नागौर. राजनीतिक रसूख की हडक़ के साथ कथित रूप से प्रशासनिक मिलीभगत के चलते हुए अवैध निर्माणों ने जल चक्र का ढांचा गड़बड़ा दिया है। कई जगहो पर हुए कच्चे-पक्के निर्माणों की पूरी जानकारी होने के बाद भी अधिकारियों की ओर से अवैध अतिक्रमण हटाए जाने के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति कर दी जा रही है। इसके चलते ऐसे स्रोतों के आसपास न केवल अवैध कब्जों की संख्या तेजी से बढ़ी है, बल्कि इन जलस्रोतों के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है।
राजनीतिक रसूख की हडक़ के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की संलिप्तता की वजह से प्राकृतिक जलस्रोत अब खत्म होने लगे हैं। स्थिति यह है कि जड़ा, तालाब, बख्तासागर, प्रताप सागर, दुलाया, लाल सागर, समस तालाब, गांछोलाई, जाजोलाई नाडी, गिनाणी तालाब, कृषि मंडी के निकट स्थित तालाब की पाल पर ही विधि विरुद्ध पक्केे निर्माण कर लिए गए। इस पर हुए अवैध पक्केे निर्माणों के स्थिति की पूरी जानकारी जिला प्रशासन को भी है। प्रशासनिक अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि अतिक्रमण तो है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अभियान चलाएंगे की बात कहकर इतिश्री कर लेते हैं।
अतिक्रमण है तो फिर क्यों नहीं हटवा पा रहा प्रशासन
तहसील प्रशासन के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बासनी रोड स्थित जाजोलाई नाडी की जमीन व इसके कैचमेंट एरिया में करीब सौ से डेढ़ सौ पक्के निर्माण, डेह रोड के साथ थाम्बोलाई नाडी की जमीन पर भी इसी तरह के निर्माण किए जा चुके हैं। गिनाणी तालाब भी इससे अछूता नहीं रहा है। यहां कैचमेंट एरिया में पक्के निर्माणों की संख्या तीन हजार पार कर गई है। समस तालाब, जड़ा तालाब, कृषि मंडी के निकट तालाब एरिया, जड़ा तालाब, लालसागर, गांछोलाई, बच्चाखाडा केचमेंट एरिया व मूल जगहों पर अवैध कब्जे कर निर्माण कर लिए गए। इन क्षेत्रों में हुए निर्माणों की संख्या सूत्रों की माने तो 50 हजार से भी जयादा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों कुम्भकर्णी नींद में सोना इन जलस्रोतों के वजूद पर ही खतरा बन गया है।
अवैध कब्जों ने रोकी पानी की आवक
विशेषज्ञों की माने तो जलग्रहण एरिया के साथ ही इसमें पानी की आवक के होने वाले रास्तों पर पक्के निर्माणों की संख्या में हजारों में पहुंचने के साथ ही परंपरागत रूप से होने वाले पानी की आवक 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रभावित हुई है। जड़ा, तालाब, बख्तासागर, प्रताप सागर, दुलाया, लाल सागर, समस तालाब, गांछोलाई, मुंदोलाव नाडी, गिनाणी तालाब, कृषि मंडी के पश्चिम दिशा में स्थित नाडी की आड व अंगोर भूमि पर किए गए विधि विरुद्ध अतिक्रमण के चलते पानी की आवक ही नहीं हो पाती है।
क्या कहते हैं पर्यावरणविद्
जलग्रहण एरिया में हुए अवैध निर्माणों को हटाने के लिए प्रशासनिक शिथिलता के कारण गंभीर व दूरगामी परिणाम अभी से नजर आने लगे हैं। परंपरागत जलस्त्रोत्रों का अस्तित्व खत्म होने के साथ ही पर्यावरण का पूरा चक्र प्रभावित हुआ है। भांभू ने कहा कि सरकार को इस पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए, नहीं तो फिर हालात बेहद कठिन होने के साथ ही पानी का वजूद भी समाप्त हो जाएगा।
हिम्मताराम भांभू, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद
इनका कहना है…
प्राकृतिक जलस्रोतों के एरिया में हुए अवैध कब्जों की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही सही वस्तुस्थिति बताई जा सकती है।
नरसिंह, तहसीलदार, नागौर