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नागौर

खींवसर बेल्ट में अमूल्य लाइम स्टोन, सीमेंट कम्पनियों की बजाय किसानों को मिले छोटी लीजें

सीमेंट उद्योग में जा रहा केमिकल ग्रेड का लाइम स्टोन, जबकि सीमेन्ट के लिए चाहिए 60 प्रतिशत वाला लाइम स्टोन
– खींवसर, गोटन के साथ जोधपुर व पाली के कुछ क्षेत्रों में निकल रहा 95-96 प्रतिशत वाला केमिकल ग्रेड लाइम स्टोन

नागौरJun 24, 2024 / 11:17 am

shyam choudhary

lime stone khan
नागौर. भारत में उपलब्ध लाइम स्टोन का लगभग 95 प्रतिशत भाग सीमेन्ट ग्रेड लाइम स्टोन का है एवं देश के अधिकांश राज्यों में यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। जिससे लगभग सभी प्रदेशों में सीमेन्ट का उत्पादन हो रहा है, लेकिन देश में उपलब्ध चूना पत्थर का मात्र लगभग एक प्रतिशत भाग ही उच्च गुणवत्ता वाला ‘केमिकल ग्रेड लाइम स्टोन’ है। जिसका 95 प्रतिशत सिर्फ नागौर, जोधपुर एवं पाली जिले में ही उपलब्ध है, चूंकि केमिकल ग्रेड लाइम स्टोन की उपलब्धता इसी क्षेत्र में अधिक होने के कारण सम्पूर्ण मारत में उच्च गुणवत्ता वाले लाइम की औद्योगिक मांग की आपूर्ति भी इसी क्षेत्र से की जा रही है। इसके बावजूद खान विभाग ने गत महीनों इन क्षेत्रों में जो खनन के ब्लॉक बनाकर नीलामी की, वो इतने बड़े (10-10 किलोमीटर के) बनाए कि सीमेंट कम्पनियों के अलावा कोई लेने की हिम्मत भी नहीं कर सकता।
इसलिए यहां के किसानों एवं छोटे उद्यमियों का कहना है कि नागौर व जोधपुर जिले में सीमेन्ट उद्योगों के लिए आरक्षित चूने की खानों को अनारक्षित किया जाए, क्योंकि यहां केवल केमिकल ग्रेड चूना पत्थर उपलब्ध है। चूना भट्टा उद्योग सूक्ष्म, लघु व मध्यम आकार के होने के कारण इन खानों को छोटे 5-10 हेक्टेयर आकार में परिवर्तित कर अप्रधान खनिज (माइनर मिनरल) के तहत आवंटित किया जाए।
किसानों की जमीन, किसानों को ही मिले लीज
इन क्षेत्रों में विशेषकर नागौर जिले में जो लाइम स्टोन उपलब्ध है, उसका अधिकांश भाग किसानों की पट्टाधारक भूमि में उपलब्ध है। खनिज का दोहन उनकी सहमति के बिना कर पाना सम्भव नहीं है। पिछले लम्बे समय से नागौर जिले के खींवसर तहसील में दस-दस किलोमीटर के पांच-छह बडे-बड़े ब्लॉक बनाकर उन्हें सीमेंन्ट उद्योग के लिए रिजर्व कर दिया था, उन ब्लॉक्स के लिए कई पार्टियों को प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस (पूर्वेक्षण लाइसेंस) का आवंटन किया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण वहां पर कोई कार्य नहीं हो पाया। ऐसे में सरकार को चाहिए कि काश्तकारों को छोटी माइंस की लीज दी जाए और केमिकल ग्रेड का जो लाइम स्टोन है, उसको सीमेंट उद्योगों को देने की बजाए उन जरूरी उद्योगों को सप्लाई किया जाए, ताकि इसकी आवश्यकता है। इससे किसान भी भूमिहीन नहीं होंगे और देश को केमिकल ग्रेेड के लाइम स्टोन का आयात भी नहीं करना पड़ेगा।
रोजगार का प्रमुख स्रोत
उच्च गुणवत्ता वाले चूना पत्थर पर आधारित इन क्षेत्रों में लगभग 500 चूना भट्टा एवं हाइड्रेड लाइम के उद्योग कार्यरत हैं, जो कि सभी सूक्ष्म, लघु व मध्यम (एमएसएमई) की श्रेणी में आते हैं। ये एक ग्रामीण उद्योग होने के कारण इन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का प्रमुख स्त्रोत बन चुका है। इन उद्योगों में लगभग पचास हजार से एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से एवं लगभग तीन लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है।
नीति आयोग की बैठकों में रख चुके मांग
ऑल डणिडया लाडम मेन्गुफेक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मेघराज लोहिया ने बताया कि उन्होंने केमिकल ग्रेड के लाइन स्टोन को माइनर मिनरल में क्लासीफाइ करने के लिए नीति आयोग की बैठकों में कई बार मांग रखी है। 19 दिसम्बर 2018 को दिल्ली में लाइमस्टोन की पॉलिसी को लेकर आयोजित नीति आयोग की बैठक में उनकी संस्था ने अपना पक्ष रखा था। हाल ही में 19 अप्रेल 2024 को नीति आयोग ने ‘लाइम स्टोन नीति’ के सम्बन्ध में एक बैठक आयोजित की, जिसमें उनकी एसोसिएशन ने भाग लेकर दुबारा यह मांग रखी। साथ ही सभी प्रकार के चूना पत्थर को प्रधान मिनरल में आरक्षित करने व मात्र दो श्रेणी सीमेन्ट ग्रेड एवं स्टील ग्रेड में वर्गीकृत करने से उत्पन्न समस्याओं का समाधान करने के लिए इस नीति का वापस आकंलन करने के लिए कहा।

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