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राजस्थान के सरकारी शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने जारी किया बड़ा फरमान, अब नहीं कर सकेंगे ऐसा काम

Rajasthan Education News: निदेशक की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक शिक्षा सत्र शुरू होते ही सभी सरकारी विषय अध्यापकों को ट्यूशन नहीं पढ़ाने का शपथ पत्र देना होगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब ट्यूशन और कोचिंग सेंटर में नहीं पढ़ा सकेंगे। ना ही कोचिंग सेंटर चला सकेंगे। इस संबंध में हाल ही में शिक्षा विभाग ने फरमान जारी किया है।

शिक्षा निदेशक बीकानेर, सीताराम जाट ने इस संबंध में नए आदेश जारी किए हैं। सरकारी शिक्षकों की की ओर से ट्यूशन और कोचिंग में पढ़ाने के प्रकरण सामने आने के बाद उनकी इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए निदेशक ने 12 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की है।

देना होगा शपथ पत्र

निदेशक की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक शिक्षा सत्र शुरू होते ही सभी सरकारी विषय अध्यापकों को ट्यूशन नहीं पढ़ाने का शपथ पत्र देना होगा। सेवारत शिक्षकों का प्राइवेट कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने और ट्यूशन करने को विभाग ने गलत माना है।

शिक्षक और कार्मिको की ओर से विभाग की स्वीकृति के बिना स्वयं के कोचिंग सेंटर चलाने की शिकायत मिलने पर सभी संस्था प्रधानों को ऐसे शिक्षकों को पाबंद करने के आदेश दिए हैं।

शिकायत मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 तथा राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम-1971 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

निदेशक ने जिला शिक्षा अधिकारियों को माध्यमिक स्कूल के निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं से व्यक्तिगत संपर्क कर वस्तुस्थिति की जानकारी लेने के निर्देश दिए हैं। आदेश में यह उल्लेख है कि शिक्षक एक या दो बच्चों को पढ़ा सकते हैं।

विज्ञान, गणित-अंग्रेजी में ट्यूशन की प्रवृत्ति अधिक

सरकारी स्कूल में अमूमन 10वीं में गणित, विज्ञान अंग्रेजी तथा उच्च माध्यमिक स्कूलों साइंस, कॉमर्स के ऐच्छिक विषयों में ट्यूशन की प्रवृत्ति अधिक रहती है। सामान्य तौर पर इन विषयों के अधिकतर अध्यापक स्कूलों में ट्यूशन प्रवृत्ति को लेकर स्कूलों में एकाग्रचित्त होकर नहीं पढ़ाते, मजबूरन छात्रों को उनके घर ट्यूशन के लिए जाना पड़ता है। इससे रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने पहले भी आदेश जारी किए थे।

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