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नसीब नहीं हुआ मां का आंचल, खुद ही छिटक कर चली गई

-नवजात को पालना गृह में किया शिफ्ट, अपनी ही पहचान की तलाश, - शायरी को सौंपकर कहा था, पांच मिनट में आती हूं पर पांच दिन बाद भी नहीं आई- बंद थे सीसीटीवी कैमरे चालू भी होते तो कैसे आती नजर, पूरी तरह बुर्के की आड़ में छिपा रखा था खुद को - किस अस्पताल में पैदा हुआ, पालना गृह में क्यों नहीं छोड़ा...इसके कारण तालशने में लगे जिम्मेदार

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नवजात

पैदा होते ही उसे अपनों ने ही ठुकरा दिया। बदनसीबी अस्पताल से होते हुए उसे पालना-गृह तक ले आई। मां के आंचल से छिटककर यह नवजात अपनी ही पहचान को तरस रहा है।

नागौर. पैदा होते ही उसे अपनों ने ही ठुकरा दिया। बदनसीबी अस्पताल से होते हुए उसे पालना-गृह तक ले आई। मां के आंचल से छिटककर यह नवजात अपनी ही पहचान को तरस रहा है। ना माथे पर काला टीका ना ही उसेे देखने कोई अपना नजर आ रहा है। शायद उसकी सूनी आंखें भी अपनों को तलाश रही है। इस नवजात को जेएलएन अस्पताल में बैठी एक महिला को सौंपकर गायब हुई इस शातिर युवती का चौथे दिन भी कोई सुराग नहीं लगा है। उस दौरान जेएलएन अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे तो बंद थे, ऐसे में फुटेज की उम्मीद यहां भी बेमानी है। फुटेज आते भी तो इसकी पहचान नहीं हो पाती, क्योंकि महिला ने बुर्का बने नकाब से खुद को ढांप रखा था।

सूत्रों के अनुसार जोधियासी निवासी श्रीमती शायरी रविवार की रात करीब सवा नौ बजे जेएलएन अस्पताल के एमएचसी विंग के कमरा नंबर 15 में मौजूद थी। यहां भर्ती अपनी पुत्री की देखभाल के लिए बैठी शायरी के पास पूरी तरह चेहरे को ढांपे एक युवती आई और उसने एक नवजात को सौंपते हुए कहा कि वो पांच मिनट में आ रही है, इसका ध्यान रखना। इस पर शायरी देवी ने कहा कि इस पलंग पर सुला दो, इस पर उसने कहा कि वो गिर जाएगा। यह कहकर उसकी गोद में सौंपकर वह निकल गई। घंटे-डेढ़ घंटे तक युवती नहीं आई तो शायरी ने स्टाफ को सारी जानकारी दी तो नवजात को एसएनसीयू वार्ड में भिजवा दिया। जानकारी मिलने पर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष डॉ मनोज सोनी, अस्पताल के डॉ आरके सुथार समेत पुलिस अफसर पहुंचे और नवजात की जांच की।

सूत्र बताते हैं कि नवजात अभी चार-पांच दिन का ही है। पैदा होने के चंद घंटों बाद ही उसे शायरी को सौंप दिया गया। बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य है, उसे बुधवार को अस्पताल से नई जगह शिफ्ट कर पालना गृह में भेज दिया गया है। बच्चा पूरी तरह स्वस्थ्य है, उसका जन्म भी शनिवार या रविवार को ही होना बताया जा रहा है।

पालना गृह में क्यों नहीं डाला

सूत्र बताते हैं कि नवजात को छोड़ना ही था तो अस्पताल परिसर स्थित पालना गृह में क्यों नहीं डाला गया। बताया जाता है कि इसके आस पास आवाजाही ज्यादा होने लगी या फिर वो शातिर युवती बच्चे को वहां डालने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाई, ऐसे में वो अस्पताल में घूमते हुए शायरी को सौंपकर निकल गई। शायरी का कहना था कि उसने उसे ठीक से देखा भी नहीं, उसका चेहरा तो दिखा ही नहीं, क्योंकि उसने खुद को पूरी तरह से बुर्के से ढांप रखा था। इसके बाद पालना गृह को अस्पताल में ही डीआईसी बिल्डिंग के पास शिफ्ट कर दिया गया।

एसपी ने टीम गठित की, अस्पतालों से उठा रहे हैं रेकॉर्ड

सूत्रों का कहना है कि रहस्यमयी युवती की तलाश के लिए एसपी राममूर्ति जोशी ने हैड कांस्टेबल बंशीलाल चौहान के नेतृत्व में कांस्टेबल दिनेश कुमार, हरचंद और लहरीराम की टीम बनाकर युवती की तलाश करने को कहा है। हैड कांस्टेबल बंशीलाल ने जेएलएन अस्पताल समेत आसपास के इलाकों का दौरा कर जरूरी जानकारी जुटाई तो सामने आया कि बिजली जाने की गफलत से अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे बंद थे, बच्चे का जन्म अस्पताल में हुआ है, ऐसे में वहां से भी डिटेल खंगाली जा रही है। साथ ही बताई गई वेशभूषा के आधार पर आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएंगे।

इनका कहना

किसी संस्थागत अस्पताल में उसका जन्म हुआ है, पालना गृह को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है। बिजली की गफलत की वजह से कई दिन से अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे बंद थे, वैसे भी महिला ने अपने आपको पूरी तरह ढांप रखा था। अस्पतालों से जानकारी ली जा रही है।

-डॉ महेश वर्मा, पीएमओ, जेएलएन अस्पताल, नागौर।

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नवजात को पालना गृह में शिफ्ट किया गया है। एसपी ने टीम गठित कर युवती की तलाश शुरू कर दी है, नवजात को इस तरह देकर भागने का कारण अभी तक समझ नहीं आया है।

-डॉ मनोज सोनी, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति नागौर