
नागौर पुलिस की जयपुर में रेड। फोटो: पत्रिका
राजस्थान की नागौर जिला पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ एक बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। नागौर पुलिस की जांच टीम ने राजधानी जयपुर के वैशाली नगर इलाके में चल रही एक कंपनी के कार्यालय पर छापा मारकर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के एक बहुत बड़े नेटवर्क को उजागर किया है। यह नेटवर्क साधारण तरीके से नहीं, बल्कि एक पेशेवर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनी की आड़ में बेहद संगठित रूप से संचालित किया जा रहा था।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का जाल केवल नागौर या जयपुर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि पूरे राजस्थान के अलग-अलग जिलों में इसके सटोरियों की पूरी चेन सक्रिय थी। नागौर पुलिस ने इस मामले में तकनीकी उपकरणों को जब्त करने के साथ-साथ आईटी एक्सपर्ट्स को भी अपने रडार पर लिया है। पुलिस इस सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन और इसमें शामिल अन्य बड़े सटोरियों की कुंडली खंगालने में जुटी है।
इस ऑपरेशन की कमान नागौर की प्रशिक्षु आईपीएस अदिति उपाध्याय ने संभाली। उन्होंने आधिकारिक तौर पर बताया कि ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के इस बड़े मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम को कुछ ऐसे पुख्ता इनपुट और तकनीकी साक्ष्य मिले थे, जिससे यह साफ हो गया था कि इस सट्टा रैकेट की मुख्य कमान जयपुर से संभाली जा रही है।
जांच में सामने आया कि जयपुर के वैशाली नगर में संचालित सेनेरियन आईटी सोल्यूशन (Senerien IT Solution) नाम की कंपनी का पूरा नेटवर्क राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में फैला हुआ है। यह कंपनी ऑनलाइन गैंबलिंग और क्रिकेट मैचों पर दांव लगाने के लिए विशेष प्रकार की वेबसाइट्स और कस्टमाइज्ड मोबाइल एप्लीकेशन तैयार करती थी। इसके बाद सटोरियों और ग्राहकों को सट्टा खेलने के लिए गुप्त आईडी (ID) और पासवर्ड बांटे जाते थे। यह बहुत बड़े स्तर का डिजिटल रैकेट है, जिसमें रोजाना करोड़ों रुपए के वित्तीय लेन-देन होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में इस रैकेट को लेकर बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह अवैध ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे का पूरा कारोबार पिछले 7 साल से लगातार बिना किसी रुकावट के चल रहा था।
इस गिरोह ने पुलिस और साइबर सेल की नजरों से बचने के लिए बाजार में चल रहे आम ऐप्स के बजाय खुद का एक कस्टमाइज्ड ऐप तैयार कर रखा था, जिसका नाम 'ट्रेम्प-24' (Trump-24) था।इस विशिष्ट ऐप के माध्यम से मुख्य संचालक लोगों को व्यक्तिगत आईडी और पासवर्ड उपलब्ध करवाते थे।
आईडी एक्टिवेट होने के बाद ग्राहकों से ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट मोड के जरिए पैसे लिए जाते थे और फिर मैचों पर सट्टा लगवाया जाता था। मैचों के दौरान भावों (Odds) का उतार-चढ़ाव और सट्टे से जुड़ी तमाम जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान भी इसी नेटवर्क के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए किया जाता था।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे जयपुर के बड़े बुकीज (Bookies) से मुख्य मास्टर आईडी लेकर आगे छोटे सटोरियों को री-सेल करते थे। खुद का स्वतंत्र ऐप होने के कारण धंधे की पूरी कमांड और कंट्रोलिंग इसी जयपुर स्थित कंपनी के पास सुरक्षित रहती थी।
जानकारी के अनुसार, जयपुर में हुई यह बड़ी रेड कोई अचानक हुई कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे नागौर पुलिस की पिछले कई महीनों की जमीनी मेहनत और क्रमिक तफ्तीश है। इस पूरे मामले की शुरुआत गत 24 फरवरी की रात को हुई थी। तब नागौर कोतवाली पुलिस और जिला विशेष टीम (DST) ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए क्रिकेट मैच पर ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले रोल निवासी अशोक भाटी और चेनार निवासी हिम्मताराम गहलोत को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
24 फरवरी को हुई उस प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सटोरियों के कब्जे से निम्नलिखित सामान बरामद किया था:
* 23 डायरी-रजिस्टर (जिसमें सट्टे के लाखों-करोड़ों का हिसाब-किताब दर्ज था)
* 1 बिल बुक और 1 चेक बुक
* 1 वाई-फाई सेट
* 1 कंप्यूटर और 1 लैपटॉप
* 3 एटीएम (ATM) कार्ड
* 4 मोबाइल फोन
जब पुलिस ने इन जब्त किए गए मोबाइल फोन्स, कॉल लॉग्स और व्हाट्सएप चैट्स को खंगाला, तो उसमें लाखों-करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन के डिजिटल फुटप्रिंट्स मिले। इन कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस को समझ आया कि यह कोई स्थानीय छोटा गिरोह नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से संगठित तरीके से चलाया जा रहा ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा गिरोह है।
नागौर में गिरफ्तार किए गए आरोपी अशोक भाटी और हिम्मताराम गहलोत से जब पुलिस ने रिमांड के दौरान कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपने मुख्य तकनीकी हैंडलर का नाम उगला। उन्होंने बताया कि जयपुर का एक आईटी एक्सपर्ट उन्हें पूरी तकनीकी मदद और सट्टे की लाइंस उपलब्ध करवाता है। इस सूचना पर नागौर पुलिस ने तुरंत जयपुर में जाल बिछाया और तकनीकी एक्सपर्ट प्रशांत को गिरफ्तार कर लिया।
आईटी एक्सपर्ट प्रशांत की गिरफ्तारी पुलिस के लिए इस केस का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। प्रशांत ने पूछताछ में पुलिस के सामने सट्टे के इस पूरे सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिंडिकेट के कई बड़े राज खोल दिए। उसने बताया कि जयपुर से पूरे राजस्थान भर में सट्टेबाजों की एक बहुत लंबी और मजबूत चेन जुड़ी हुई है। इसी के आधार पर पुलिस टीम ने जयपुर स्थित सेनेरियन आईटी सोल्यूशन कंपनी के कार्यालय पर छापा मारा।
पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने कानूनी शिकंजे से बचने के लिए 'ट्रेम्प-24' ऐप को तुरंत ऑनलाइन प्लेस्टोर और प्लेटफॉर्म से हटा दिया था, लेकिन पुलिस ने उनके सर्वर और सिस्टम को ट्रैक कर भारी संख्या में डिवाइस सीज कर लिए हैं।
Updated on:
7 Jun 2026, 11:54 AM IST
Published on:
7 Jun 2026, 11:54 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.