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नागौर का दधिमती माता मंदिर: आक्रमण करने आया औरंगजेब तब सेना सहित उल्टे पांव भागा, पढ़ें यह खबर, Video भी

नागौर जिले के रोल कस्बे के समीप गोठ मांगलोद में माता दधिमती का मंदिर स्थित है। माता दधिमती, दधीचि ऋषि की बहन थी, इन्हें लक्ष्मी जी का अवतार भी माना जाता है। विद्ववानों के अनुसार दधिमती माता का जन्म माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ था। यह दाहिमा व डिडेल गौत्र की कुलदेवी है।

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नागौर जिले के रोल कस्बे के समीप गोठ मांगलोद में माता दधिमती का मंदिर स्थित है। माता दधिमती, दधीचि ऋषि की बहन थी, इन्हें लक्ष्मी जी का अवतार भी माना जाता है।
विद्ववानों के अनुसार दधिमती माता का जन्म माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ था। यह दाहिमा व डिडेल गौत्र की कुलदेवी है। बताया जाता है कि गोठ मांगलोद के इस स्थान पर आकर अयोध्या के राजा मांधाता ने यज्ञ किया था। उन्होंने चार हवन कुंड बनाए थे और इन्हीं चार हवन कुंडों में गंगा, यमुना, सरस्वती व नर्मदा नदी का पानी आता था। इन सभी नदियों जल का स्वाद भी अलग -अलग था।

मंदिर के पास स्थित है कपाल कुंड
नवरात्रि में सप्तमी के दिन मंदिर से एक पालकी में देवी के प्रतीक स्वरूप को बिठाकर कपाल कुंड तक लाया जाता है। इस मंदिर के ऐतिहासिक महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसे सरकार के पुरातत्व विभाग ने संरक्षित स्मारक घोषित किया है।


कलयुग से जुड़ा है अधर स्तम्भ
अष्टमी के दिन दधिमती माता मंदिर में मेला भरता है। मेले में देशभर से लाखों लोगों की भीड़ यहां दर्शन करने के लिए उमड़ती है। मान्यता है कि कलयुग के बढ़ते प्रभाव से मंदिर का मुख्य अधर स्तंभ जमीन से चिपकता जा रहा है। कलयुग जैसे-जैसे बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे यह स्तंभ की जमीन की सतह से चिपकता जाएगा। वहीं दधिमती माता के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने विकटासुर नाम के राक्षस का वध किया था।


मुगल बादशाह को मधुमक्खियों ने किया हैरान
मंदिर के पुजारी मनीष पाराशर ने बताया कि मुगलों के दौर में यहां औरंगजेब की सेना ने मंदिर पर आक्रमण कर दिया था। उसी समय मंदिर के अंदर मधुमक्खियों का एक छत्ता था। औरंगजेब की सेना ने जब मंदिर पर हमला किया, तब मधुमक्खियों ने उन पर आक्रमण बोल दिया। परिणामस्वरूप औरंगजेब की सेना को उल्टे पांव मंदिर के इलाके को छोडकऱ भागना पड़ा। मान्यता है कि दधिमती माता यहीं पर प्रकट हुई थी और उन्हीं ने औरंगजेब की सेना को उल्टे पांव भगाया था।

श्रद्धालुओं के लिए है इंतजाम
दधिमती माता मंदिर के भीतर नवरात्रों के समय हर रोज काफी संख्या में भक्त दुर्गाष्टमी को पाठ करते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए कई इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में ही सैकड़ों कमरों की धर्मशाला है। वहीं पर श्रद्धालुओं के ठहरने व अन्य व्यवस्थाओं का इंतजाम किया जाता है।