाना में दिनदहाड़े भरे बाजार जीवनराम गोदारा ओर उसके साथियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी थी। इस फायरिंग में जीवन गोदारा के साथ हरफूल जाट की भी मौत हो गई थी, जबकि 3 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में कुल 23 आरोपी बनाए गए थे। जबकि कुल 116 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।
आरोप है कि इस मामले के मुख्य गवाह प्रमोद के बयान बदलवाने के लिए आनन्दपाल सिंह ने उसके भाई इंदरचंद का दिसम्बर 2014 में अपहरण करवा लिया था, लेकिन गवाहों के बयान नहीं बदलने पर 3 सितम्बर 2015 को आनन्दपाल सिंह पुलिस की कड़ी सुरक्षा को तोड़कर फरार हो गया था। बाद में पुलिस और एटीएस ने जून 20717 में आनंदपाल को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।
Updated on:
05 Mar 2018 07:23 pm
Published on:
05 Mar 2018 07:08 pm
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