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नागौर के इलेक्ट्रीशियन की बेटी संतोष चौधरी बनी आईएएस

Santosh Chaudhary, daughter of electrician from Nagaur became IAS, सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, 2018 की दूसरी सूची में 44वीं रेंक मिली

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Santosh Chaudhary became IAS

Santosh Chaudhary, daughter of electrician from Nagaur became IAS

नागौर. नागौर जिले की एक और बेटी ने सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, 2018 में सफलता हासिल कर माता-पिता व जिले का नाम रोशन किया है। मूल रूप से नागौर के आकेली गांव निवासी व जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल में इलेक्ट्रीशियन पद पर कार्यरत सुखाराम गोलिया की पुत्री संतोष चौधरी ने सिविल सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा, 2018 की दूसरी सूची में 44 रेंक प्राप्त कर सफलता प्राप्त की है।

जानकारी के अनुसार आईएएस-2018 की भर्ती में कुल 812 पद थे, जिनमें से प्रथम सूची में 759 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। दो दिन पूर्व जारी द्वितीय सूची 53 चयनित अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। जिसमें 38 सामान्य, 14 ओबीसी और एक पद एससी का शामिल है।

माता-पिता के अटूट विश्वास से मिली सफलता
पत्रिका से विशेष बातचीत में संतोष चौधरी ने अपनी सफलता का श्रेय पिता सुखाराम व माता गीता देवी के अटूट विश्वास से सहयोग को दिया है। संतोष ने बताया कि उन्होंने जीवन में हमेशा पढ़ाई व स्वावलम्बन को प्राथमिकता दी। स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक व वनस्थली विश्वविद्यालय से एम.टेक करने के बाद संतोष ने देश के प्रतिष्ठित रिसर्च संस्थान भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में वर्ष 2013 से 2015 तक चंद्रमा व मंगल ग्रह पर पानी की खोज के विषय पर रिसर्च किया। इसके बाद कुछ दिन जोधपुर काजरी में भी सर्विस की। इस बीच संतोष को न्यूजीलेंड के विश्वविद्यालय से पीएचडी का ऑफर मिला, लेकिन उसे ठुकराते हुए देश सेवा करने की ठानी और सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगी।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता
संतोष ने बताया कि यूपीएससी की तैयारी के दौरान काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई बार यूं लगा कि सफल नहीं हो पाएंगी, लेकिन माता-पिता के आशीर्वाद व भाई हेमंत कुमार व भाभी अवनिता चौधरी ने हर मोड़ पर उनका सहयोग किया और मनोबल बढ़ाया। यूपीएससी के तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त करने वाली संतोष ने बताया कि कठिन परिश्रम, सतत प्रयास व दृढ़ निश्चय के साथ यदि परिवार के लोगों का सहयोग मिले तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। संतोष ने यह सफलता बिना किसी कोचिंग लिए प्राप्त की है।