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प्रदेश की ग्राम पंचायतों में वर्षों से नहीं हुआ आवासीय भूमि का विस्तार

गांवों की आबादी बढऩे से ग्रामीणों ने मगरा, अंगोर व गोचर भूमि पर बनाए आवास, कई बार कार्रवाई की चपेट में आ जाते हैं लोगों के मकान, गांव की राजनीति के चलते झेलना पड़ता है नुकसान, ग्रामीण लम्बे समय से कर रहे हैं आबादी विस्तार की मांग पर सरकारें नहीं दे रही ध्यान
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नागौर

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Shyam Lal Choudhary

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Updated: 9 Sep 2025, 10:24 AM IST

Bhajan Lal government

CM Bhajan Lal Sharma

नागौर. शहरीकरण के इस दौर में सरकार की ओर से शहरों का आबादी क्षेत्र विस्तार तो समय-समय पर कर दिया गया, लेकिन पिछले कई वर्षों से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों का आबादी क्षेत्र विस्तार नहीं होने से ग्रामीण आबादी के सामने वैध आवास निर्माण की गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि एक विधायक की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी विस्तार को लेकर विधानसभा में लगाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने आवश्यकतानुसार/ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव अनुसार गुणावगुण के आधार पर आबादी विस्तार की बात कही है, लेकिन यह एक कागजी जवाब मात्र है, धरातल पर स्थिति इसके विपरित है। जनसंख्या बढऩे पर सरकार ने पिछले पांच साल में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन तो दो बार कर दिया है, लेकिन आबादी विस्तार नहीं किया है, इसके चलते जिन लोगों ने सरकारी जमीन पर मकान बनाए हैं, उन्हें कई बार स्थानीय राजनीति का शिकार होना पड़ता है। कई बार सरपंच सहित पंचायतीराज के जनप्रतिनिधि अतिक्रमण हटाने के नाम पर विरोधी पक्ष के लोगों के पक्के निर्माण तोडऩे की कार्रवाई करते हैं।

नागौर ही नहीं प्रदेश के लगभग सभी जिलों में पिछले कई सालों से आबादी क्षेत्र का विस्तार जनसंख्या के अनुपात में नहीं हो पाया है, जबकि शहरी क्षेत्र में आबादी भूमि व आवासीय भूमि का विस्तार कई गुणा हो चुका है। साथ ही नित नए सर्कुलर व टाउनशिप योजना व शहरी मास्टर प्लान के नाम पर शहरी क्षेत्रों में आबादी विस्तार बदस्तूर जारी है। गांवों में आबादी विस्तार नहीं होने व लगातार जनसंख्या बढऩे से ग्रामीणों ने मगरा, अंगोर व गोचर भूमि पर आवास बनाए हैं, जिसके चलते ग्रामीणों पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के आरोप भी लग रहे हैं तथा नित रोज कोर्ट कचहरी के आदेश व बेदखली की घटनाएं सामने आ रही हैं।

पुराने प्रतिबंधित नियम प्रचन में

प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र में आबादी भूमि अथवा लाल डोरा विस्तार के लिए सरकार के स्तर पर कोई ठोस कार्य योजना बनाने की बजाए पुराने प्रतिबंधित नियम ही प्रचलन में हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में दशकों पूर्व निर्धारित आबादी क्षेत्र का जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में विस्तार नहीं किया गया है। जिससे प्रदेश के ग्रामीण परिवेश के लाखों लोग विभिन्न सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।

सादुलपुर विधायक ने सरकार को लिखा पत्र

सादुलपुर विधायक मनोज न्यांगली ने चार दिन राजस्व विभाग मंत्री को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में दशकों से लंबित पड़े आबादी क्षेत्र विस्तार के संबंध में ग्रामीण जनगणना के अनुपात में आबादी विस्तार की ठोस व तार्किक योजना बनाई जाए तथा ग्रामीण जनता को सम्मान के साथ निवास स्थान बनाकर रहने का कानूनी हक प्रदान किया जाए। विधायक न्यांगली ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में आबादी क्षेत्र का विस्तार जनसंख्या के अनुपात में नहीं हो पाया है, जबकि शहरी क्षेत्र में आबादी भूमि व आवासीय भूमि का विस्तार कई गुणा हो चुका है।

सरकार का जवाब

विधानसभा में खंडेला विधायक सुभाष मील की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों में आवश्यकतानुसार/ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव अनुसार गुणावगुण के आधार पर आबादी के लिए भूमि का आवंटन किया जाता है। ग्राम पंचायत की आबादी भूमि में बसे लोगों को सरकार समय-समय पर नियमानुसार पट्टे भी जारी कर रही है।

शिविरों में बनाएंगे प्रस्ताव

गांवों में आबादी विस्तार को लेकर प्रस्ताव आने पर उसका परीक्षण करवाया जाता है, यदि प्रस्ताव जेनुइन होता है तो गांव की जनसंख्या व आबादी को अनुपात देखकर आबादी विस्तार किया जाता है। जिन गांवों में लम्बे समय से आबादी विस्तार नहीं हुआ और आवश्यकता है तो आगामी 15 सितम्बर से गांवों में लगने वाले शिविरों में आबादी विस्तार के प्रस्ताव तैयार करवाएंगे।

- अरुण कुमार पुरोहित, जिला कलक्टर, नागौर