
मानासर रेलवे पुलिया पर ऐसा कुछ कि सूरज की रोशनी में पलट गया एसिड से भरा टैंकर
नागौर शहर के मानासर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर गुरुवार को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (डाइल्यूट सल्फ्यूरिक एसिड) से भरा टैंकर असंतुलित होकर पलट गया। पांच साल के लम्बे इंतजार के बाद मानासर की रेलवे फाटक पर बनाया गया यह आरओबी हादसे का ‘ब्लैक स्पॉट’ नहीं बन जाए। क्योंकि इस पुल पर पिछले एक महीने में यह दूसरी दुर्घटना हो गई।
गनीमत रही कि टैंकर आरओबी से नीचे नहीं गिरा, अन्यथा बड़ा हादसा हो जाता। टैंकर पलटने से उसमें भरा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल निकलकर बहने लगा, जो आरओबी के साथ नीचे सडक़ पर भी फैल गया। अम्ल बहकर डिस्कॉम कार्यालय तक पहुंच गया। हादसे की सूचना मिलने पर कोतवाली थाना पुलिस, यातायात पुलिस के साथ एएसपी सुमित कुमार भी मौके पर पहुंचे तथा यातायात डायवर्ट किया। करीब तीन घंटे बाद टैंकर को क्रेन की सहायता से खड़ा करके हटाया गया। इसके बाद आरओबी पर भरे अम्ल पर कुछ मिट्टी डाली गई।
आरओबी का उद्घाटन भी बाकी
मानासर आरओबी में रोड इंजीनियरिंग की कमी साफ दिखाई दे रही है। पुल में इतने मोड़ दिए गए हैं कि हर वक्त हादसे की आशंका रहती है। अब तक इस पुल का औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान पुल पर यातायात चालू कर दिया था।
‘ब्लैक स्पॉट’ बन रहा है आरओबी
पांच साल के लम्बे इंतजार के बाद मानासर रेलवे फाटक पर बनाया गया आरओबी हादसे का ‘ब्लैक स्पॉट’ बनता जा रहा है। इस पुल पर पिछले एक महीने में यह दूसरी दुर्घटना है। इससे पहले गत 19 जनवरी को यहां मोटरसाइकिल सवार दीवार से टकरा कर नीचे गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। आरओबी में दिए गए खतरनाक मोड़ व सुरक्षा दीवार छोटी होने से बार-बार हादसे हो रहे हैं। शहरवासियों ने इस आरओबी को ‘खतरनाक पुलिया’ कहना शुरू कर दिया है। जल्द ही हादसों को रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
बड़ा सवाल : शहर में क्यों आया टैंकर
टैंकर चालक जोधपुर से दिल्ली की ओर जा रहा था यानी उसे जोधपुर रोड से लाडनूं रोड की ओर जाना था। इसके लिए बायपास रोड बनी हुई है, इसके बावजूद टैंकर चालक शहर के अंदर आ गया।
आरओबी एक नजर
मानासर रेलवे फाटक पर 1.173 किलोमीटर लम्बा व 7 मीटर चौड़े ओवरब्रिज को बनाने के लिए 7 जून 2018 को शिलान्यास किया गया था। कार्यादेश के अनुसार ठेकेदार को दिसम्बर 2019 में काम पूरा करना था। लेकिन काम अक्टूबर 2023 में पूरा हो पाया। आरओबी का बजट 29.23 करोड़ रुपए था। निर्माण शुरू होने के बाद आरओबी की डिजायन में भी फेरबदल किया गया, जिसके कारण मोड़ बढ़ गए।
पांच घंटे तक बहता रहा अम्ल
आरओबी पर सुबह करीब 8 बजे टैंकर पलटा । उसके बाद टैंकर का अम्ल बहता रहा। करीब तीन घंटे बाद टैंकर को क्रेन की सहायता से सीधा किया जा सका। काफी देर तक टैंकर आड़ा पड़ा रहने से अम्ल बहता रहा, जिससे न केवल पुल में रिसाव हुआ, बल्कि अम्ल बहकर नीचे सडक़ के किनारे बहता हुआ डिस्कॉम कार्यालय तक पहुंच गया। बाद में दोपहर करीब दो बजे जेसीबी से उस पर मिट्टी डाली गई। उधर, टैंकर से तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की सप्लाई करने वाली कम्पनी की टीम जोधपुर से दोपहर एक बजे मौके पर पहुंची तथा चूना डालकर अम्ल का प्रभाव खत्म करने का प्रयास किया।
Published on:
02 Feb 2024 05:40 pm
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