
Nagaur's campaign 'Ujaash' became a role model in the state
नागौर. गांव-ढाणी तक फैले जिले के 817 सरकारी विद्यालयों में जिला कलक्टर की अनूठी पहल से ‘उजास’ हुआ है। देखा जाए तो ज्ञान के इन केन्द्रों में नौनिहालों को हर आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाने का प्रयास राज्य सरकार के स्तर पर हो रहा है और इन्हीं प्रयासों को और अधिक दृढ़संकल्पित होकर किया जाए तो उसके स्वर्णिम परिणाम सामने आते हैं। जिले में ऐसे सरकारी स्कूल, जो अपने स्थापना काल से ही विद्युतीकरण से वंचित थे, उनमें उजियारा लाने का अभिनव कार्य जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए अभियान ‘उजास’ के तहत किया गया, जो सफलता के ऊपरी पायदान तक पहुंच चुका है।
‘कौन कहता है आकाश में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछाले यारों’ कवि दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को जिला कलक्टर एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने साकार किया है। राज्य के बड़े भूभाग वाले जिलों में शुमार नागौर में 910 सरकारी स्कूल ऐसे चिह्नित किए गए, जो स्थापना काल से ही विद्युतीकरण से वंचित रहे। ऐसे विद्यालयों में विद्युतीकृत करवाने का जिम्मा उठाया यहां के कलक्टर डॉ. सोनी ने और इसमें सफलता भी हासिल की। नागौर जिले में चलाया गया यही अभियान उजास, अब राज्य भर में रोल मॉडल बन चुका है।
प्रदेश के 11154 विद्यालय बिजली से वंचित
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सम्पतराम ने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने जिला कलक्टर डॉ. सोनी के अभियान उजास की तर्ज पर दूसरे जिलों में भी वंचित सरकारी स्कूलों के विद्युतीकरण को लेकर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देशों में बताया गया है कि राज्य में संचालित कुल 64 हजार 93 सरकारी विद्यालयों में से 11 हजार 154 में विद्युत सुविधा नहीं है। इसके लिए नागौर कलक्टर द्वारा अभियान चलाकर शिक्षा विभाग तथा विद्युत निगम के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जो काम किया गया है, उसी तर्ज पर अन्य जगहों पर भी सरकारी स्कूलों के विद्युतीकरण पर काम किया जाए।
कुछ यूं सामने आई बात और बना अभियान का प्रारूप
सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का ढांचा सुदृढ़ और उन्नत हो, इसे लेकर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय निष्पादन समिति की जुलाई-2020 में रखी गई बैठक में यह तथ्य दृष्टिगोचर हुआ कि जिले में ऐसे राजकीय विद्यालय बड़ी संख्या में हैं, जिनमें अब भी बिजली कनेक्शन नहीं हैं। बिजली के अभाव में विद्यार्थी भीषण गर्मी में भी ताप सहते हुए इन विद्यालयों में अध्ययन करते हैं। कलक्टर सोनी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिले में ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार करवाई तो 910 विद्यालय सामने आए, जो अपने स्थापना काल से ही विद्युत विहीन थे। इसके बाद कलक्टर ने इन सरकारी विद्यालयों में विद्युत कनेक्शन जारी करवाने को लेकर शिक्षा विभाग तथा अजमेर विद्युत वितरण निगम को संयुक्त रूप से मिशन मोड में काम करने निर्देश दिए। जिले में वंचित सरकारी विद्यालयों को विद्युतीकरण से जोडऩे के लिए शुरू किए गए मिशन को अभियान ‘उजास’ नाम दिया गया। अभियान के तहत संस्था प्रधानों ने कम्पोजिट स्कूल ग्रांट व विकास कोष से तो कहीं भामाशाहों को प्रेरित कर उनके द्वारा दिए गए आर्थिक सहयोग से विद्युत कनेक्शन के लिए निर्धारित डिमाण्ड राशि जमा करवाई गई।
93 विद्यालय रहे शेष
जिले में चलाए जा रहे अभियान उजास के तहत चिह्नित किए गए कुल 910 सरकारी विद्यालयों में से 817 का विद्युतीकरण किया जा चुका है। शेष 93 के विद्युत कनेक्शन जारी करवाने का काम प्रक्रियाधीन है। अभियान के तहत स्कूलों के विद्युतीकरण में भामाशाह व दानदाताओं से भी सहयोग लिया गया है। रवि इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अभियान उजास की आगामी सफल क्रियान्विति के लिए 10 लाख रुपए की सहयोग राशि दी गई है।
- संपतराम, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, नागौर
Published on:
25 Jan 2021 11:14 am
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