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राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन करने में नागौर अव्वल, जयपुर दूसरे व अलवर तीसरे नम्बर पर

- जिले के किसानों को जमाबंदी, खेतों के नक्शे एवं गिरवदारी नकल लेने के लिए नहीं काटने पड़ेंगे पटवारियों के चक्कर- किसान घर बैठे प्राप्त कर रहे गिरदावरी, नकल व जमाबंदी

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अपना खाता वेबसाइट

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नागौर. राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन करने में नागौर जिला प्रदेश में पहले पायदान पर है। जयपुर दूसरे व अलवर तीसरे स्थान पर पर है। भारत एवं राजस्थान सरकार का राजस्व विभाग अन्तर्गत अति-महत्वपूर्ण प्रोग्राम डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मॉर्डनाइजेशन (डीआईएलआरएमपी) के तहत नागौर जिले के सभी राजस्व ग्रामों का सम्पूर्ण राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गया है। अब जिले के किसानों को जमाबंदी, खेतों के नक्शे एवं गिरवदारी नकल लेने के लिए पटवारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से अब आम काश्तकार घर बैठे जमाबंदी, खेतों के नक्शे एवं गिरवदारी नकल ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से 17 मई 2019 को जारी अधिसूचना के अनुसार काश्तकार की ओर से प्रस्तुत ई-साइन राजस्व रिकार्ड (जमाबन्दी, गिरदावरी आदि) किसी भी प्रकार के कार्यालय / न्यायालय में मान्य होती है।

ई-साइन युक्त राजस्व रिकॉर्ड के लिए शुल्क
डीआईएलआरएमपी प्रक्रिया के अन्तर्गत पटवारी से राजस्व रिकॉर्ड (जमाबन्दी, गिरदावरी) की नकल लेने की आवश्यकता नहीं है। काश्तकार प्रमाणित राजस्व रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए ई-साइन युक्त राजस्व रिकार्ड निर्धारित शुल्क के साथ अपना खाता वेबसाइट apnakhata.raj.nic.in या धरा एप्प से स्वयं या ई-मित्र से प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही केवल देखने के लिए बिना किसी शुल्क के देख सकते हैं।

नामान्तरण, बंटवाड़ा में भी नागौर आगे
ऑनलाइन प्रक्रिया अन्तर्गत नामान्तरण भी ऑनालाइन ही दर्ज हो रहे हैं, जिसके अन्तर्गत काश्तकार अपना खाता वेबसाइट पर नामान्तरण (म्यूटेशन) दर्ज करवाने के लिए नि:शुल्क ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। साथ ही पंजीयन दस्तावेज के स्वत: नामान्तरण भी दर्ज हो रहे हैं, जिसके अन्तर्गत प्रार्थी को नामान्तरण के लिए पंजीयन दस्तावेज पटवारी को उपलब्ध करवाने की आवश्यकता नहीं रहती। जैसे ही पंजीयन ऑफिस में किसी कृषि भूमि का पंजीयन होता है, ऑटोमेटिक नामान्तरण दर्ज हो जाता है। 2 लाख 82 हजार 251 नामान्तरण के साथ नागौर प्रदेश में प्रथम, 2 लाख, 78 हजार 745 के साथ जयपुर द्वितीय व 2 लाख 51 हजार 130 नामान्तरण के साथ अलवर तीसरे स्थान पर है। इसी प्रकार बंटवाड़ा (विभाजन) में भी नागौर प्रथम, जयपुर द्वितीय व चूरू तृतीय स्थान पर है। स्तत: (ऑटो जनरेट) नामान्तरण में 17,733 के साथ नागौर प्रथम, 15,332 के साथ दूसरे व 13,142 के साथ तीसरे स्थान पर है।

कलक्टर के निर्देश - ऑनलाइन आवेदन स्वीकार हो
ऑनलाइन सेवाओं का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करवाने व इन सेवाओं को उपयोग में लिए जाने के लिए नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए नागौर जिला कलक्टर पीयूष समारिया समय-समय पर निर्देश जारी किए जा रहे हैं। कलक्टर ने जिले के उपखंड अधिकारियों एवं तहसीलदारों को निर्देशित करते हुए कहा कि दर्ज नामान्तरण समय पर निस्तारित हो तथा नामान्तरण के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकर हो। नागौर एडीएम (प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख) मोहनलाल खटनावलिया नामान्तरण संबंधी कार्य की समय-समय पर मॉनेटरिंग कर रहे हैं, ताकि अनावश्यक पेंडेंसी नहीं रहे एवं जिले की प्रगति प्रदेश में टॉप पर बनी रहे।

आरआई शर्मा का विशेष योगदान
नागौर जिले के राजस्व रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने के कार्य में जिले के संपूर्ण राजस्व स्टाफ ने पिछले तीन सालों में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं, लेकिन कलक्ट्रेट के भू-अभिलेख निरीक्षक कपिल देव शर्मा ने जिला रिसोर्स पर्सन के पद पर कार्य करते हुए डीआईएलआरएमपी के अन्तर्गत राजस्व रिकॉर्ड को ऑनलाइन करवाने में कड़ी मेहनत के साथ अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके चलते शर्मा को गत 26 जनवरी को जिला स्तरीय कार्यक्रम में उप मुख्य सचेतक महेन्द्र चौधरी एवं जिला कलक्टर ने सम्मानित भी किया था।