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बारिश के मौसम में पशुओं की करें देखभाल व रोगों से बचाएं

प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है। पशुपालकों को पशुओं की देखरेख में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इस समय परजीवियों की संख्या बढ़ जाती है और आंतरिक व बाह्य परजीवियों के रोग हो जाते हैं। संक्रामक रोगों की अनदेखी करने पर इनकी जान भी जा सकती है। बारिश में दुधारू पशुओं का बचाव के तौर पर उनका टीकाकरण करें।

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नागौर

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VIKAS MATHUR

Jul 03, 2023

बारिश के मौसम में पशुओं की करें देखभाल व रोगों से बचाएं

बारिश के मौसम में पशुओं की करें देखभाल व रोगों से बचाएं

पशुओं के चार दुश्मन
1 गलघोंटू - पशु के शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। आंखें लाल हो जाती है व दोनों टांगों के बीच सूजन आ जाती है।
2 लंगड़ा बुखार -यह बेहद संक्रामक रोग है जो बारिश में मिट्टी के अंदर पैदा होता है। इस रोग का खतरा उन पशुओं को अधिक रहता है जिनके शेड का फ र्श मिट्टी वाला होता है।
3 खुरपका .मुंहपका रोग-. इसमें पशु के मुंह और जीभ के आस पास छाले पड़ जाते हैं। इस मौसम में भूसा, हराचारा, दाना, दलिया, चोकर में फफूंद लग जाती है।
4 दुधारू पशुओं में थनेला रोग- इसमें फर्श के गीले होने व सूक्ष्म जीवाणुओं से भरे होने से दुधारू पशुओं में नीचे बैठने से रोग हो जाता है।

ये रखें सावधानियां
साफ सफाई का रखें ध्यान- बाड़े में पानी को एक जगह पर एकत्रित न होने दें। पशु के मलमूत्र के निकासी का भी उचित प्रबंध हो। प्रतिदिन एक बार बाड़े को फि नाइल के घोल से साफ करें। पशुओं को बाहर चरने के लिए नहीं भेजें। गीली घास पर कई तरह के कीड़े पशुओं के पेट में चले जाते हैं।

बाड़े में प्रतिदिन करें धुंआ -सुबह. शाम पशुओं के बाड़े में धुंआ करें। किसी तगारी या ड्रम में सूखी घासए नीम की पत्तियां और तेजपान की पत्तियां डालकर जला दें। बाड़े में मौजूद कीड़े मकौड़ेए मक्खी. मच्छर भाग जाएंगे। धुंआ पशुओं को बाड़े से बाहर निकालकर करे।

हरे चारे में मिलाए सूखा चारा - सुपाच्य आहार के लिए हरे चारे में 30 - 40 प्रतिशत सूखा चारा हो।

इनका कहना है...
पशुओं को गलाघोंटू, खुरपका. मुंहपका एवं लंगड़ा बुखार से बचाव के टीके लगवाएं। खुरपका-मुंहपका रोग में लाल दवा से खुर्रो को धोना चाहिए। पशुओं को हर तीन महीने में कृमि नाशक दवा पिलानी चाहिए। .

डॉ रामनिवास ढाका, पशु वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण

मोतीराम प्रजापत - चौसला