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राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन पर किसानों को नहीं मिल रही ऑनलाइन गिरदावरी

प्रदेश के लगभग सभी जिलों में गिरदावरी के अभाव में किसान हो रहे परेशान- तीन साल का राजस्व रिकॉर्ड प्राइवेट कम्पनी ने किया गायब

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 गिरदावरी के अभाव में किसान हो रहे परेशान

गिरदावरी के अभाव में किसान हो रहे परेशान

किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार की ओर से राजस्व रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने के लिए उठाया गया कदम सरकार के ही गले की फांस बन गया है। साथ ही किसानों के लिए परेशानी भरा होने के साथ आर्थिक रूप से चूना भी लगा रहा है। अब न तो किसानों को ऑनलाइन गिरदावरी नकल मिल रही है और न ही ऑफलाइन। चिंता का विषय यह भी है कि विक्रम संवत 2077, 2078 व 2079 की खरीफ व रबी का राजस्व रिकॉर्ड प्राइवेट कम्पनी ने गायब कर दिया है, इसलिए किसानों को पुराना रिकॉर्ड मिलना तो दूर राजस्व कर्मचारियों के पास भी तीनों सालों का रिकॉर्ड नहीं है, इसके बावजूद सेटलमेंट कार्यालय के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
ऑनलाइन जिंसवार गिरदावरी नकल जनरेट नहीं होने पर किसानों व पटवार संघ ने कलक्टर से शिकायत की, जिस पर नागौर जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने अक्टूबर माह में सेटलमेंट कार्यालय जयपुर के आयुक्त को पत्र लिखा। कलक्टर ने पत्र में बताया कि पटवारियों ने गिरदावरी का कार्य पूर्ण कर लिया है, लेकिन राज खसरा गिरदावरी ऐप में जिंसवार रिपोर्ट जनरेट होने की सुविधा अभी तक नहीं है। काश्तकारों के लिए गिरदावरी नकल अति आवश्यक होती है। इसके बावजूद अब तक कोई सुधार नहीं है।

किसानों को कब-कब चाहिए गिरदावरी नकल
- एमएसपी पर कोई जिंस बेचनी हो तो किसानों को रजिस्ट्रेशन के लिए गिरदावरी नकल की आवश्यकता पड़ती है।
- खेत खरीदने व बेचने पर गिरदावरी नकल की जरूरत रहती है, वर्तमान में नकल नहीं मिलने के कारण किसानों को सिंचित खेत की डीएलसी रेट के हिसाब से ड्यूटी चुकानी पड़ रही है। सिंचित व असिंचित में काफी अंतर रहता है।
- केसीसी लेने के लिए किसान को गिरदावरी नकल की आवश्कता रहती है, कई किसानों के केसीसी ऋण इसी वजह से अटके हुए हैं कि उन्हें गिरदावरी नहीं मिल रही है।

कम्पनी नहीं दे रही रिकॉर्ड
राज्य सरकार ने शुरू के तीन साल (संवत 2077, 2078 व 2079) तक किसी निजी कम्पनी से राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन करवाया। इसके बाद खुद का ऐप विकसित कर कम्पनी का ठेका समाप्त कर दिया, लेकिन कम्पनी ने पूरे प्रदेश का राजस्व रिकॉर्ड गायब कर दिया। ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार ने कम्पनी का पूरा भुगतान नहीं किया।

दुगुना पंजीयन शुल्क चुकाना पड़ा
मैंने साढ़े 8 बीघा जमीन खरीदी थी। जमीन असिंचित किस्म की है, लेकिन गिरदावरी रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण पंजीयन शुल्क सिंचित किस्म के अनुसार वसूला गया, जो कि असिंचित से करीब दुगुना था। इसमें मेरी कोई गलती नहीं है फिर भी अधिक पैसे जमा करवाकर पंजीयन करवाना पड़ा है।
- मेहराम, कास्तकार, बलाया

अधिकारियों को कई बार कराया अवगत
ऐप के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन गिरदावरी नकल नहीं मिल रही है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। इसको हमने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा था। मूंग खरीद के लिए भी हमने जिला कलक्टर के कहने पर किसान हित में ऑफलाइन गिरदावारी जारी की थी, जबकि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसके साथ तीन साल का राजस्व रिकॉर्ड कम्पनी उपलब्ध नहीं करवा रही है, जिसके कारण समस्या आ रही है।
- बुद्धाराम जाजड़ा, जिलाध्यक्ष, राजस्थान पटवार संघ, नागौर