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नागौर. जिले के सरकारी शिक्षण स्थानों की दीवारों पर अब भारत दर्शन तथा भारत की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विशेषताओं की तथ्यात्मक तथा कथ्यात्मक जानकारियां दर्शाई जाएगी। हालांकि योजना का सफल प्रयोग प्रदेश के जालोर जिले में किया जा चुका है। शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि नागौर जिले में भी यह नवाचार विद्यालयों में लागू किया जाएगा, ताकि बच्चों को देश की भौगोलिक स्थितियों के साथ ही महापुरुषों एवं पर्यटन स्थलों की जानकारी ऐतिहासिक तथ्यों के साथ मिल सके। राजकीय शिक्षण संस्थानों में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। शिक्षा विभाग योजना से जुड़े सभी बिंदुओं पर मंथन करने में जुटा है। अधिकारियों ने बताया कि भारत दर्शन का आशय देश की गौरवमयी उपलब्धियों से है। इसमें महापुरुषों के नाम एवं उनकी कार्यशैली तथा सैद्धांतिक तथ्यों को शामिल किया गया है, ताकि स्कूल में आने वाले बच्चों को न केवल अपने महापुरुषों की जानकारी हो सके, बल्कि वह देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों से भी भली-भांति परिचित हो सके। इस संबंध में जल्द ही जिले के नोडल प्रभारियों की बैठक बुलाकर योजना के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। इससे बच्चों को किताबों से ज्यादा व्यवहारिक रूप से देश की महत्वपूर्ण उपलब्धियों की न केवल जानकारी मिल सकेगी, बल्कि वह इसे सरलता से समझ सकेंगे।
सभी शिक्षण संस्थानों में लागू होगी योजना
यह योजना उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में समान रूप से लागू की जाएगी। विद्यालय का माहौल भारत दर्शन के माध्यम से इस प्रकार तैयार किया जाएगा कि परिसर में प्रवेश करते ही बच्चे को सुखद एहसास के साथ ही देश के बारे में तथ्यात्मक जानकारी मिल सके। इसके लिए विभिन्न रंगों का प्रयोग किया जाएगा।
साप्ताहिक परीक्षा भी होगी
शिक्षण संस्थानों में अब बच्चों की आधारभूत शैक्षिक संरचना को सुदृढ करने के लिए विभाग की ओर से भारत दर्शन के साथ सामान्य ज्ञान के तौर पर साप्ताहिक परीक्षा का आयोजन भी किया जाएगा। हालांकि इसमें बच्चे स्वैच्छिक रूप से शामिल हो सकेंगे। विभाग का प्रयास रहेगा कि इसमें सभी बच्चों को शामिल होने के लिए संस्था प्रधानों व शिक्षकों के माध्यम से प्रेरित किया जाएगा। इससे न केवल उनकी शैक्षिक बुनियाद मजबूत होगी, बल्कि सामान्य ज्ञान के तौर पर भी वह बेहतर ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। बच्चों को चित्रों के माध्यम से भी इसका ज्ञान देने का प्रयास रहेगा। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर प्रोत्साहित व सम्मानित किया जाएगा।
इनका कहना है...
भारत दर्शन के रूप में शिक्षण संस्थानों में नवाचार होने से न केवल शैक्षिक वातावरण बनेगा, बल्कि बच्चों को देश के स्वरूप की जानकारी हो सकेगी।
ब्रह्माराम चौधरी, जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक प्रथम) नागौर
Published on:
16 Jun 2018, 12:01 PM IST
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