
नागौर. कोरोना महामारी के कारण दो साल तक बाजार में रही मंदी के बाद इस बार ईद व शादियों का सीजन एक साथ होने से बाजार में काफी रौनक देखी जा रही है। समय के साथ आ रहे परिवर्तन का असर कपड़ा बाजार में भी देखने को मिल रहा है। आमतौर पर जो लोग शादियों में कोट-पेंट या सामान्य पेंट-शर्ट पहनते थे, उनकी जगह अब पठानी सूट के साथ पंजाबी व हरियाणवी कुर्ता पजामा ज्यादा पसंद किया जा रहा है। खासकर युवा अपने लिए शादी समारोह एवं ईद के लिए कुर्ता-पजामा तैयार करवा रहे हैं।
टेलरिंग का काम करने वाले दुकानदारों ने बताया कि ईद के लिए ज्यादातर लोग पठानी सूट तैयार करवा रहे हैं, जिसमें कुर्ता व सलवार होती है। दरअसल, सलवार नमाज पढऩे के लिए आरामदायक होती तथा मुस्लिम समाज में 90 प्रतिशत इसी को पहनते हैं। इसी प्रकार मुस्लिम समाज के साथ हिन्दू समाज में भी युवा शादियों के लिए पंजाबी कुर्ता व पजामा तैयार करवाते हैं, जिसमें पजामा पेंटनुमा है। वहीं हरियाणवी कुर्ता पजामा भी काफी पसंद किया जा रहा है, जिसमें कुर्ता घुटने से नीचे तक रहता है तथा चाइनीज कोलर होती है। इसमें पजामा एंकल वाला (टखना दिखता है) होता है।
रेडिमेड की बजाए सिलवाने पर ज्यादा जोर
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से कपड़े सिलवाने की बजाए रेडिमेड खरीदकर पहने जा रहे हैं, लेकिन कुर्ता-पजामा रेडिमेड खरीदने के बजाए सिलवाकर पहनना ज्यादा पसंद किया जा रहा है। हालांकि युवा इंटरनेट की फोटो दिखाकर टेलर को वैसा का वैसा कुर्ता -पजामा तैयार करने की डिमांड जरूर करते हैं।
समय के साथ किया बदलाव
तीन पीढिय़ों से टेलरिंग का काम करने वाले तबरेज खान ने बताया कि रेडिमेड कपड़ों का बाजार आने के बाद कई टेलर ने अपना काम भले ही बंद कर दिया, लेकिन उनके काम पर आज भी कोई असर नहीं है। इसकी वजह पूछने पर खान ने बताया कि उनका परिवार वर्ष 1960 से टेलरिंग का काम कर रहा है। आज भी उनके पास 10 कारीगर काम कर रहे हैं, सीजन को देखते हुए उन्होंने यूपी से भी कारीगर बुलाए हैं। रोजाना 18 घंटे काम किया जा रहा है। उन्होंने समय और फैशन के साथ बदलाव किया। लोगों को कपड़ों की सिलाई में रेडिमेड वाला लुक पसंद आने लगा तो इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटराइज्ड जूकी मशीनें मंगवाई। जिनकी 450 स्पीड है, जिससे काम की गति तो बढ़ी ही, साथ ही सफाई भी ज्यादा रहती है।
Published on:
17 Apr 2022 08:49 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
