
गुड्डी का शव तलाशना हो या अन्य किसी वारदात का सुराग, अब जल्द नागौर पुलिस के पास अपने खोजी कुत्ते होंगे। अब तक ये अपराध होने पर रेंज से मंगाए जाते थे, अब नागौर ही नहीं प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय पर यह व्यवस्था होगी।
संदीप पाण्डेय
नागौर. गुड्डी का शव तलाशना हो या अन्य किसी वारदात का सुराग, अब जल्द नागौर पुलिस के पास अपने खोजी कुत्ते होंगे। अब तक ये अपराध होने पर रेंज से मंगाए जाते थे, अब नागौर ही नहीं प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय पर यह व्यवस्था होगी। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय से जल्द हरी झण्डी मिलने वाली है। जिला पुलिस के पास डॉग स्क्वॉयड की व्यवस्था के तहत दो खोजी कुत्ते होंगे, इनमें एक मादक पदार्थ तस्करों को ढूंढेगा तो दूसरा हत्या/लूट समेत अन्य वारदात का सुराग देकर अपराधी को पकड़वाएगा। डॉग स्क्वॉयड के लिए बैल्जियम शैफर्ड कुत्ते खरीदने का प्रस्ताव है। बढ़ते अपराध/मादक पदार्थ तस्करी के अलावा वीआईपी ड्यूटी के लिए भी इनको बढ़ाने की जरुरत महसूस हो रही थी।
पुलिस आपराधिक वारदातों के खुलासे के लिए डॉग स्क्वॉयड की मदद लेती है। इन डॉग को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है जो घटनास्थल को सूंघता है, इसके बाद उस वारदात को अंजाम देने वाले तक पुलिस को पहुंचने में मदद करता है। काफी समय से राजस्थान में ऐसे डॉग्स की कमी महसूस की जा रही है। अभी तक रेंज स्तर पर ही दो-दो डॉग हैं, ऐसे में वारदात होने के बाद वहीं से ये लाए जा रहे हैं। मजे की बात यह भी है कि इनके ट्रेनर (हैंडलर) भी गिनती के ही हैं। जिला स्तर पर पुलिस के पास ऐसा भी कोई इंतजाम नहीं है।
हाल ही में श्रीबालाजी थाना इलाके में गुड्डी की हत्या हुई, आरोपी अनोपाराम की गिरफ्तारी के बाद अजमेर से डॉग स्क्वॉयड आया। डॉग टाइगर दो दिन रहा भी पर कुछ खास सफलता नहीं मिली। डॉग स्क्वॉयड को सफलता नहीं मिलने का एक कारण था, उसका देरी से पहुंचना। वो इसलिए भी कि घटना स्थल से गंध मिट चुकी थी। अधिकांश वारदात में ऐसा ही होता है, डॉग स्क्वॉयड कई घंटे बाद पहुंच पाते हैं तब तक सारा खेल खत्म हो जाता है। घटना के आठ घंटे के अंदर डॉग स्क्वॉयड को घटनास्थल पर पहुंचा दिया जाए तो सफलता मिलने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है। मादक पदार्थों की तस्करी रोकने को लेकर छापेमारी में भी ये काम आते हैं।
राजस्थान में इस समस्या को लेकर पिछले कुछ समय से मंथन चल रहा है। इस बाबत कई पुलिस अफसरों ने मुश्किलों का हवाला देते हुए जिला स्तर पर डॉग स्क्वॉयड होने की आवश्यकता जताई। इस प्रस्ताव को हरी झण्डी मिलने वाली है। स्नीफर डॉग छुपाकर रखे गए मादक पदार्थ तथा हथियारों का पता लगाते हैं। ट्रैकर घटनास्थल पर मिले कपड़े या कोई अन्य साक्ष्य को सूंघकर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। इनकी मदद से अब तक कितने केस हल हुए हैं, इसका कोई आंकड़ा नहीं है।
काफी कमी और मुश्किल भी
सूत्र बताते हैं कि प्रदेशभर में ऐसे डॉग की काफी कमी है, रेंज पर दो कुत्तों के भरोसे चार-चार जिले हैं, ऐसे में मादक पदार्थ का मामला हो या कोई आपराधिक वारदात, लम्बी दूरी तय कर डॉग को लाया-ले जाया जाता है। गाड़ी का पेट्रोल समेत अन्य खर्च होता है सो अलग। देर-सवेर पहुंचने वाले डॉग को अधिकांश मामलों में कुछ हाथ नहीं लगता क्योंकि तब तक लोगों की भीड़ की वजह से सुराग मिट जाते हैं।
एक साल की ट्रेनिंग
ऐसे डॉग करीब एक साल की ट्रेनिंग के बाद काम पर लगते हैं। इनके ट्रेनिंग/मेडिकल व खान-पान में काफी खर्चा होता है। ये डॉग अक्सर अपने ट्रेनर के ही दिशा-निर्देश को सुन कर काम करते हैं। इनको जब ट्रेनिंग दी जाती है तो ट्रेनर (हैंडलर) को भी साथ रखा जाता है। दूध, मीट, पैटागिरी के अलावा चावल-सब्जी के साथ बिस्कुट इनका भोजन होता है।
इनका कहना
बढ़ते अपराध को देखते हुए इनकी जरुरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। पुलिस मुख्यालय में इसका मंथन हुआ, अब जिला स्तर पर डॉग स्क्वॉयड की व्यवस्था होगी। प्रस्ताव को हरी झण्डी जल्द मिल सकती है।
-रुपिंदर सिंह आईजी, अजमेर रेंज
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इस व्यवस्था से जिला पुलिस को सहयोग मिलेगा। अनावश्यक इंतजार के साथ सबूत/सुराग मिटने की मुश्किल भी दूर होगी।
-राममूर्ति जोशी, एसपी नागौर
Updated on:
20 Feb 2023 09:38 pm
Published on:
20 Feb 2023 09:10 pm
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