
More than 300 farmers in the Nagaur are doing irrigation with solar
नागौर. यूं तो सूर्य से मिलने वाली सौर ऊर्जा हर प्राणी के लिए वरदान है, जिसके बिना जीवन भी अधूरा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से ‘सोलर एनर्जी’ किसानों का भविष्य ‘सुनहरा’ बना रही है। आग के वैज्ञानिक युग में जिस प्रकार सोलर एनर्जी को तवज्जो दी जा रही है, उससे ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में बिजली का सौर ऊर्जा बेहतर विकल्प बन जाएगा।
जिले में सरकारी योजनाओं के तहत किसानों को मिलने वाले अनुदान एवं किसानों में आ रही जागरुकरता की बदौलत पिछले सात वर्षों में 313 किसानों ने सौर ऊर्जा प्लांट लगा लिए हैं और दिन में मोटर चलाकर सिंचाई करते हैं। सौर ऊर्जा से सिंचाई करने वाले किसानों को न तो बिजली आपूर्ति का इंतजार करना पड़ता है और न ही रात के समय में अंधेरे व सर्दी से जूझना पड़ता है। यही वजह है कि इस बार प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) योजना के कम्पोनेंट ‘बी’ अंतर्गत 213 आवेदन नागौर उद्यानिकी विभाग को मिल चुके हैं। वहीं पूरे राजस्थान की बात करें तो सभी जिलों के 27 हजार 964 आवेदन विभाग को प्राप्त हो चुके हैं।
उद्यानिकी विभाग ने पिछले 7 वर्षों में यूं लगाए सौर ऊर्जा प्लांट
वर्ष - लाभान्वित किसान
2012-13 - 34
2013-14 - 95
2014-15 - 36
2015-16 - 25
2016-17 - 31
2017-18 - 00
2018-19 - 92
2019-20 के लिए 213 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
सरकार ने दी विशेष छूट
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब किसानों को पांच एचपी क्षमता का पम्प लगाने पर अनुदान दिया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को साढ़े 7 एचपी क्षमता के पम्प स्टैण्ड अलोन सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र लगाने पर भी अनुदान दिया जाएगा। इसमें किसान को 60 प्रतिशत अनुदान (30 प्रतिशत केन्द्र सरकार व 30 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा) दिया जाएगा।
योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता
पीएम कुसुम योजना का लाभ लेने के लिए किसान द्वारा कृषि एवं उद्यानिकी फसलों में सिंचाई के लिए ड्रिप /मिनी स्प्रिकंलर/माइक्रो स्प्रिकंलर/स्प्रिकंलर संयंत्र आवश्यक रूप से काम लिया जाना चाहिए। योजना का लाभ उन किसानों को भी मिलेगा, जो डार्क जोन या ब्लैक जोन क्षेत्र में पूर्व से स्थापित डीजल पम्प सेट से सिंचाई का काम कर रहे हैं। लघु एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सौर ऊर्जा अच्छा विकल्प
कृषि एवं उद्यानिकी में सिंचाई के लिए वर्तमान में सौर ऊर्जा अच्छा विकल्प बन रहा है, जिस पर सरकार 60 प्रतिशत अनुदान भी देती है। इस बार सरकार ने किसानों को साढ़े 7 एचपी क्षमता का पम्प लगाने पर भी अनुदान देने की घोषणा की है, जो एक महत्वपूर्ण फैसला है। सौर ऊर्जा वाले किसान बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
- अर्जुनराम मुण्डेल, कृषि अधिकारी, उद्यानिकी विभाग, नागौर
Published on:
21 Dec 2019 10:39 am
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