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video—एनजीटी का हवाला देकर अटकाया हजारों बीघा भूमि का भू-रूपांतरण

-डार्क जोन हटने के बाद भी बोरिंग नहीं करवा पा रहे उद्यमी - डिस्कॉम नहीं दे रहा विद्युत कनेक्शन -प्रदेश की सबसे बड़ी नमक मंडी पर मंडरा रहा संकट

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एनजीटी का हवाला देकर अटकाया हजारों बीघा भूमि का भू-रूपांतरण

प्रदेश की सबसे बड़ी नमक मंडी में तैयार नमक

दीपक कुमार शर्मा

नावां शहर (नागौर) .उत्तर भारत की सबसे बड़ी व भारत के दूसरे नम्बर की नमक उत्पादन मंडी नावां पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी कई तरह के आदेशों का हवाला देते हुए यहां के नमक उत्पादन को खतरे में डाल रहे हैं। यहीं कारण है कि बीते चार साल में नागौर-अजमेर के नमक उत्पादकों की भूमि का भू-रूपांतरण नहीं हुआ है। जबकि मुख्यमंत्री प्रदेश में डार्क जोन हटाने का आदेश तक दे चुके हैं। यहां की जमीन पर लवणीय कार्य करना ही संभव होने के बावजूद राजस्व विभाग भू रूपानंतरण नहीं कर रहा, वहीं डिस्कॉम नावां- रूपणन गढ़ क्षेत्र नमक के क्यार का संचालन करने वालों को उद्योग श्रेणी में विद्युत कनेक्शन नहीं दे रहा है। दूसरे ओर भू रूपान्तरित हो चुकी जमीन पर बोरवैल करवाने को स्थानीय प्रशानसन अवैध बता रहा है। इससे नमक उत्पादन पर संकट खड़ा हो गया है।

दर्जनों गांवों से चल रहा प्रदेश का नमक उत्पादन, राज्य सरकार बनी संकट :-

नमक उद्यमी नवरंग अग्रवाल बताते है कि नावां, जाब्दीनगर, खाखड़की, गुढ़ासाल्ट, गोविंदी, राजास, बनगढ़, उलाना, मोहनपुरा, झाग, ढेर की ढाणी, लोसल, उलाना सहित करीब एक दर्जन गांवों से राजस्थान सहित यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश व झारखंड में पोषक व गुणवत्तायुक्त नमक सप्लाई होता है। लेकिन यहां सूखी पड़ी झील से गुजरने पर धारा 144 लगी है। सड़कें नहीं होने से नमक परिवहन की भी समस्या है। जबकि झील से रेलवे ट्रेक तक गुजर रहा है। इधर, भू-रूपान्तर, बोरिंग तथा विद्युत कनेक्शन पर जिला व स्थानीय प्रशासन की अघोषित रोक से अवैध गतिविधियां बढ़ रही है।

क्या कहते है जिम्मेदार

तहसीलदार सतीश राव का कहना है कि सांभर झील व आसपास के क्षेत्र में बफर जोन बनाने का कार्य चल रहा है। इस कारण भू-रूपान्तर (कन्वर्जन) पर एनजीटी के निर्देशों से अघोषित रोक है। बोरिंग के लिए अनुमति लेना जरूरी हैं, वहीं झील क्षेत्र में जाने पर 144 धारा लगी है। अजमेर डिस्कॉम के मुख्य अभियंता मुकेश चंद का कहना है कि बिजली कनेक्शन के लिए भू-रूपांतरण जरूरी है।

इनका कहना -

गत 4- 5 साल में भू-रूपांतरण नहीं होना नमक उत्पादकों के लिए संकट भरा है। हजारों बीघा भूमि के सैकड़ों नमक उत्पादक परेशान है। जबकि यहां लवणीय खेती के अलावा दूसरा कार्य नहीं हो सकता है। डार्क जोन हटाने के बाद भी स्वयं के क्यार में बोरवेल पर रोक हड़धर्मिता दर्शाता है।

केसाराम लोरा, अध्यक्ष, राजस्थान नमक उत्पादक संघ।