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राजस्थान पत्रिका के इस अनुठे प्रयास को सराहा लोगों ने..

पत्रिका के ‘स्वर-साधना’ में दी कई कलाकारों ने प्रस्तुति

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Rendition of hymns by singer artists

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नागौर. राजस्थान पत्रिका व भामाशाह किरोड़ीमल कड़ेल के संयुक्त तत्वावधान में बालसमंद स्थित गीतादेवी कड़ेल भवन में रविवार को ‘स्वर साधना’ कार्यक्रम में स्थानीय फ नकारों ने एक से बढक़र एक प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। निर्धारित समय पर स्थानीय गायकों ने स्वरों और ताल की जुगलबंदी शुरू की। एक मंच पर बिखरे रंगों का लुत्फ लेने श्रोताओं और फ नकार पहुंचे। पत्रिका की ओर से स्थानीय कलाकारों को एक ही मंच पर लाने और पहचान देने के इस अनूठे प्रयास को लोगों ने सराहा। पत्रिका के नागौर संस्करण के सम्पादकीय प्रभारी रुद्रेश शर्मा व भामाशाह कड़ेल ने कलाकारों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में गोविंद कड़ेल, विशाल, कुशाल, हेमंत, अभिषेक कड़ेल ने सहयोग किया। इस मौके पर इंच्छाराम कंसारा, कुंवरकांत झा, बसंत जोशी, महेश, कमल अग्रवाल, भागचंद, प्रीतम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

स्वर साधनामें बरसी मिठास
स्वर साधना में रविवार को नरेन्द्र जोशी ‘प्रेमी’ की गज़ल ‘किस्मत बिगड़ी दुनिया बदली, फि र कौन किसी का होता है’ ने श्रोताओं के दिल को छू लिया। इसके बाद प्रेमी ने मीरा के भक्तिपद ‘ओ रसिया, मैं तो शरण तिहारी’ सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कैलाश गौड़ ने ‘सांवरे को मन में बसा के देखो’, ‘मन लागो मेरो यार फ कीरी में’ सुनाकर भक्तिभाव से ओतप्रोत कर दिया। गौड़ ने श्रोताओं की मांग पर ‘केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ सुनाया। युवा गायक लक्ष्मीनारायण सोनी ‘अप्पु’ ने ‘अगर मुझसे मुहब्बत है, मुझे सब अपने गम दे दो’ जैसे नगमें सुनाकर दाद बटोरी। कार्यक्रम में एल.के. झा, कैलाश माकड़, नरेन्द्र पारीक, गणेश त्रिवेदी, गोविंद ओझा, नेमीचंद राणावत, जंवरीलाल भट्ट, विनय वैष्णव ने प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम की शुुरूआत युवा गज़ल गायक देवेन्द्र त्रिवेदी ने गणेश वंदना से की। त्रिवेदी ने इसके बाद ‘यह दिल ये पागल दिल मेरा’, ‘हंगामा है क्यूं बरपा थोड़ी सी जो’ व अन्य कई गज़लें सुनाई। इस मौके तबले पर संगीत शिक्षक व गायक एल.के. झा तथा अजय व्यास ने संगत की।