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ए ग्रेड के लिए मिर्धा कॉलेज की मजबूत दावेदारी, जानिए क्या हैं कारण

- टीम की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी कॉलेज की ग्रेड, ग्रेड के आधार पर यूजीसी से मिलेगा अनुदान

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NAAC peer team reached Mirdha College Nagaur

NAAC peer team reached Mirdha College Nagaur

नागौर. जिला मुख्यालय के बीआर मिर्धा राजकीय महाविद्यालय का निरीक्षण करने के लिए नागौर पहुंची राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) टीम ने बुधवार को श्री बीआर मिर्धा कॉलेज का निरीक्षण शुरू किया। दो दिन तक चलने वाले निरीक्षण के तहत पहले दिन टीम में शामिल तीनों सदस्यों ने विज्ञान संकाय के सभी विषयों की प्रयोगशाला के साथ भूगोल लैब, एनएसएस, एनसीसी, पुस्तकालय, खेल, आईसीटी, छात्रावास का निरीक्षण करने के साथ विद्यार्थियों व एलुमनी सदस्यों एवं अभिभावकों से भी चर्चा की। डॉ. नरेंद्र कुमार तनेजा के नेतृत्व में टीम ने बुधवार को निरीक्षण के दौरान कॉलेज के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों से सवाल भी किए।

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) करीब छह साल बाद बीआर मिर्धा कॉलेज का निरीक्षण करने पहुंची है। इससे पहले वर्ष 2016 में मिर्धा कॉलेज का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के बाद टीम की रिपोर्ट पर यूजीसी ने कॉलेज को बी -प्लस ग्रेड मिली थी। इस बार कॉलेज प्रशासन ने ग्रेड सुधारने के लिए कड़ी मेहनत करके कॉलेज को हर तरीके से संवारा है। कॉलेज की विकास निधि के साथ दानदाताओं के सहयोग से पिछले दो सालों में ऐसे कई काम कराए गए हैं, जो कॉलेज को ए -ग्रेड दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। गौरतलब है कि बीआर मिर्धा कॉलेज की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। वर्तमान में इस महाविद्यालय में करीब चार हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

आज इनका करेंगे निरीक्षणनैक टीम के सदस्य गुरुवार को गर्ल्स कॉमन रूम, सीसी टीवी कैमरा, सोलर पैनल, रूसा गार्डन, स्मार्ट क्लास रूम, बॉटनीकल गार्डन, रैन वाटर हार्वेटिंग सिस्टम, ऑडिटोरियम, एनएसएस उद्यान, कैंटीन, रोहिड़ा उद्यान, स्टेडियम सहित कॉलेज में विकसित की गई विभिन्न सुविधाओं एवं नवाचारों का अवलोकन करेंगे।

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मिर्धा कॉलेज के ये ऐसे काम, जो दिला सकते हैं ए ग्रेड

- सौर ऊर्जा से हर साल बच रहे लाखों रुपए

मिर्धा कॉलेज में लगा 14.5 केवी का सौर ऊर्जा प्लांट न केवल कॉलेज को बिजली कटौती की समस्या से निजात दिला रहा है, बल्कि इससे हर वर्ष कॉलेज को लाखों रुपए का लाभ हो रहा है। पहले जहां हर महीने करीब एक लाख रुपए का बिजली बिल भरना पड़ता था, अब उससे निजात मिल गई है। खास बात यह है कि सौर ऊर्जा प्लांट लगाने में कॉलेज को एक रुपए का खर्च नहीं लगा, यह अम्बुजा सीमेंट फाउण्डेशन की ओर से लगाया गया था।

- आधुनिक कैंटीन

कॉलेज परिसर में कैंटीन बनाने की मांग लम्बे समय से थी। पूर्व प्राचार्य डॉ. शंकरलाल जाखड़ ने इसके लिए एमडीएच के सुरेश राठी से बात कर आधुनिक कैंटीन बनाने का प्रस्ताव रखा। सतत प्रयास के बाद राठी राजी हो गए और करीब 15 लाख रुपए की लागत से आधुनिक कैंटीन का निर्माण पूरा करवाया।

- ट्रेक व स्टेडियम

कॉलेज परिसर में सरकारी बजट 1.66 करोड़ से ट्रेक, स्टेडियम सहित अन्य खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं। स्टेडियम व ट्रेक आदि तैयार होने से अब कॉलेज विद्यार्थियों को राजकीय स्टेडियम तक नहीं जाना पड़ेगा।

