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पान मसाला-गुटखा पर प्रतिबंध की घोषणा हवा-हवाई, नागौर सहित पूरे प्रदेश में बिक रहा खुलेआम

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट घोषणा के बाद 2 अक्टूबर को की थी प्रतिबंध की घोषणा

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Pan Masala - Gutkha being sold across the state including Nagaur

Pan Masala - Gutkha being sold across the state including Nagaur

नागौर. प्रदेश में मैग्निशियम कार्बोनेट, निकोटिन, तंबाकू या मिनरल ऑयल युक्त पान मसाला और फ्लेवर्ड सुपारी के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद नागौर सहित पूरे प्रदेश में न केवल धड़ल्ले से बिक्री हो रही है, बल्कि उत्पादन, भंडारण व वितरण भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा का हश्र तो प्लास्टिक पर लगे प्रतिबंध से भी बुरा है। खास बात यह है कि चिकित्सा विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने पिछले साढ़े तीन महीने में पान मसाला व गुटखा के चार नमूने भी लिए हैं, जिनमें से तीन अमानक (सब स्टैण्डर्ड) स्तर के पाए गए। यानी बाजार में जहर खुलेआम बिक रहा है, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में गत वर्ष के बजट भाषण में युवाओं के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए कहा था कि ‘युवाओं में पान मसाला- गुटखा खाने की लत से स्वास्थ्य को हानि होती है। घटिया सामग्री की बिक्री को नियंत्रित कर, चोरी के माल की बिक्री पर सख्ती बरतते हुए इस पर पूरी तरह रोक लगाने की कार्ययोजना बनाई जाएगी।’ इसके करीब तीन माह बादराजस्थान सरकार ने महात्मा गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2019) के अवसर पर राज्य में मैग्निशियम कार्बोनेट, निकोटिन, तंबाकू या मिनरल ऑयल युक्त पान मसाला और फ्लेवर्ड सुपारी के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया।

कैंसर के ज्यादातर मरीज तंबाकू के उपयोगकर्ताकैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि धुआं रहित तंबाकू का सेवन करने वालों को कम उम्र में कैंसर हो जाता है और उनकी मृत्यु दर भी अधिक है। युवा तंबाकू का सेवन विज्ञापन और प्रचार के चक्कर में आकर शुरू करते हैं। ऐसे युवाओं की मृत्यु बहुत कम उम्र में हो जाती है।सरकार को आय से ज्यादा करना पड़ रहा खर्चाआंकड़ों की बात की जाए, तो सरकार तंबाकू से होने वाली बीमारियों के इलाज और पुनर्वास पर 1150 करोड़ रुपए सालाना खर्च कर रही है, जबकि तंबाकू से होने वाली सकल आय लगभग 400 करोड़ रुपए है। एेसे में यह विचारणीय बिन्दू है कि सरकार प्रतिबंध को सख्ती से लागू क्यों नहीं कर रही है।

विद्यालयों के पास ही बिक रहानागौर शहर सहित जिले में हजारों दुकानें हैं, जहां तम्बाकू के उत्पाद बेचे जा रहे हैं। कई जगह तो दुकानें सरकारी एवं निजी विद्यालयों के नजदीक हैं। वहीं कई जगह इन दुकानों पर किशोर भी तम्बाकू उत्पाद खरीदते आसानी से नजर आ जाते हैं। सिगरेट और तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) के प्रावधानों के अनुसार तंबाकू उत्पादों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन प्रतिबंधित है।देश-प्रदेश में खतरनाक हालात77,000 लोग हर साल तंबाकू से मौत का शिकार हो रहे राजस्थान में60 प्रतिशत कैंसर का कारण चबाने युक्त तंबाकू से होता है13.5 लाख भारतीयों की मौत होती है तंबाकू जनित बीमारियों से हर साल10.7 प्रतिशत व्यस्क भारतीय (15 वर्ष और उससे अधिक) धूम्रपान करते हैं21.4 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू का सेवन करते हैं7 करोड़ महिलाएं (15 वर्ष और उससे अधिक उम्र) देश में धुआं रहित तम्बाकू का उपयोग करती हैं।

समय-समय पर करते हैं कार्रवाईपान मसाला-गुटखा पर प्रतिबंध लगने के बाद हमने जिले में चार नमूने लिए हैं, जिसमें से तीन अमानक तथा एक मानक स्तर का पाया गया। जिन दुकानदारों के नमूने अमानक स्तर के पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।- राजेश जांगीड़, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, नागौर