नागौर. नहरबंदी के दौरान की स्थितियों से निपटने के लिए जलदाय विभाग ने जल वितरण सप्लाई के समय की अवधि में अघोषित रूप से चुपचाप कटौती कर दी गई, लोगों को इसका पता तक नहीं चला। वर्तमान में अब 50-60 मिनट की जगह केवल 30-35 मिनट की आपूर्ति की जा रही है। इसकी वजह से जल संकट के चलते लोगों को निजी टेंकर्स से जल परिवहन कराना पड़ रहा है। समय की नजाकत को देखते हुए टेंकर्स चालक भी मनमर्जी दरें वसूलते हुए चांदी कूटने में लगे हुए हैं। अधिकारियों का दावा है कि पूरा 21 एमएलडी की सप्लाई नागौर के शहरी क्षेत्र आपूर्ति की जा रही है। इतनी एलएलडी की आपूर्ति नहरबंदी से पहले भी की जा रही थी। अब भी यही आपूर्ति की जा रही है तो फिर आपूर्ति समयावधि कैसे घटा दी गई। इसके अलावा गोगेलाव डेम में निजी टेंकर्स की लाइन लगी रहती है। यहां भी रोजाना 500 से 600 निजी टेंकर्स रोजाना पानी ले जा रहे हैं। प्रोजेक्ट के अधिकारियों की माने तो डेम में पानी की आपूर्ति केवल वितरण के लिए की जाती है तो फिर यह निजी टेंकर्स को एक ही दिन में करीब 30 लाख लीटर पानी किसके कोटे से दिए जा रहे हैं, सरीखे सवाल जलदाय अधिकारियों की नीयत पर सवालिया निशान लगाने लगे हैं।
आपूर्ति 21 एमएलडी हो रही तो फिर समय की कटौती क्यों
नागौर शहर क्षेत्र में करीब 24 हजार उपभोक्ता हैं। इनको विभाग ओर से प्रतिदिन 21 एमएलडी की आपूर्ति किए जाने का दावा किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में मंगलवार, बुधवार एवं गुरुवार यानि की तीन दिनों तक की गई पड़ताल में सामने आया कि नहरबंदी के पहले की जा रही सप्लाई आपूर्ति का समय घटा दिया गया है। सूत्रों की माने तो विभाग की ओर से यह मानते हुए फैसला लिया गया कि 15-20 मिनट की आपूर्ति समय घटाने की स्थिति में आम को पता नहीं चलेगा, और चल भी गया तो विभाग की ओर से दावा कर दिया जाएगा कि समय नहीं घटाया गया है। जबकि हकीकतन यह कटौती नहरबंदी शुरू होने के साथ ही विभाग की ओर से चालू कर दी गई थी। लोगों को इसकी जानकारी अब लगी है, जबकि लगातार पानी आने का समय घटने लगा।
खपत बढ़ी तो पानी आपूर्ति मात्रा ही घटा दी
शहर क्षेत्र में बालवा रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के बींजाराम, रामसिंह चौधरी, हनुमान फौजी, सीता कंवर ने बताया कि पानी पहले पूरे एक घंटे तक आता था, लेकिन अब महज 30 मिनट ही आ रहा है। पिछले दो-तीन दिनों से यही स्थिति बनी हुई है। पानी की आपूर्ति मात्रा कम होने के कारण अब टेंकर्स से जल परिवहन कराना पड़ रहा है। इसी तरह से सूफिया कॉलोनी की अनसुईया चौहान, मंजूदेवी, बंशीधर टाक ने बताया कि गर्मी में पानी की खपत तो बढ़ जाती है। ऐसे में पानी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए, लेकिन अब पानी पूरे 20 से 25 मिनट कम आ रहा है। इसके चलते टेंकर्स से पानी मंगाना पड़ रहा है। पानी तुरन्त मंगाने की स्थिति में एक हजार से लेकर 1100 रुपए देकर मंगाना पड़ता है। इसी तरह से नया दरवाजा, व्यास कॉलोनी, सुगन सिंह सर्किल के पास, बीकानेर रोड कृषि मण्डी पीछे का एरिया, लोहिया का चौक, काठडिय़ा का चौक, भूरावाड़ी, मिश्रावाड़ी तिगरी बाजार के पास आदि एरिया में लोगों से बातचीत हुई तो यही बताया कि पहले एक घंटा पानी आता था, और अब केवल आधा घंटा पानी आ रहा है।
सडक़ों पर दौड़ते टेंकर्स मनमर्जी की दरों पर बेच रहे पानी
जल संकट नहीं होने के दावों के बीच कई जगहों पर अभी भी जलापूर्ति की स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं है। पेयजल की आपूर्ति तो होती है, लेकिन कई जगहों पर पानी पर्याप्त मात्रा में पहुंचता ही नहीं है। अब ऐसे में पानी के बढ़ते संकट के बीच मौके का फायदा उठाते हुए टेंकर से जल परिवहन करने वालों ने प्रति टेंकर्स ने अपनी दरें 800 से 1000 तक कर दी है। कईयों को मजबूरी में टेंकर से पानी मंगाना ही पड़ता है। सूत्रों की माने तो अनुमानत: केवल शहर क्षेत्र में ही एक दिन से चालीस से पचास टेंकर्स से प्रतिदिन प्राईवट चालक जल परिवहन कर रहे हैं।
गोगेलाव डेम पर टेंकर्स की लग रही लाइन
गोगेलाव डेम पर टेंकर्स पर पानी भरने के लिए टेंकर्स की लाइन लगी रहती है। यह लाइन करीब एक किलोमीटर से डेढ़ किलोमीटर तक लगी रहती है। इसमें कम से कम 500-600 टेंकर्स शामिल रहते हैं। एक टेंकर्स में पांच हजार लीटर पानी आता है। इस तरह से छह सौ टेंकर्स भी हैं तो फिर पूरा 30 लाख लीटर पानी जलदाय विभाग की ओर से निजी टेंकर्स को बेचा जा रहा है। यानि की पूरे 30 लाख लीटर पानी जल परिवहन में जा रहा है। जबकि जलदाय विभाग को कुल डेम में नागौर के लिए मिलता है 21 एमएलडी, ग्रामीण के लिए अलग से दिया जाता है। डेम में प्रोजेक्ट की ओर से तय मात्रा के अनुसार ही पानी की आपूर्ति की जाती है तो फिर यह अतिरिक्त 30 लाख लीटर पानी आम उपभोक्ताओं के कोटे से ही जा रहा है, क्यों कि प्रोजेक्ट की ओर से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में तय मात्रा से ज्यादा पानी की आपूर्ति होती ही नहीं तो फिर यह 30 लाख लीटर पानी किसके हिस्से का दिया जा रहा है। यही पानी लोगों के घरों तक पहुंच जाए तो फिर जल संकट की समस्या का समाधान भी सकता है, सरीखे सवाल जलदाय विभाग के अधिकारियों की नीयत पर सवालिया निशान उठाने लगे हैं।
इनका कहना है…
जलापूर्ति के लिए विभाग की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई है। जलापूर्ति का समय नहीं घटाया गया है। ऐसा कुछ है तो फिर इसकी जांच कर ली जाएगी।
रमेशचंद्र चौधरी, अधिशासी अभियंता, जलदाय विभाग नागौर