
रेण. आचार्य व सत्संग भवन में मौजुद अन्य संतजन।
रेण. कस्बे के लाखासागर तट स्थित रामधाम देवल में अखिल भारतीय रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक आदी आचार्य दरियाव महाराज का 264 वां मोक्ष दिवस गुरुवार को मनाया गया। रेण पीठाधीश्वर सज्जनराम महाराज के सानिध्य में चरण पादुका पूजन सहित कई कार्यक्रम हुए। रेण रामधाम देवल के उत्तराधिकारी संत बस्तीराम शास्त्री ने बताया कि सुबह सात बजे संतों के साथ दरियाव महाराज के मुख्य मंदिर में चरण पादुका पूजन किया व आरती की। त दोपहर 1 से 2 बजे तक सभी रामस्नेही संतों तथा श्रद्धालुओं ने वाणीजी का वाचन किया। शाम को रामधाम देवल के मुख्य गेट से कड़ी पुलिस निकरानी मेंं संत ओमदास महाराज दरियाव महाराज की तपस्याकृत ईंट लेकर पवित्र लाखासागर सरोवर की ओर रवाना हुए। सरोवर तट पर बड़ी संख्या में खड़े श्रद्धालु दरियाव महाराज व ब्रह्मलीन आचार्य हरिनारायण शास्त्री के जयकारे लगाने लगे। बाद में ईंट को सरोवर में तैरने के लिए छोड़ा गया। तपस्याकृत ईंट कागज की नांव की भांति सरोवर में तैरने लगी। तैरती ईंट को श्रद्धालु एकटक निहारते रहे। रात्रि में संतों के प्रवचन व भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। शुक्रवार सुबह महाआरती के बाद मोक्ष दिवस का विधिवत समापन होगा। इस दौरान डेह मंहत आनंदीरामाचार्य, मेड़ता रामधाम देवल उत्तराधिकारी रामनिवास महाराज, श्रीराम महाराज डेह, श्रवणदास महाराज जोधपुर, सुखदेव महाराज कुचेरा, रमताराम महाराज, गंगादास महाराज, लक्ष्मणदास महाराज, रामभरोस रामस्नेही, प्रेमदास, तुकाराम महाराज भादवासी, नौखाचांदावता के संत रामप्रकाश महाराज, संत कीमतराम, संत मनोहरदास, संत रामेश्वरदास सहित बड़ी संख्या में रामस्नेही श्रद्धालु मौजुद थे।
मुख्य सत्संग भवन में दोपहर में हुए सत्संग में पीठाचार्य सज्जनराम ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुधाम सभी धर्मो में महान है। जिस तहर नदियों में गंगा शिरोमणी है, उसी भांति धर्मो में भी गुरूधाम सर्वोपरि है। गुरूधाम पर आध्यात्मिक चर्चा से मोक्ष प्राप्त होता है। गुरू के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं है। गुरू के सानिध्य में सत्संग से मन को शांति मिलती है, लेकिन भक्ति में आडम्बर नहीं होना चाहिए। साधक को दूसरों की आलोचना नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति येन-केन-प्रकारेण धन संग्रह करता है, झूठ-कपट और धोखा भी करता है, लेकिन आखिरी क्षण उसे संसार से खाली हाथ बिदा होना पड़ता है। गुरूधाम के प्रति निष्ठा व जीवन समर्पित करने वाले को मोक्ष प्राप्त होता है। जिस मनुष्य में रामनाम की प्यास है, वही मनुष्य अपने जीवन का कल्याण कर सकता है।
Published on:
08 Dec 2022 06:19 pm
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