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घोषणा करके भूल गई सरकार, शोध केन्द्र के लिए बजट की दरकार

- राज्य सरकार ने गत वर्ष की थी नागौर में पंचायतीराज शोध केन्द्र खोलने की घोषणा- एक साल बीतने के बावजूद न बजट दिया और न ही जमीन आवंटित की- जिला प्रशासन ने शोध केन्द्र के लिए 25 बीघा भूमि आवंटित करने का सरकार को भेजा था प्रस्ताव- देश में नागौर से हुई थी पंचायतीराज की शुरुआत

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Panchayati Raj research center in Nagaur

Panchayati Raj research center in Nagaur

नागौर. नागौर में पंचायतीराज शोध केन्द्र विकसित करने को लेकर राज्य सरकार की ओर से करीब 13 महीने पहले की गई घोषणा कागजी बनकर रह गई है। पंचायतीराज विभाग मंत्री ने 15 मार्च 2022 को विधानसभा में घोषणा की कि नागौर में पंचायतीराज शोध केन्द्र विकसित किया जाएगा, लेकिन अब तक बजट ही जारी नहीं किया है। इसके साथ करीब सात महीने पहले जिला प्रशासन ने पंचायतीराज शोध केन्द्र/संस्थान के लिए करीब 25 बीघा (4.85 हैक्टेयर) जमीन आवंटन करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा, लेकिन उस पर भी अब तक स्वीकृति की मुहर नहीं लग पाई है। ऐसे में राज्य सरकार की घोषणा थोथी साबित हो रही है, जबकि पंचायतीराज की शुरुआत देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने नागौर से की तथा उसके बाद कांग्रेस से जुड़ी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी व खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कई यादें नागौर के पंचायतीराज स्मारक से जुड़ी हुई हैं।

गौरतलब है कि भारत में पंचायतीराज व्यवस्था के शुभारम्भ की गवाह रही नागौर की वीर भूमि पर पंचायतीराज शोध केन्द्र विकसित करने की घोषणा करीब 13 महीने पहले की थी। इसके बाद सरकार ने अक्टूबर 2022 में पंचायतीराज शोध केन्द्र/संस्थान विकसित करने के लिए बीकानेर रोड पर 4.85 हैक्टेयर भूमि आवंटन का प्रस्ताव जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को भेजा था, लेकिन दोनों ही कार्य ठंडे बस्ते हैं।

समय पर मिले भूमि व बजट तो हो काम
जिला प्रशासन की ओर से पंचायतीराज विभाग को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार नागौर में शोध केन्द्र/ प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए एक प्रशासनिक प्रशिक्षण सह दक्षता अभिवृद्धि भवन एवं एक प्रशासनिक भवन, हॉस्टल, आवास, प्रशिक्षण हॉल, संग्रहालय भवन, लाइब्रेरी आदि बनाने प्रस्तावित है। इसके लिए अनुमानित पांच करोड़ रुपए की आवश्यकता है।

पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
गौरतलब है कि पंचायतीराज व्यवस्था के 61 वर्ष पूरे होने पर राजस्थान पत्रिका ने दिसम्बर 2020 को समाचार प्रकाशित कर जिले में पंचायतीराज शोध संसथान/केन्द्र की स्थापना करने के इस मुद्दे को मुखर किया था। इसके बाद तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने मुख्य सचिव सहित पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव को बार-बार पत्र लिखे। उधर, कॉलेज व्याख्याता डॉ. प्रेमसिंह बुगासरा, जिला परिषद के सदस्य ओमप्रकाश सेन, गांधी शांति दर्शन समिति के जिला सह संयोजक हीरालाल भाटी ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर एवं स्थानीय स्तर पर ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग रखी। बजट से पहले सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी मुख्यमंत्री एवं पंचायतीराज मंत्री को पत्र लिखे थे। इसके बाद 15 मार्च 2022 को विधानसभा में पंचायतीराज विभाग की चर्चा के दौरान खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल ने आवाज उठाई। जिस पर मंत्री ने घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे
पंचायतीराज शोध केन्द्र के लिए जमीन आवंटन करने व बजट देने के लिए मैंने दो-तीन बार प्रभारी मंत्री से बात की थी, लेकिन उन्होंने केवल आश्वासन ही दिए हैं। अब जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस सम्बन्ध में अवगत कराएंगे, ताकि नागौर में शोध केन्द्र विकसित हो सके।
- हीरालाल भाटी, जिला सह संयोजक, गांधी शांति दर्शन समिति, नागौर

हमारी सरकार बनेगी, तब बनाएंगे
कांग्रेस सरकार केवल थोथी घोषणाएं करती है। पंचायतीराज शोध केन्द्र नागौर में विकसित होने से देशभर के लोग यहां आएंगे और नागौर को जानेंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि कांग्रेस सरकार यह काम नहीं कर पाएगी। कुछ समय बाद जब हमारी सरकार बनेगी, तो इस काम को पूरा करवाएंगे।
- सीआर चौधरी, पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री

केवल घोषणा से नहीं चलेगा काम
गत वर्ष बजट सत्र में मैंने नागौर जिला मुख्यालय पर पंचायतीराज शोध केन्द्र खोलने की मांग की थी, जिस पर पंचायतीराज मंत्री ने घोषणा तो कर दी, लेकिन बजट जारी नहीं किया। इस बार मैंने वापस मुद्दा उठाते हुए 10 करोड़ रुपए की मांग की थी, लेकिन अब तक बजट जारी नहीं किया है। अब एक बार फिर मंत्री से मुलाकात कर बजट जारी कराने की मांग करेंगे।
- नारायण बेनीवाल, विधायक, खींवसर

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