2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

VIDEO: राजस्थान की इस चैम्पियन बेटी की कहानी सुनकर हर किसी को होगा फख्र, ज़रूर करेंगे ज़ज़्बे को सलाम

मूक-बधिर सुमन ने शतरंज में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मैडल जीतकर किया देश का नाम रोशन

3 min read
Google source verification
suman bhambu

तरनाऊ, नागौर।

बदनसीबी ने उसे जन्म के साथ ही घेर लिया। वह जन्म से ही बोल और सुन नहीं सकती। इस सबके बावजूद भी उसका तेज दिमाग हल्ला बोल रहा है। जब वो शतरंज की चाल चलती है तो अच्छे-अच्छे खिलाड़ी माथा पकड़कर रह जाते हैं। शह और मात के खेल में महारत हासिल करने वाली इस बेटी के हुनर कोदेखकर लोग दंग रह जाते हैं। इससे भी बड़ी बात तो ये है कि जन्म से ही मूक बधिर होने के बावजूद उसने कभी इसे अभिशाप नहीं समझा। बल्कि अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर लगातार प्रयास करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए शतरंज खेल गोल्ड मैडल लाकर देश का नाम रोशन किया।

ये कोई किताबी कहानी नहीं बल्कि नागौर जिले की जायल पंचायत समिति की ढेहरी ग्राम पंचायत की शतरंज खिलाड़ी सुमन भांभू द्वारा विषमताओं पर सफलता हासिल करने की हकीकत है। इस सबके बावजूद बेटी सुनम ने कभी किसी को भी अपनी विकलांगता का अहसास तक नहीं होने दिया।

पिता ने सुनाई बेटी की कहनी
जायल तहसील की ढेहरी ग्राम पंचायत में जन्मी सुमन भाम्बू के पिता प्रभुराम बताते हैं कि बेटी के जन्म को लेकर परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन जब यह पता चला कि वो मूक बाधिर है। तो एकबारगी सब सहम गए। समाज में बेटी को लेकर लोगों की विभिन्न तरह की सोच होती है। उसी को लेकर परिवार वालों को यह डर सताने लगा कि बेटी मूक बधिर है तो इसका जीवन कैसा होगा।

सुमन के कुछ बड़े हो जाने पर पिता ने उसको अजमेर की मूक बधिर स्कूल में प्रवेश करवा दिया। जहां पर उसने आठवीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान अजमेर की एक संस्थान से उसे दसवीं की पढ़ाई करवाई लेकिन संस्थान ने फर्जी डिग्री थमा दी। इसके बाद सुमन को इंदौर से आगे की पढ़ाई करवाई। अपने बुलंद हौसलों के चलते उसने बीकॉम पास कर ली है।

सहयोग के अभाव में कहीं दब न जाए प्रतिभा
सुमन के पिता प्रभुराम खेती कर घर का खर्च चला रहे हैं। जन्म से अब तक सुमन की पढ़ाई से लेकर शतरंज के खेल में भाग लेने तक का पूरा खर्च उसके पिता ने वहन किया है। थोड़ी सी जमीन में तीन बेटियों व एक बेटे के पिता के कंधे अब आर्थिक तंगी से झुकने लगे हैं।

वहीं दूसरी ओर देश के लिये स्वर्ण पदक, कांस्य पदक जीत देश का मान बढ़ाने वाली बेटी सुमन को आज तक सरकार से किसी तरह का सहयोग नहीं मिला है। यह खिलाड़ी बोल तो नहीं सकती है लेकिन फिर भी पिता की मजबूरी व आर्थिक तंगी के चलते उसने पत्रिका को पत्र लिखकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का कहते हुए सरकार से सहयोग की मांग की है।

उसने बताया है कि यदि समय रहते उसके बुलंद हौसलों को सरकार या निजी स्तर पर आर्थिक सहयोग नहीं मिला तो ऐसा न हो जाए कि उसकी सारी मेहनत पर आर्थिक तंगी का ग्रहण लग जाए। इन प्रतियोगिताओं में बढ़ाया देश का मान सुमन ने 2010 में आईसीएससी ओलंपिक लेडिज चैम्पियनशिप, यूरोप पुर्तगाल में पांचवा स्थान प्राप्त किया।

2011 में एशियन टीम डीफ चेस चैम्पियनशिप फोर लेडिज ताशकन्द उजेकिस्तान में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। 2015 एशियन ओपन डीप चेस ब्लिज चैम्पियनशिप उल्लानबातर मंगोलिया में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक हासिल किया। इन उपलब्धियों के लिए बेटी सुमन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज पाटिल सहित कई देशों की नामी हस्तियों से सम्मानित की जा चुकी है। इसी के चलते बेटी सुमन अब 27 से 31 दिसम्बर 2017 तक जबलपुर में होने वाली नेशनल प्रतियोगिता में भाग लेगी।

सहयोग के लिए प्रयास करूंगी
सुमन एक प्रतिभावान अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी है। लेकिन सरकार की उदाशीनता के चलते उसे किसी तरह का सहयोग नहीं मिल सका है। देश का नाम रोशन करने वाली इस बेटी को उसका हक मिलना चाहिए। साथ ही में अपने स्तर पर खिलाड़ी को आर्थिक सहायता दिलाने का पूरा प्रयास करूंगी।-सरिता राड़, सरपंच, ढेहरी

Story Loader