
Mumbai's Maharaja Ganadhipati's court has been held in Nagaur for the last 15 years.
- अभी हर साल गणपति महोत्सव के लिए मुंबई से मंगाई जाती है प्रतिमा
- गणपति की प्रतिमा के साथ लगातार 10 दिनों तक जलती रहती है अखंड ज्योत
- शहर की चांदीवाड़ा, माडिय़ों की गली मे सजता है दरबार, अर्चना में शामिल होने के लिए आसपास के लोगों से भी पहुंचती है श्रद्धालुओं की भीड़
नागौर. मुंबई के महाराजा गणाधिपति का नागौर के चांदीवाड़ा, माडिय़ों की गली में पिछले पंद्रह सालों से दरबार लग रहा है। इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के मराठाओं ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर पंद्रह साल पहले की थी। गणाधिपति तो पहले से आराध्य थे, लेकिन मराठाओं ने स्थानीय लोगों के साथ मुंबई की तर्ज पर यहां भी गणपति महोत्सव करने की इच्छा जताई तो सभी ने खुलकर न केवल साथ दिया, बल्कि सहयोग किया। इसके बाद से अब तक लगातार यहां पर गणाधिपति का दरबार निर्बाध रूप से लग रहा है। मुख्य मूर्ति के साथ ही गणपति की छोटी प्रतिमाएं भी इसके साथ विराजित कराई जाती है। स्थानीय रिवाजों के मुताबिक इस मूर्ति को चुपचाप ले जाने सफल होने वालों के सभी विध्नों का नाश हो जाता है। इसके साथ ही यहां पर गणाधिपति के विराजमान रहने तक लगातार अखण्ड ज्योति भी जलती रहती है।
वर्ष 2007 में पहली बार स्थापित हुए थे गणाधिपति
स्थानीय बाशिंदे बताते हैं चांदीवाड़ा, माडिय़ों की गली में करीब आधा दर्जन महाराष्ट्र के मराठा भी रहने लगे थे। पहले यहां पर गणपति का अर्चन तो होता था, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर हेाता था। मराठा लोगों ने वर्ष 2007 में स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर मुंबई की तर्ज पर गणाधिपति की प्रतिमा स्थापित कर महोत्सव मनाने की योजना बनाई। मराठाओं का यह विचार स्थानीय लोगों को अच्छा लगा। इन लोगों ने उसी समय मिलकर एक बैठक की, और इसे मूर्त रूप देने का फैसला लिया। इसके बाद पहली बार मुंबई से प्रतिमा मंगाई गई। इसे विधिपूर्वक स्थापित कर गाजे-बाजे के साथ विसर्जन किया गया। बताते हैं कि पहली बार में ही शानदार महोत्सव मना तो इसे हर साल मनाया जाने लगा।
हर बार मुंबई से मंगाते हैं प्रतिमा
माडिय़ों की गली में गणेश महोत्सव समिति के संरक्षक बृजरतन सोनी से मुलाकात हुई तो बताया कि यहां पर स्थापित होने वाली गणपति की प्रतिमा प्रतिवर्ष मुंबई से विशेष तौर पर मंगाई जाती है। प्रतिमा आने के बाद इसे बाकायदा षोड्शोपचार के साथ विधिपूर्वक स्थापित किया जाता है। स्थापन के दौरान पूरे क्षेत्र के लोग सामूहिक रूप से एकत्रित होकर पूजन करते हैं। पूजन का यह क्रम गणाधिपति के विसर्जन के पहले तक लगातार चलता रहता है। यह परंपरा भी लंबे समय से चल रही है।
अखण्ड ज्योति से मिलती है ऊर्जा
गणेश महोत्सव समिति के बालकिशन सोनी का कहना है कि प्रतिमा स्थापित होने के साथ ही अखण्ड ज्योति भी लगातार जलती रहती है। इसमें विशेष तौर पर देशी घी का प्रयोग किया जाता है। यह घी भी बाजार का निर्मित नहीं होता है, बल्कि इसे विशेष रूप से इसी कार्य के लिए तैयार किया जाता है। गणपति के दर्शन के साथ ही इसका भी अर्चन किया जाता है। ज्योति प्रज्जवलित करने का यह चलन भी पंद्रह वर्ष पुराना है।
गणपति की छोटी प्रतिमाएं हो जाती हैं गायब
बताते हैं कि यहां पर मुख्य प्रतिमा के साथ शास्त्रोक्त संख्या के क्रम में गणपति की छोटी प्रतिमाएं भी विधिपूर्वक स्थापित कराई जाती है। यह प्रतिमाएं विसर्जन से पूर्व येन-प्रकरेण गायब हो जाती है। माना जाता है कि इस प्रतिमा को अपने साथ चुपचाप ले जाने वाले के शादी सहित अन्य मांगलिक या रुके हुए कार्य खुद-ब-खुद हो जाते हैं। हालांकि इन प्रतिमाओं की रखवाली स्थानीय लोगों की ओर से लगातार की जाती है। इसके बाद भी किसी न किसी तरह इसे लोग चुपचाप ले जाने में सफल हो जाते हैं।
गणाधिपति की महान कृपा बरसती है...
गणाधिपति के महोत्सव की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। उस दौरान यूं सामान्य तौर पर मराठाओं के साथ मिलकर इसे शुरू किया गया, लेकिन अब यह सिलसिला लगातार पिछले कई सालों से लगातार चल रहा है। यह महोत्सव नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए अब आस्था का पर्व बन गया है।
डॉ. विजय सिंह तिलायचा, संरक्षक गणेेश महोत्सव समिति
गणाधिपति महोत्सव की शुरुआत करने के लिए स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की गई थी। लोगों ने केवल साथ ही नहीं दिया, बल्कि इसमें हरसंभव सहयोग भी किया। कुछ लोगों की ओर से शुरू हुआ यह महोत्सव अब पूरे क्षेत्र के लिए आस्था का उत्सव बन गया है।
गणेश मराठा
गणाधिपति के महोत्सव के दौरान विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ ही खेलकूद प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को धार्मिक एवं सनातन संस्कृति विशेषताएं समझाई जाती है। बच्चे भी इसमें उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। बच्चे भी इसमें पूरा सहयोग करते हैं। इन्होंने अपने स्तर पर गणेश बाल समिति बना रखी है।
प्रकाश सिंह पटेल, अध्यक्ष गणेश महोत्सव समिति
मुंबई में तो दस दिनों तक पूरा उत्सव का माहौल रहता है। गणपति की पूजा-अर्चना को लेकर इन दिनों उत्साह का माहौल रहता है। उसी तर्ज पर यहां पर वर्ष 2007 में इसकी शुरुआत हुई तो बहुत अच्छा लगा। यह भी गणाधिपति की कृपा रही है कि इस कार्य में कोई विध्न नहीं आया है।
विशाल मराठा
नागौर. माडिय़ों की गली में विराजित गणाधिपति
नागौर. गणाधिपति के साथ जल रही अखण्ड ज्योति
Published on:
29 Sept 2023 11:00 pm
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