- दीवारों पर सुंदर पेंटिंगपिछले करीब छह महीने में कॉलेज परिसर व चार दीवारी पर एनएसएस, एनसीसी सहित स्काउट-गाइड रोवर रेंजर के विद्यार्थियों ने सुंदर पेंटिंग कर कॉलेज को आकर्षक रूप से सजाया है। आमतौर पर ऐसा बहुत कम कॉलेजों में देखने को मिलता है।

आधुनिक शिक्षा की सुविधा

मिर्धा कॉलेज में समय के साथ कई बदलाव किए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से आधुनिक शिक्षा पद्धति के तहत लैंग्वेज लैब इंग्लिश, प्लेसमेंट एंड केरियर काउंसलिंग सेल, स्मार्ट क्लास रूम आदि की सुविधाएं विकसित की गई हैं। साथ ही विधायक कोष से सुलभ कॉम्पलेक्स भी तैयार करवाया गया है।

यह है नैक

नैक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की स्वायत्त संस्था है, जिसका मूल्यांकन देश के सभी निजी एवं सरकारी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों की ग्रेड तय करता है। नैक शैक्षिक एवं सह-शैक्षणिक स्तर की गुणवत्ता, शोध, आधारभूत संरचना, छात्र सहयोग गतिविधियां, संस्थागत एवं व्यवस्थागत ढांचा तथा स्वस्थ परम्पराओं के आधार पर तीन प्रकार की ग्रेड देता है- ए, बी व सी। ग्रेड के आधार पर ही यूजीसी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को अनुदान देता है।----

पूर्व विद्यार्थियों का सहयोग आवश्यक व महत्वपूर्ण

नागौर . मिर्धा कॉलेज के सभागार में शाम को आयोजित पूर्व छात्र परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए टीम प्रभारी डॉ. तनेजा ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों का अध्ययन स्तर उच्च हो, इस दृष्टि से बहुत संसाधनों की आवश्यकता है।भारत व राज्य सरकारों की ओर से उच्च अध्ययन के क्षेत्र में किए जा रहे खर्च अपर्याप्त हैं। इस दृष्टि से उद्योग, समाज सेवा, सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले पूर्व विद्यार्थियों का इसमें अपेक्षित सहयोग अत्यंत आवश्यक व महत्वपूर्ण है। नई पीढ़ी को अच्छी प्रकार से तैयार करने में पूर्व विद्यार्थियों का बहुत अधिक महत्व है। नागौर विधायक मोहनराम चौधरी ने कहा कि नागौर जिले का शैक्षिक वातावरण अच्छा है। विशेष रूप से महाविद्यालय की परीक्षा में अच्छा प्रबंधन दिखाई देता है। उन्होंने महाविद्यालय में संस्कृत सहित अनेक विषयों में पीजी नहीं होने का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे विषयों में राजनीतिक वातावरण हावी न हो, इसकी आवश्यकता है। नागौर में सीटें कम व विद्यार्थी अधिक हैं, इसलिए सीटें बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में पूर्व छात्र परिषद समिति के अध्यक्ष डॉ. शंकरलाल जाखड़ ने कहा कि प्राध्यापकों के समक्ष गैर शैक्षणिक कार्य की अधिकता के कारण तथा जिला मुख्यालय होने के कारण से अन्य कार्यक्रमों की अधिकता होने से भी शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. रामूराम रायका ने कहा कि गुरुकुल पद्धति में पहले गुरु के समक्ष राजा भी नतमस्तक होता था। आज के समय में गुरुओं को अपेक्षित मान सम्मान देने की आवश्यकता है। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नृत्यगोपाल मित्तल ने कहा कि कॉलेज की अनेक प्रतिभाओं ने देश-विदेश में अपनी छाप छोडी है। विपरीत परिस्थितियों में भी यहां सांस्कृतिक, साहित्यिक, एनएसएस, एनसीसी के अनेक गतिविधियां आयोजित होती हैं। बैठक में महाविद्यालय के पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष सीताराम तांडी, व्याख्याता पुखराज खती, रामप्रताप कासनिया, घनश्याम फिड़ौदा तथा जमील अहमद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता बालकिशन भाटी, रविशंकर व्यास, सीए आर मांडण, छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रणजीत धौलिया, शिवानी राठी, रामचंद्र धुंधवाल सहित पूर्व छात्र उपस्थित रहे। प्राचार्य डॉ. हरसुख राम छरंग ने सभी का आभार जताया।