
राजस्थान में लगातार बढ़ रही ऊंट के दूध की डिमांड, मां के दूध जितना पौष्टिक, पढ़ें यह रिपोर्ट #Nagaur #Video
नागौर . रेतीले धोरों में बीते तीन-चार सालों में ऊंट एक दुधारू जानवर के विकल्प के तौर पर सामने आया है। पशुपालक ऊंटनी के दूध को बेचकर आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। दूध की बिक्री होने से पशुपालकों को ऊंट पालन के संरक्षण में अपेक्षित मदद मिल रही है। पशुपालकों के लिए यह सतत आजीविका का बेहतर व्यवसाय बना है।
200 ऊंट रखने वाले पशुपालक राजूराम व मोतीराम रेबारी बताते है कि ऊंटनी के दूध की बिक्री होने से ऊंट पालन एवं संरक्षण में काफी मदद मिली है। आमदनी प्राप्त होने से घर-परिवार का गुजारा इसी से चल रहा है। साल 2017 में राष्ट्रीय ऊष्ट्र अनुसंधान केन्द्र बीकानेर और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की गहरी जांच पड़ताल के बाद ऊंटनी के दूध को हृाूमन मिल्क के रूप में शामिल किया गया। जिसके बाद ऊंटनी के दूध के विभिन्न स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता में वृद्धि हुई। दूध की बिक्री होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है और पारंपरिक ऊंट चरवाहों की आजीविका बढ़ी है। राइका समुदाय जिसका जीवन यापन का प्राथमिक स्रोत उनके मवेशियों, मुख्य रूप से ऊंट, भेड़-बकरी पर निर्भर है। समुदाय मवेशियों के साथ-साथ उन जंगलों के साथ सहजीवी संबंध साझा करते है जिन पर दोनों निर्भर है। चौमू, समोद, दौसा, अलवर, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर की पहाड़ियों में जंगलों के साथ उनकी सह-निर्भरता हमेशा बड़े पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ पहुंचाने के लिए निहीत रही है।
कृषि विज्ञान केन्द्र पोकरण के पशु वैज्ञानिक डॉ. रामनिवास ढाका बताते है कि ऊंटनी का दूध सेहत का खजाना है। इसके दूध में प्रोटिन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेड, फाइबर, लैक्टिक अम्ल, विटामिन-ए, ई, बी-2 और सी प्रचूर मात्रा में होते है। ऊंटनी का दूध एक मां के दूध जितना पौष्टिक होता है। इसमें वे सभी तत्व पाए जाते हैं जो एक मां के दूध में होते हैं और जो एक बच्चे के लिए जरूरी होते हैं। इसके दूध में केसीन और आयरन भी प्रचूर मात्रा में होते है। विटामिन सी की मात्रा अन्य दूध के मुकाबले चार गुना अधिक होती है।
40 से 60 रुपए मिल रहे भाव
राजूराम व मोतीराम रेबारी ने बताया कि बगरू डेयरी में ऊंटनी का दूध 60 रुपए प्रति लीटर बिकता है, वही चौसला में प्रति लीटर 40 रुपए मिलते है। उन्होंने बताया कि हमें भ्रमण के दौरान चरागाह के नजदीक जो भी डेयरी पड़ती है वहां दूध बेच देते है। हालांकि सभी जगह एक भाव नहीं मिलते। ऊंट पालकों ने सरकार से सभी डेयरियों पर ऊंटनी के दूध के वाजिब दाम रखने की मांग की है।
इन रोगों में रामबाण इलाज
डॉ. रामनिवास ने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधानों से पता चला है कि ऊंटनी के दूध में न केवल भरपूर पौषक तत्व, बल्कि उच्च कोटि के एंटीओक्सिडेटस भी पाए जाते है, इसका उपयोग पीलिया, बवासीर, टीबी, हृदय रोग, उच्च रक्त चाप, एलर्जी जैसे रोगों के उपचार में भी किया जाता है। ये मेमोरी पॉवर को बढ़ाने के साथ, शरीर को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। ऊंटनी के दूध में 2 से 3.5 प्रतिशत वसा, 3.1 प्रतिशत प्रोटीन, 4.5 प्रतिशत लेक्टोज व 11 प्रतिशत कुल ठोस पदार्थ पाए जाते है। ऊंटनी का दूध जल्दी से खराब भी नहीं होता है।
ऊंटनी के दूध की बर्फी, गुलाब जामुन और चॉकलेट
ऊंटनी के दूध से सुंगधित दूध, चाय, कॉफी एवं कुल्फी तैयार कर उनकी बिक्री की जा रही हैं। खास बात ये हैं कि इन उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। डॉ. रामनिवास ने बताया कि अब तो ऊंटनी के दूध से पेड़ा, बर्फी, गुलाबजामुन और चॉकलेट भी तैयार की जा रही है। दूध से पनीर, मक्खन और घी भी निकाला जा रहा है, जो स्वादिष्ट व सुपाचलक है।
10 लीटर दूध से 800 ग्राम चीज उत्पादित
डाॅ. रामनिवास बताते है कि 100 लीटर दुग्ध से 8 किलो सूखा पाउडर बनाया जा सकता है, जो एक साल तक खराब नहीं होता है और पशुपालक 10 लीटर दूध से 800 ग्राम चीज बना सकते है, जिसे महंगे दामों में बाजार में बेचा जा सकता है। पशुपालकों को ध्यान रखाना चाहिए की ऊंटनी के दूध से दही नहीं बनता है, इसलिए इसके दूध और दूध उत्पाद ही बनाए जा सकते है।
इसलिए बढ़ रही ऊंट के दूध की डिमांड
रिसर्च से पता चला है कि ऊंट के दूध में गाय के दूध के मुकाबले कम फैटी एसिड, कोलेस्ट्रॉल और शर्करा पाया जाता है। इसमें ओमेगा-3, मैग्नीशियम, जस्ता और आयरन समेत कई खनिज तत्वों के साथ विटामिन सी, बी-2, ए और ई भी पाए जाते हैं। एक दिन में ऊंटनी 7 से 8 लीटर दूध देती है। ऊंट पालन का चलन काफी कम है और बाजार में दूध की मांग काफी ज्यादा है।
Published on:
08 May 2023 05:25 pm
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