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जिले में लम्पी स्किन डिजीज का थम नहीं रहा कहर, अब तक 1655 पशुओं की मौत

पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालकों को नहीं मिल रही पर्याप्त मदद- कई गोवंश हो रहे मौत के शिकार, स्वयं सेवी संस्थाएं गोवंश की सेवा में जुटी    

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So far 1655 animals have died due to lumpy skin disease in Nagaur

So far 1655 animals have died due to lumpy skin disease in Nagaur

नागौर. पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह बीमारी और अधिक फैलेगी, इसलिए पशुपालकों को सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित करनी है। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार मीणा ने बताया कि गोवंशीय पशुओं में फैल रहा लम्पी स्किन वायरस जनित रोग है, जो मच्छरों, मक्खियों एवं चीचड़ों आदि से फैलता है। इसके उन्मूलन के लिए पशु बाड़े में कीटनाशक दवा का छिडक़ाव करें तथा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

पशुपालन विभाग की ओर से बनाए गए कंट्रोल रूम के अनुसार सोमवार को जिले में इस बीमारी से 177 पशुओं की मौत और हो गई, वहीं 3 हजार 767 नए संक्रमित पशु मिले। जिले में अब तक 4 लाख 72 हजार 964 पशुओं का सर्वे किया गया है, जिसमें से 34 हजार 371 पशु बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं, इनमें 30 हजार 294 का विभाग ने उपचार किया है तथा 8 हजार 343 रिकवर भी हो चुके हैं, जबकि जिले में अब तक 1655 पशुओं की मौत हो चुकी है।हालांकि धरातल पर िस्थति इससे भी विकट है, बीमारी से मरने वाले कई पशु विभाग की गणना में शामिल ही नहीं हो रहे हैं। नागौर शहर के शारदापुरम क्षेत्र में रहने वाले रमेश सोनी ने बताया कि कॉलोनी में बीमार गोवंश की दो दिन पहले मौत हुई, जिसे लेकर स्थानीय पार्षद सहित नगर परिषद के कर्मचारियों को सूचना दी, लेकिन कोई गाय का शव उठाने नहीं आया। ऐसे में आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है।

दानदाता व युवा आ रहे आगे

जिले में खासकर गोवंश में फैली लम्पी स्कीन बीमारी के कारण रोजाना सैकड़ों पशु संक्रमित हो रहे हैं। पशुपालन विभाग के चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मी संक्रमित पशुओं का उपचार करने में जुटे हुए हैं, लेकिन संक्रमित पशुओं की संख्या अधिक होने तथा विभाग में चिकित्साकर्मियों के पद रिक्त होने से हर जगह सरकारी उपचार की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। दूसरी तरफ दवाइयों की भी कमी होने से अब गोवंश को बचाने के लिए दानदाता, गोशाला संचालक एवं युवा आगे आने लगे हैं, जो देसी उपचार से गायों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। तीन दिन पूर्व नागौर दौरे पर आए गोपालन विभाग के मंत्री प्रमोद जैन भाया ने भी कहा था कि लम्पी स्किन बीमारी में देसी उपचार ज्यादा कारगर साबित हो रहा है। ऐसे में गोशालाओं फिटकरी, फिनाइल आदि के घोल से छिड़काव किया जा रहा है। इसे लेकर जिला मुख्यालय पर माय मार्ट के सत्यनारायण पंवार ने फिटकरी का नि:शुल्क वितरण किया और अब फिनाइल दे रहे हैं। दवाइयों की खरीद के लिए भी कई दानदाता आगे आ रहे हैं।

बालाजी गो सेवा समिति खातीनाडा ने किया छिड़कावगायों में फैल रही लम्पी बीमारी की रोकथाम के लिए भामाशाह रामगोपाल सांखला व बालाजी गो सेवा समिति खातीनाडा की युवा टीम की ओर से खातीनाडा, फागली, कलनाडिया में दवाइयों का स्प्रे व गुड़ में दवाई मिलाकर गायों को पिछले 4 दिन से दी जा रही है। इस टीम में युवा महेंद्र सांखला, रवि भाटी, अशोक प्रजापत, गौतम परिहार, आदित्य सोलंकी, यश सोलंकी, महावीर सांखला, हरेन्द्र, योगेश सांखला, करण सोलंकी, योगेश सैनी, रोहित सांखला, मोहित सांखला, भंवरु खान, असलम खान, साकिब खान आदि सहयोगी बने हुए हैं। ये टीम रोजाना 100 से अधिक गायों कि देखभाल कर रही है।

लम्पी स्कीन डिजीज में क्या करें

- पशुओं में रोग के प्रारम्भिक लक्षण दिखाई देने पर रोगी पशुओं को अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग कर आवासित करें।

- स्वस्थ पशुओं को चारा-दाना एवं पानी देने के बाद ही रोगी पशुओं को विशेषकर हरा चारा व सूखा चारा ही दें।

- स्वस्थ पशुओं के दैनिक कार्य पहले करें।

- रोगी पशुओं के उपचार के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय में सम्पर्क करें।

- पशुओं में रोग का फैलाव मक्खी, मच्छरों एवं चीचड़ों के माध्यम से होता है, इसके उन्मूलन के लिए पशु बाड़े में कीटनाशक दवा का छिडक़ाव करें।

- मृत पशु के शव का निस्तारण वैज्ञानिक विधि से ही करें। इसके लिए 1.5 मीटर की गहराई का गड्ढ़ा खोदकर शव पर चूना व नमक डालकर दफना दें।

क्या नहीं करें

- रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं के साथ नहीं रखें।

- रोगी पशुओं को खिलाने-पिलाने के बाद बचे हुए चारा-दाना व पानी को अन्य स्वस्थ पशुओं को नहीं खिलाएं-पिलाएं।

- स्वस्थ पशुओं से पहले रोगी पशुओं के दैनिक कार्य नहीं करें।

- रोगी पशुओं को संभाल रहे व्यक्ति के अलावा अन्य व्यक्तियों को पशु बाड़े में प्रवेश नहीं करने दें।

- पशु आवास व आसपास के स्थानों में पानी को एकत्र नहीं होने दें।