
पुलिस की सख्ती ने तस्करी पर लगाम कितनी लगाई यह तो पता नहीं, लेकिन पकड़े जाने वाले मादक पदार्थ अब नई दास्तां बयां करने लगे हैं।
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सूत्रों के अनुसार नशे का काला कारोबार धीरे-धीरे अपनी जड़ें जमाने में लगा है। पिछले छह महीने में ही मादक पदार्थ की तस्करी में अब तक करीब सवा सौ तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। पुलिस की सख्ती ने तस्करी पर लगाम कितनी लगाई यह तो पता नहीं, लेकिन पकड़े जाने वाले मादक पदार्थ अब नई दास्तां बयां करने लगे हैं। कोकीन-हेरोइन की तस्करी तो लगभग खत्म सी हो चुकी है, स्मैक की डिमाण्ड भी नशे के शौकीनों में पहले जैसी नहीं रही। इन तीनों का विकल्प एमडी बनती जा रही है। नशे के लिए इसे काम में लिया जा रहा है, हेरोइन-कोकीन ही नहीं स्मैक तक को भी एमडी ने धकेल दिया है।पिछले करीब पांच-साढ़े पांच साल में पुलिस की ओर से पकड़े गए मादक पदार्थ के आंकड़े बता रहे हैं कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई। शराब को छोटा और लाइसेंसी नशा माना जाने लगा है। नागौर के दूरदराज केे गांवों में डोडा-पोस्त के साथ अफीम-गांजा ही सर्वाधिक काम में लिया जाने वाला नशा है।
कोकीन-हेरोइन चलन से बाहर, चार साल में एक ग्राम भी नहींसूत्र बताते हैं कि कोकीन-हेरोइन नशे के लिए कुछ बरस पहले तक पहली डिमाण्ड थे। वर्ष 2018 में 935 ग्राम हेरोइन और 104 ग्राम बरामद हुई थी। तब से अब तक एक ग्राम भी नहीं पकड़ में आई। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कोकीन-हेराइन अब यहां चलन से बाहर होती जा रही है। स्मैक को भी देखें तो पिछले साल जरूर करीब छह सौ ग्राम बरामद हुई थी, जबकि इस साल के शुरुआती छह महीने में यह सौ ग्राम तक ही पहुंच पाई है।
पिछले तीन साल से एमडी का जोरपुलिस तस्करों की पकड़ और बरामद मादक पदार्थ का आंकड़ा खंगालें तो एमडी बड़ी नशीली वस्तु बनकर सामने आ रही है। इस साल के शुरुआती पांच महीने में यह करीब साठ ग्राम तक बरामद हो चुकी है।
डोडा-पोस्त और अफीम की तस्करी बढ़ीसूत्रों के अनुसार इस साल के मई माह तक ही करीब पौने चार किलो अफीम, 33 क्विंटल से अधिक डोडा-पोस्त और करीब 45 किलो गांजा बरामद हो चुका है। वर्ष 2017 में करीब तीन किलो अफीम, 33 क्विंंटल डोडा पोस्त और मात्र 765 ग्राम गांजा बरामद हुआ था। यह तो पूरे साल में, इससे साफ जाहिर होता है कि पांच साल में डोडा-पोस्त, अफीम के साथ गांजा की तस्करी भी बढ़ी है। वर्ष 2018 में केवल 22 क्विंटल डोडा-पोस्त, वर्ष 2019 में 13 क्विंटल डोडा पोस्त, वर्ष 2020 में 15 क् िवंटल तो वर्ष 2021 में 13 क्विंंटल डोडा पोस्त बरामद हुआ था। यही हाल गांजा और अफीम का है, यहां पकड़े जाने वाला माल करीब चौगुना हो गया है। इससे साफ है कि इसकी खपत बढ़ी है।
तस्कर नहीं कूरियर पकड़े जाते हैंसूत्र बताते हैं कि मादक पदार्थ के साथ पकड़े जाने वालों को पुलिसिया भाषा में भले ही तस्कर कहा जाता हो, लेकिन असल में ये कूरियर होते हैं। पार्सल की तरह माल को एक जगह से दूसरी जगह सप्लाई करने का ये तय दाम लेते हैं। इसके लिए कई बार गाड़ी तक उन्हें उपलब्ध कराकर माल किसको सप्लाई करना है, ये तक बता दिया जाता है। नागौर पुलिस ने पिछले छह महीने में नशीले पदार्थ के विरोध में जो दबिश दी, उसमें सौ से अधिक को तो गिरफ्तार कर जो माल बरामद कर केस बनाए हैं, वो पहले के मुकाबले कई गुना हैं।
नहीं हो रही जमानतसूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों से नशीले पदार्थ का कारोबार करने वाले तस्करों को जमानत मिलने का टोटा पड़ा है। इन छह माह में अब तक करीब 80 मामले एनडीपीएस एक्ट के बने और सौ से अधिक की गिरफ्तारियां हुई, लेकिन नागौर अदालत से एक-दो मामलों में ही जमानत हो पाई। इन मामलों की पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक महावीर विश्नोई का कहना है कि एक भी मामले में मादक पदार्थ की तस्करी में लिप्त रहे आरोपियों की यहां से जमानत नहीं हुई, उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा ही खटखटाना पड़ा।
जेल में पचास फीसदी से अधिकनागौर की जिला जेल समेत अन्य उप कारागार में बंदियों को देखें तो बलात्कार और मादक पदार्थ तस्कर ही ज्यादा मिलेंगे। नागौर जेल में हमेशा करीब डेढ़ सौ बंदी रहते हैं, जिनमें सत्तर से अस्सी तक नशे का कारोबार करने वाले हैं। बताया जाता है कि दो-दो ग्राम की एमडी-स्मैक के साथ गिरफ्तार इन बंदियों की जमानत तक होने में छह माह से साल भर लग रहा है, जिससे जेल में क्षमता से दोगुने से भी अधिक बंदी रह रहे हैं।
इनका कहना
नशे के काले कारोबार में लिप्त तस्करों पर पुलिस ने शिकंजा कस रखा है। छह महीने में ही अस्सी से अधिक मामले बनाकर सवा सौ तस्कर गिरफ्तार किए गए। नशीले पदार्थ भी भारी मात्रा में बरामद हुआ।
-राममूर्ति जोशी, एसपी. नागौर
Published on:
09 Jul 2022 09:14 pm
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