10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

जनता की पीड़ा पर राजनीति भारी, नेताओं का फीता काटना जरूरी

4 min read
Google source verification
Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

राजनीति के चक्कर में अटकी एमसीएच विंग की शिफ्टिंगहादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार?

Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

नागौर. जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) इकाई को पुराना अस्पताल भवन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया राजनीति में उलझ गई है। अस्पताल प्रबंधन ने एमसीएच विंग का 70 फीसदी से अधिक सामान (बेड, उपकरण, ऑपरेशन टेबल आदि) पुराना अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है, लेकिन विंग शिफ्टिंग की प्रक्रिया पर विराम लग गया है, ऐसे में पीछे शेष रहे आधे-अधूरे संसाधनों के कारण मरीजों के साथ डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। पिछले एक-डेढ़ महीने से एमसीएच विंग में न तो बच्चेदानी के ऑपरेशन हो रहे हैं और न ही मरीजों को पूरा उपचार मिल रहा है। ऐसे में मरीज व उनके परिजन अब यह कहने लगे हैं कि ‘नेताओं को फीता काटने की चिंता है, जनता चाहे भाड़ में जाए।’ केवल शिफ्टिंग जैसे काम में फीता काटने की लालसा नहीं होनी चाहिए।

Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

नागौर. जेएसवाई वार्ड में पानी टपकने पर एक महिला मरीज को परिजन बंद पड़े वार्ड में ले गए। यहां पंखा नहीं था तो घर से लाकर लगाया। यहां भी प्लास्टर गिर रहा है।

Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

नागौर एमसीएच विंग के जेएसवाई वार्ड में पूरे बेड नहीं होने से मरीजों को नीचे लेटना पड़ रहा है। साथ ही एक वार्ड में एक तरफ छत से पानी टपक रहा है, जिसके चलते पंखे भी बंद है।

Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

अटक सकती मेडिकल कॉलेज प्रवेश प्रक्रियाराजनीति के चक्कर में जेएलएन अस्पताल की एमसीएच विंग की शिफ्टिंग अटकाने से एक ओर मरीज परेशान हैं, वहीं जिले को बड़ा नुकसान हो सकता है। एमसीएच विंग की शिफ्टिंग के अभाव में एनएमसी का निरीक्षण नहीं हो पाएगा। बिना निरीक्षण के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया की हरी झंडी नहीं मिलेगी।

Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

शहर के पुराने अस्पताल में जेएलएन अस्पताल की एमसीएच विंग को शिफ्ट करने का निर्णय भवन कंडम होने के कारण लिया गया है। शुरू से ही विवादों में रहे एमसीएच विंग के भवन की पांच साल में ही जर्जर हालत होने पर चिकित्सा विभाग ने जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की टीम से जांच करवाई। टीम ने 19 सितम्बर 2023 को नमूने लेकर अक्टूबर में रिपोर्ट दी, जिसमें टीम ने एमसीएच विंग के भवन को पूरी तरह कंडम बताया। रिपोर्ट मिलने के बाद एनएचएम के तत्कालीन एमडी डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने एक दिसम्बर 2023 को आदेश जारी कर भवन खाली करने व एमसीएच विंग को पुराना अस्पताल भवन शिफ्ट करने के निर्देश दिए। सात महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक एमसीएच को शिफ्ट नहीं किया गया है। अब बारिश का मौसम भी शुरू हो चुका है, यदि कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदारी लेगा।

Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

फीता काटने का शौक है तो सेटेलाइट अस्पताल खोलें खुले रूप से सामने नहीं आ रहे अस्पताल के डॉक्टर व नर्सिंग कर्मचारी यह कहने लगे हैं कि नेताओं को फीता काटने का इतना ही शौक है तो पुराना अस्पताल भवन में सेटेलाइट अस्पताल या शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्वीकृति प्रदान करवाएं, जिसकी शहरवासी लम्बे समय से मांग कर रहे हैं। यह तो केवल एमसीएच विंग की शिफ्टिंग है। अभी जेएलएन अस्पताल परिसर में चल रही है, जिसे कुछ समय के लिए पुराना अस्पताल में संचालित किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद अस्पताल परिसर में जैसे ही नया भवन तैयार होगा, इसे वापस वहीं शिफ्ट किया जाएगा।

Politics prevails over people's suffering, it is necessary to cut the ribbon of leaders

पीएमओ को एपीओ करने से डरने लगे डॉक्टरएमसीएच विंग की शिफ्टिंग में जुटे पूर्व पीएमओ डॉ. महेश पंवार को गत माह चिकित्सा विभाग ने एपीओ कर दिया । हालांकि एपीओ आदेश में कारण नहीं बताया गया, लेकिन यही माना जा रहा है कि उन्होंने ‘ऊपर वालों’ की अनुमति लिए बिना आदेश निकालकर शिफ्टिंग की तारीख 19 जून तय कर दी। हालांकि बाद में उसे निरस्त कर दिया, लेकिन पीएमओ पर गाज गिर गई। उसके बाद अस्पताल का कोई भी डॉक्टर शिफ्टिंग को लेकर बयान देने से बच रहा है। उनका कहना है कि ‘धणी रो धणी कुण।’