
Notification of PM Crop Insurance Scheme for Kharif
नागौर. हर बार की तरह इस बार भी एक और नई बीमा कम्पनी को किसानों की कमाई के साथ सरकारी धन लुटाने की तैयारी हो गई है। किसानों का प्रीमियम कम्पनी के खाते में जमा हो चुका है, जबकि केन्द्र एवं राज्य सरकार के हिस्से की मोटी रकम जमा कराने की तैयारी चल रही है। जयपुर में बैठे कृषि विभाग के उन उच्चाधिकारियों ने एयर कंडीशनर कमरों में बैठकर खरीफ फसलों की बीमित राशि तय कर दी, जिन्हें यह भी पता नहीं कि केन्द्र सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार ने 6975 रुपए प्रति क्विंटल तथा बाजरा की एमएसपी 1950 रुपए तय की है। जानकारी के अभाव में अधिकारियों ने प्रति हैक्टेयर बाजरा की बीमित राशि जहां 28 हजार 750 रुपए तय की है, वहीं मूंग की 26 हजार रुपए ही तय की है, ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों के भाग्य का फैसला करने वाले अधिकारी कौनसे मद में मस्त हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान सरकार का कृषि विभाग रबी व खरीफ फसलों का बीमा करने के लिए हर सीजन से पूर्व बीमा कम्पनियों के साथ एमओयू करने के बाद अधिसूचना जारी करती है, जिसमें बड़ी-बड़ी शर्तें शामिल की जाती हैं, लेकिन उनकी पालना न तो बीमा कम्पनी करती है और न ही विभागीय अधिकारी उन शर्तों की पालना को लेकर कभी गंभीर नजर आते हैं। यदि अधिकारी गंभीर होते तो अधिसूचना के अनुसार जुलाई व अगस्त में होने वाली कार्यशाला व बैठकें समय पर होती और किसानों को भी समय-समय पर सूचना दी जाती।
यह अनाड़ीपन का सबूत
खरीफ 2018 की फसलों के लिए तय की गई बीमित राशि एवं प्रीमियम राशि का चार्ट देखने के बाद सामान्य व्यक्ति यह अंदाजा लगा सकता है कि दरें तय करने में गड़बड़ी की गई है। नागौर जिले की बात करें तो सरकार ने बाजरा, कपास, लोबिया, मूंगफली, ग्वार, ज्वार, मूंग, मोठ तथा तिल को शामिल किया गया है। इन फसलों में उत्पादन की दृष्टि से देखें तो एक हैक्टेयर में सबसे अधिक कपास होती है और प्रति क्विंटल भावों में मूंग सबसे तेज है। सरकार ने बाजरा का एमएसपी जहां 1950 तय किया है, वहीं मूंग का एमएसपी 6975 रुपए तय किया गया है। इसी प्रकार ग्वार का बाजार भाव जहां 3000 से 4000 के बीच रहने के बावजूद बीमित राशि मूंग से एक हजार ज्यादा 27 हजार रुपए तय की है। यही स्थिति मूंगफली की है, मंूगफली की एमएसपी जहां 4890 रुपए तय की गई है, वहीं बीमित राशि 48 हजार 500 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई है। इसी प्रकार ज्वार, मोठ आदि की बीमित राशि भी मनमर्जी से तय की गई है, जो अधिकारियों की नीयत पर सवालिया निशान लगा रही है।
हर बार अलग कम्पनी
जब से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू हुई है, तब से हर सीजन में नागौर जिले में अलग-अलग बीमा कम्पनियां फसलों का बीमा कर रही हैं। इस बार टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड ने जिले के किसानों का फसल बीमा किया है। ऐसा लग रहा है सरकार बारी-बारी बीमा कम्पनियों को किसानों की कमाई के साथ सरकारी धन लुटा रही है। एक बार प्रीमियम के अरबों रुपए वसूलने के बाद कम्पनी बदली जा रही है, ताकि किसान अगले वर्ष शिकायत करना चाहे भी तो कर नहीं सके।
न बैठक करते, न सूचना देते
फसल बीमा कम्पनियों ने प्रदेश में लूट मचा रखी है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जब लागू हुई, तब ऐसा लगा कि किसानों को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन जब यह योजना धरातल पर आई तो पता चला कि यह तो पुरानी योजनाओं से भी ज्यादा लूटने वाली है। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत होने से कम्पनी किसानों को प्रीमियम का आधा भी क्लेम भी नहीं देती। खरीफ की अधिसूचना जारी हुए पौने दो महीने हो गए, लेकिन कम्पनी न तो कहीं बैठक की और न ही प्रचार-प्रसार किया। यदि ऐसे ही चलता रहा तो हम न्यायालय की शरण लेंगे।
- नारायण बेनीवाल, अध्यक्ष, को-ऑपरेटिव सोसायटी, खींवसर
Published on:
22 Aug 2018 11:01 am
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