नियम : एक किसान से अधिकतम 25 क्विंटल व जिले के उत्पादन का 25 प्रतिशत ही खरीदने की शर्तों से घटी खरीद- हकीकत : धरातल पर सरकार ने उपज का 25 प्रतिशत मूंग भी नहीं खरीदा
नागौर. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की खरीद में रोड़े अटकाने के लिए सरकार की ओर से बनाए गए नियम-शर्तों से प्रदेश में वर्ष 2019 में एकदम से खरीद का आंकड़ा गिर गया। वर्ष 2020 में स्थिति और ज्यादा खराब हो गई, इसमें प्रदेश में जहां 12024 मीट्रिक टन मूंग खरीदा गया, वहां नागौर जिले से मात्र 4100 मीट्रिक टन की खरीद हुई। यहां गौर करने वाली बात यह है कि सरकार ने नागौर जिले से वर्ष 2017-18 में जहां मूंग की कुल उपज का 26.54 फीसदी मूंग खरीदा, वहां वर्ष 2018-19 में 15.83 प्रतिशत तथा वर्ष 2019-20 में मात्र 6.78 फीसदी और 2020-21 में तो पूरा एक प्रतिशत (0.92 प्रतिशत) भी नहीं खरीदा।
गौतरलब है कि वर्ष 2017-18 से पहले मूंग की खरीद को लेकर मात्रा से सम्बन्धित कोई राइडर नहीं था, लेकिन बाद में सरकार ने एक किसान से अधिकतम 25 क्विंटल तथा जिले की कुल उपज का 25 प्रतिशत ही खरीदने का नियम बना दिया। हालांकि वर्ष 2018-19 से वर्ष 2022-23 तक सरकार एक बार भी उपज का 25 प्रतिशत मूंग नहीं खरीद पाई। इसके विपरीत यह नियम बनने से न तो सभी किसान पंजीकरण करवा पाते हैं और न ही पंजीकरण करवाने वाले सभी किसानों से खरीद की जाती है। अंत में थक-हारकर किसान एमएसपी से कम दाम में मंडी में मूंग बेचने को मजबूर हो जाते हैं। वर्ष 2019-20 से 2021-22 तक के तीन साल में तो सरकार ने नागौर जिले की कुल उपज का 10 प्रतिशत भी नहीं खरीदा। गौरतलब है कि नागौर जिले का औसत मूंग उत्पादन 4 लाख, 16 हजार, 629 मीट्रिक टन है।
बातें 25 प्रतिशत की, खरीद 10 फीसदी भी नहीं की
वर्ष - उत्पादन - एमएसपी पर खरीद - खरीद प्रतिशत में
2017-18 - 4,36,591 - 1,15,862.88 - 26.54
2018-19 - 4,02,658 - 63,745.48 - 15.83
2019-20 - 4,68,502 - 31753.7 - 6.78
2020-21 - 4,44,363 - 4,100.85 - 0.92
2021-22 - 3,31,030 - 27,407.5 - 8.28
2022-23 - 4,19,408 - 47,376 - 11.29
मूंग के आंकड़े मीट्रिक टन में हैं।
लोकसभा में केन्द्रीय मंत्री का अस्पष्ट जवाब
एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाने को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की ओर से लोकसभा में पूछे गए सवाल का केन्द्रीय कृषि मंत्री ने गोलमाल जवाब दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने लिखित में जवाब देते हुए बताया कि भारत सरकार ने 18 जुलाई 2022 को अधिसूचना जारी करके एक समिति का गठन किया था, जिसमें किसानों, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि तथा राज्य सरकारों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री तथा वैज्ञानिक शामिल थे। समिति को न्यूनतम समर्थन मूल्य को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए देश में बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए फसल पैटर्न में बदलाव करने के संबंध में सुझाव देने हैं। अब तक समिति की ओर से नियमित आधार पर बैठकर तो आयोजित की जा रही है लेकिन एमएसपी पर खरीद गारंटी का कानून बनाने को लेकर कोई प्रभावी निर्णय नहीं कर पाई है। बेनीवाल ने सरकार के जवाब देने के बाद कहा कि उन्होंने समर्थन मूल्य पर खरीद का गारंटी कानून बनाने के संबंध में पूछा था, जबकि सरकार के जवाब में क्रॉप पैटर्न को बदलने तथा एमएसपी को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए एक समिति का गठन करने की बात है।
सरकार की दोगली नीति
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि सरकार के जवाब से यह स्पष्ट है कि किसानों को लेकर सरकार की दोगली नीति है, क्योंकि देश का किसान समर्थन मूल्य पर खरीद का गारंटी कानून बनाने की मांग कर रहा है और सरकार एमएसपी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की बात कर रही है। ऐसे में किसानों की भावना और सरकार के निर्णय में अंतर है।