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Nagaur patrika…विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं होने के चलते जिले डेढ़ दर्जन से ज्यादा हॉस्पिटल खाली…VIDEO

नागौर. जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सकों की विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया गत तीन सालों से लंबित चल रही है। इसके चलते खाली चल रहे जिले के डेढ़ दर्जन हॉस्पिटलों में न तो डॉक्टर्स आ पाए, और न ही प्रतीक्षारत चिकित्सकों के वेतनमान में सुधार हो सका। इसके चलते जिले के हॉस्पिटलों में अधिकतर जगह जुगाड़ से […]

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नागौर. जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सकों की विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया गत तीन सालों से लंबित चल रही है। इसके चलते खाली चल रहे जिले के डेढ़ दर्जन हॉस्पिटलों में न तो डॉक्टर्स आ पाए, और न ही प्रतीक्षारत चिकित्सकों के वेतनमान में सुधार हो सका। इसके चलते जिले के हॉस्पिटलों में अधिकतर जगह जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। जिसके चलते अब स्थिति विकट होती नजर आने लगी है।

तीन साल से कर रहे इंतजार

जिले के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों को तकरीबन तीन साल से विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया का इंतजार है है। यह प्रक्रिया यूं तो पिछले साल अप्रैल माह में ही हो जानी चाहिए थी, लेकिन उस दौरान चुनावी आचार संहिता के चलते नहीं हो पाई थी। हालांकि चुनावी आचार संहिता के कारण आए अवरोध के चलते इसमें कार्मिक विभाग की ओर से पूर्व में एक आदेश जारी कर गत वर्ष के अगस्त माह में ही इसकी प्रक्रिया करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। बताते हैं कि चिकित्साधिकारियों में से 60 प्रतिशत चिकित्साधिकारियों की विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया वर्ष 2023 के अप्रैल माह में और शेष 40 प्रतिशत की डीपीसी इसी वर्ष के बीते अगस्त माह में होनी थी। इस संबंध में कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव की ओर से विगत आठ जुलाई को आयुर्वेद विभाग के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। इसके बाद भी नहीं हो पाई

इन जगहों पर नहीं मिल पाए चिकित्सक

विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया होती तो फिर खाली चल रहे आयुर्वेदिक हॉस्पिटलों में नए चिकित्सकों की नियुक्तियां हो जाती है। इसके चलते नागौर, मूण्डवा, खींवसर में , जायल, मेड़ता, डेगाना, डीडवाना, लाडन, परबतसर एवं कुचामन आदि जगहों पर डेढ़ दर्जन हॉस्पिटलों में चिकित्सक ही नहीं हैं। इसके चलते विभागीय स्तर पर जुगाड़ से यानि की सप्ताह में एक से दो दिन अन्य चिकित्सकों को भेजकर काम चलाया जा रहा है। जबकि शेष दिनों में बंद रहने की स्थिति रहती है। इसकी वजह से स्थिति खराब होने लगी है।

तो फिर नए चिकित्सकों की होती नियुक्तियां

विभाग की ओर से इन चिकित्साधिकारियों की अब तक विभागीय प्रक्रिया कर दी गई होती तो फिर यह वरिष्ठ चिकित्साधिकारी सेकण्ड ग्रेड पर चले जाते। इससे इन चिकित्सकों की खाली जगहों पर नए चिकित्सकों की तैनातगी भी अब तक हो गई होती। यानि की जिले में खाली चल रहे कई आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को न केवल बेहतर चिकित्सकों की व्यवस्था मिल जाती, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था भी सहजता से संचालित हो सकती थी।

चिकित्सक कर रहे संघर्ष

– आयुर्वेद विभाग में आयुर्वेद चिकित्साधिकारियों की वर्ष 2024 के अलावा 2023 की पदोन्नति की प्रक्रिया भी अभी तक नहीं हो पाई है जिसके कारण न केवल आयुर्वेद चिकित्साधिकारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है अपितु नई नियुक्तियों का रास्ता भी प्रशस्त नहीं हो पा रहा है ।

डॉ सुरेश रॉयल, प्रान्तीय पी जी प्रतिनिधि , राजस्थान आयुर्वेद चिकित्साधिकारी संघ

इनका कहना है…

डीपीसी तो विभाग की ओर से पहले ही कर दी गई होती, लेकिन अपरिहार्य कारणों के चलते नहीं हो पाया। इस संबंध में विभाग की ओर से प्रावधान के तहत जल्द ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

आनन्द शर्मा, निदेशक, आयुर्वेदिक निदेशालय अजमेर