
लाडनूं. लाडनूं निवासी रामेश्वर जाट अपनी ओर से पकड़े गए सांप को दिखाते हुए।
लाडनूं. सांप का नाम सुनते ही हर किसी को भय लगने लगता है, लेकिन लाडनूूं में एक ऐसा शख्स भी है जो न सिर्फ सांपों को पकड़ता है बल्कि उनको जगंल में सुरक्षित स्थानों पर ले जाकर छोड़ भी रहा है। ऐसा कर वह अब तक हजारों सांपों की जिंदगी बचा चुका है, लोगों को भी इस डर से मुक्ति दिला रहा है। चाहे दिन हो या रात सांप निकलने की सूचना पर लाडनूं के रामेश्वर जाट तुरंत दौड़ पड़ते हैं। वे सांप पकडऩे के बाद ही दम लेते। बतौर रामेश्वर जाट उन्हें सांप पकडऩे की प्रेरणा अपने छोटे भाई जेठाराम से मिली। एक बार जेठाराम घर पर नहीं थे तब किसी के घर पर सांप निकल आया। हालांकि एक बार थोड़ा भय लगा, लेकिन बाद में सांप को किसी तरह से पकड़ लिया। तब से उन्हें जब भी सूचना मिलती है वे सांप पकडऩे के लिए रवाना हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि बीमार व घायल पशु पक्षियों की सेवा करने से उन्हें खुशी मिलती है। उनका मानना है कि पशु पक्षियों में भी जीवन होता है। इसलिए हर इंसान को बीमार व घायल गोवंश सहित अन्य पशु पक्षियों की सेवा में अपना योगदान देना चाहिए। रामेश्वर जाट का निस्वार्थ भाव से पशु पक्षियों के प्रति प्रेम देखकर उनके इस कार्य की लाडनूं में हर कोई सराहना करता है। रामेश्वर जाट गोपुत्र सेना लाडनूं के अध्यक्ष भी है। इसलिए वे कार्यकर्ताओं के साथ अनाथ गोवंश की सेवा में भी अपना योगदान देते हैं। वहीं वे अन्य सामाजिक कार्यों में सहयोग करने के लिए भी हमेशा आगे रहते हैं।
अब तक पकड़ चुके 10 हजार सांप
रामेश्वर जाट के अनुसार अब तक वह करीब 10 हजार सांप पकड़ चुका है। लाडनूं के अलावा वह डीडवाना, सुजानगढ़, जसवंतगढ़ सहित 50 किमी के दायरे में सांप पकडऩे के लिए जाते हैं। वे साढ़े छह फीट तक की लम्बाई का सांप पकड़ चुके हैं।
हो चुके हैं सम्मानित
घायल पशु-पक्षियों की सेवा के लिए वे हर समय तैयार रहते हैं। गत दिनों गांव झेकरिया में राष्ट्रीय पक्षी मोरों की गर्मीसे हो रही मौत की जानकारी मिलने पर वे गांव पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग से मोरों के लिए ग्लूकोजयुक्त पानी की व्यवस्था की। पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम देखकर उनका उपखण्ड स्तरीय कार्यक्रम में सम्मान भी किया जा चुका है। सामाजिक संस्थाएं भी उनका सम्मान कर चुकी है।
गौरेया चिडिय़ा को बचाने के लिए शुरू की मुहिम
रामेश्वर जाट ने एक संस्था के सहयोग से गौरेया चिडिय़ा को बढ़ावा देने के लिए करीब एक माह पूर्व मुहिम शुरू की थी। इसके तहत उन्होंने कार्यकर्ताओं के सहयोग से सैकड़ों की तादाद में विशेष तरह के घोसले वितरित किए थे। कई जगह पर घोसले लगाए भी थे। जहां पर भी ये घोसले लगाए गए उनमें अब गौरेया चिडिय़ा की चहचहाहट सुनने को मिल रही है।

Published on:
27 Jun 2018 05:49 pm
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