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डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम में नागौर जिला प्रदेश में टॉप

भू-नक्शा का डिजिटाइजेशन करने में शत प्रतिशत तरमीम कार्य पूर्ण कर जमाबंदियों के साथ राजस्व नक्शों को भी किया ऑनलाइन

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Nagaur tops in state in Digital India Land Record Modernization

Nagaur tops in state in Digital India Land Record Modernization

नागौर. डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के अंतर्गत नागौर जिला पूरे राजस्थान में प्रथम स्थान पर रहा है। इसके तहत नामांतरकरण कार्य प्रगति में सर्वाधिक रिकॉर्ड के साथ नागौर जिला शानदार स्थिति में रहा है।

डीआईएलआरएमपी के अंतर्गत अब तक किए गए समस्त प्रकार के नामांतरकरण कार्यों में जिले में सर्वाधिक 2 लाख 68 हजार 476 नामांतरकरण निर्णित हुए हैं, जबकि 2 लाख, 65 हजार, 411 के साथ जयपुर दूसरे स्थान पर, 2 लाख, 39 हजार 619 के साथ अलवर तीसरे, 2 लाख, 33 हजार, 734 के साथ सीकर चौथे तथा 2 लाख, 20 हजार, 308 के साथ चूरू पांचवें स्थान पर है। वहीं विभाजन (बंटवारा) श्रेणी के नामांतरकरण में 6,168 कुल नामांतरकरण किए गए हैं, स्वत: (ऑटोजेनरेट) नामांतरकरण श्रेणी में 16 हजार 238 नामांतरकरण हुए हैं। साथ ही अपना खाता पोर्टल पर नामांतरकरण के लिए दर्ज ऑनलाइन आवेदनओं के निस्तारण प्रतिशत में 94.90 के साथ नागौर जिला प्रथम स्थान पर है।

डीआईएलआरएमपी में तीन महत्वपूर्ण कार्य
नागौर के अतिरिक्त जिला कलक्टर मोहनलाल खटनावलिया ने बताया कि डीआईएलआरएमपी भारत एवं राजस्थान सरकार का लैंड रिकॉर्ड से संबंधित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसमें पहला कार्य जमाबंदी सेग्रिगेशन का है, जिसमें सेग्रिगेशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से जमाबंदियों में समस्त रिकॉर्ड को आदिनांक तक अपडेट कर प्रत्येक काश्तकार के हिस्से को अंकित किया जाता है व संपूर्ण जमाबंदी को व्यवस्थित रूप से संधारित कर ऑनलाइन करवाया जाता है। दूसरे कार्य के अंतर्गत भू-नक्शा (मैप) का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है, जिसमें शत प्रतिशत तरमीम कार्य पूर्ण कर जमाबंदियों के साथ-साथ राजस्व नक्शों को भी ऑनलाइन किया गया है। तीसरे कार्य के रूप में हर तहसील कार्यालय स्तर पर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किया जाना है, जिसके अंतर्गत समस्त प्रकार के पुराने राजस्व रिकॉर्ड को स्कैन करके ऑनलाइन किया जाएगा।

राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन, किसान घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं रिपोर्ट
नागौर कलक्ट्रेट के रेवेन्यू इन्स्पेक्टर कपिल देव शर्मा ने बताया कि डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के प्रथम फेज के अंतर्गत जिले का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गया है, जिससे आम काश्तकार घर बैठे जमाबंदी, खेतों के नक्शे एवं गिरदावरी नकल ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही तहसील ऑनलाइन अधिसूचित होने से काश्तकारों को विभिन्न प्रकार की राजस्व सेवाएं इंटरनेट के माध्यम से ई-मित्र या अपने घर पर ही उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आमजन को अपनी संपत्ति के नक्शे की नकल ई-साइन जमाबंदी नकल, ई-साइन गिरदावरी नकल, नामांतरकरण के लिए आवेदन जैसी सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। साथ ही पंजीयन कार्यालय से रजिस्ट्री करवाने पर उस रजिस्ट्री का म्यूटेशन भी स्वत: (ऑटोमेटिक) दर्ज होने जैसी सुविधा भी मिल रही हैं, इसके अतिरिक्त बैंक रहन प्रक्रिया भी सरल की गई है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत मोबाइल एप से पटवारी, राजस्व निरीक्षक एवं तहसीलदार गिरदावरी भी ऑनलाइन की जा रही है तथा धरा एप से काश्तकारों को घर बैठे प्रमाणित गिरदावरी, जमाबंदी नकल मिल रही है।

कलक्टर कर रहे मॉनिटरिंग
नामांतरकरण के कार्यों की समय-समय पर जिला कलक्टर पीयूष समारिया की ओर से मोनिटरिंग की जाती है तथा बैठकों में अधिकारियों को इस संबंध में दिशा निर्देश भी दिए जाते हैं, ताकि अनावश्यक पेंडेंसी नहीं हो। साथ ही संबंधित तहसीलदार, भू-अभिलेख निरीक्षक एवं पटवारी की ओर से उक्त कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है, जिससे जिले की प्रगति टॉप पर बनी रहे। एडीएम खटनावलिया ने बताया कि डीआईएलआरएमपी के अंतर्गत जिले में प्रथम फेज का कार्य पूर्ण हो गया है। द्वितीय फेज का कार्य प्रारंभ हो गया है, जिसके तहत जिला एवं तहसील स्तर पर आइकोनिक पॉइंट लगाने का कार्य पूरा कर लिया गया है एवं ग्राम स्तर पर सब आईकॉनिक पॉइंट लगाने का कार्य प्रक्रियाधीन है, जिसके अनुसार डिजिटल सर्वे कर नवीन भू-प्रबंध रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद मौके, जमाबंदी एवं नक्शों में एकरूपता पाई जाएगी।