
गांव सहित आस-पास की ढाणियों से भी लोग कथा सुनने के लिए पहुंचे। कथावाचक नापासर के पंडित राजकुमार तिवाड़ी ने कथा के पहले दिन रामकथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि रामकथा सुनने से मनुष्य के विघ्न दूर होते हैं। रामकथा इस कलयुग में क्लेश का हरण करती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है। इसलिए व्यक्ति को कुछ समय भगवान की भक्ति के लिए भी निकालना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि सत्संग से विवेक की प्राप्ति होती है तथा दुख दूर होते हैं। पंडित राजकुमार तिवाड़ी ने कथा में गुरु महिमा समेत अन्य प्रसंगों की कथा सुनाते हुए कहा कि घर में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए। ठाकुरजी को तुलसी प्रिय है। जो ठाकुरजी को तुलसी अर्पित करता है वह उनकी कृपा का पात्र बनता है। कथा में मुख्य यजमान मोहनाराम भामू थे। इस दौरान गुमानाराम धाकड़, सागर राम प्रजापत, बजरंग सिंह जोधा, सरपंच रामदेव भारी, रामनिवास ढाका, किशनाराम जानू समेत गांव के कई गणमान्य लोग मौजूद थे। आयोजक रतनाराम पटेसर ने बताया कि कथा का समय सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक है। 19 मई दोपहर सवा 12 बजे मंदिर में ठाकुरजी की मूर्तिस्थापना की जाएगी। इससे पहले सुबह 11 बजे से हवन होगा। कार्यक्रम को लेकर मंदिर को रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से रामकथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य कमाने का भी आह्वान किया है।
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