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मोटरसाइकिल चोरी मतलब पुलिस के लिए ‘छोटा’ अपराध, बाइक तलाशने में गंभीरता नहीं

शहर सहित जिले में आए दिन हो रही मोटरसाइकिलें चोरी, पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी

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Motorcycle theft means 'small' crime for police

Motorcycle theft means 'small' crime for police

नागौर. शहर या जिले का शायद ही ऐसा कोई कोना है, जहां बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम नहीं दिया जाता हो। जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन हर रोज मोटरसाइकिल चोरी की एक घटना होती है। जिले में बाइक चोरी की वारदातें लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन पुलिस न तो चोरी की वारदातों को कम कर पा रही है और न ही चोरी के बाद उनकी बरामदगी। मोटरसाइकिल चोरी को ‘छोटा’ अपराध मानने वाली पुलिस के ढीले रवैये से चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि रात के समय चोरी करने वाले चोर अब दिन दहाड़े मोटरसाइकिलें उठाने लगे हैं।

मोटरसाइकिल की चोरी की शिकायत पुलिस के पास पहुंचती भी है, लेकिन उन्हें बरामद करने के लिए पुलिस गंभीरता नहीं बरतती। नागौर पुलिस के आंकड़े बयां करते हैं कि पुलिस इस साल चोरी की मोटरसाइकिलों में से 20 प्रतिशत बाइक भी वापस बरामद नहीं कर पाई है, जबकि काफी मामले तो दर्ज ही नहीं होते या रिकॉर्ड में नहीं दिखाते। जिसके कारण बाइक चोरों के हौसले बुलंद हैं। ऐसे सैकड़ों पीडि़त हैं जो अपनी बाइक गंवा चुके हैं और थानों के चक्कर लगा रहे हैं। उनकी बाइक वापस मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

इन केसों से समझिए, पुलिस कार्रवाई की चाल

केस एक - साढ़े पांच माह बाद भी कोई सुराग नहीं
शहर के जयनारायण व्यास कॉलोनी निवासी रमेशचंद्र जैन गत 25 फवरी को अपने बेटे की मोटरइसाकिल लेकर बस स्टैण्ड गए, वहां मोटरसाइकिल खड़ी करके किसी काम के लिए गए। वापस आकर देखा तो मोटरसाइकिल गायब थी। 26 फरवरी को मामला दर्ज कराने के बावजूद पुलिस आज तक मोटरसाइकिल नहीं ढूंढ़ पाई है।

केस दो - छह साल हो गए, नहीं मिली बाइक
शहर के इंदिरा कॉलोनी में रहने वाले रविन्द्र मिश्रा करीब छह साल पहले नेहरू उद्यान में घूमने गए तो अपनी बाइक को बाहर खड़ा किया। थोड़ी देर बाद वापस आए तो बाइक गायब थी। कोतवाली थाने में बाइक चोरी का मामला दर्ज कराया, लेकिन अब तक कोई प्रोग्रेस नहीं है।

केस तीन - यह तो गजब हो गया, मामला ही पांच माह बाद दर्ज किया
ईनाणा निवासी शैतानराम पुत्र मंगाराम की मोटरसाइकिल गत 4 मार्च को पुराना अस्पताल परिसर में संचालित महिला थाने के पास से आधे घंटे में चोरी हो गई। शैतानराम मामला दर्ज कराने गया तो पुलिसकर्मी बोले कि कोई फायदा नहीं है, कोई गिरोह पकड़ में आएगा तो ही मोटरसाइकिल मिलने की संभावना है। पांच महीने इंतजार के बाद शैतानराम को लगा कि चोर उसकी मोटरसाइकिल को गलत काम में उपयोग ले सकते हैं, इसलिए उसने जोर देकर मामला दर्ज करने के लिए कहा तो पुलिस ने अब 17 अगस्त को मोटरसाइकिल चोरी का मामला दर्ज किया है।

खुद ही रखें सावधानी
आमजन के लिए सबसे जरूरी यह है कि वह अपनी बाइक की सुरक्षा खुद ही करें, क्योंकि बाइक बरामदगी के मामले में नागौर पुलिस काफी पीछे है। नागौर शहर में अभय कमांड योजना पर भले ही लाखों रुपए खर्च किए गए हों, लेकिन सडक़ों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की ज्यादा मदद पुलिस अब तक नहीं ले पाई है। राह चलते कोई गिरोह हाथ लगे तो चोरी की बाइक मिलने की उम्मीद है, खुद आगे होकर बाइक को तलाशना पुलिस के बस की बात नहीं रही है।

चंद मिनटों में कर देते हैं गायब
जिले में बाइक चोर इन दिनों इस कदर शातिर हो गए हैं कि नजर चूकते ही बाइक को गायब कर देते हैं। वे मास्टर चाबी से लॉक तक खोल देते हैं। बाइक खड़ी करने के बाद कुछ पल के लिए नजर हटते ही वहां से बाइक गायब हो जाती है। कई बार तो पांच से 10 मिनट में वापस आने पर भी बाइक गायब मिलती है।

लोग चिंतित, पुलिस नहीं
बढ़ती बाइक चोरी से शहर के लोग चिंतित हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रहा। शहरवासियों का कहना है कि आम आदमी के लिए बाइक लेना आसान नहीं होता। एक बाइक खरीदने के लिए किसी को पैसे उधार लेने पड़ते हैं तो किसी को अपनी सेविंग इसमें लगानी पड़ती हैं। चोर आसानी से इसे चोरी करके ले जाते हैं, पुलिस के ढीले रवैये के कारण आम आदमी की कई महीने सेविंग बर्बाद हो जाती है।

यूं रहें सतर्क

पुलिस नई धारा में दर्ज करे मामला
मोटरसाइकिल चोरी करने वालों के लिए कानून में बदलाव हुआ है। पुराने कानून में बाइक चोरों पर धारा 379 लगती थी, जिसमें आरोपी को जल्द ही जमानत मिल जाती थी और सजा भी कम थी। अब 379 और बी लगाने का प्रावधान है जिसमें 2 महीने तक जमानत नहीं होती और 3 से 7 साल तक सजा होती है। इसलिए पुलिस को चोरों के खिलाफ नई धारा में मामला दर्ज करना चाहिए, ताकि चोरों पर नकेल सकी जा सके।
- गोविन्द कड़वा, एडवोकेट

बरामदगी का पूरा प्रयास करते हैं
मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं पर अंकुलश लगाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। आम तौर पर जो गिरोह पकड़े जाते हैं, उनमें कई चोरियों का खुलासा होता है। इसके साथ शहर में रहने वाली गाडिय़ों को तो पकड़ लिया जाता है, लेकिन जो बाहर चले जाते हैं, उन्हें पकडऩे में थोड़ी परेशानी रहती है।
- राजेश मीना, एएसपी, नागौर